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माइंस के राष्ट्रीयकरण के एक्ट को रद्द किए बगैर लागू नहीं हो सकती कमर्शियल माइनिंग

खदान मजदूर संघ लाल झंडा एटक यूनियन ने 11 सूत्रीय मांगों को लेकर गुरुवार को गेट मीटिंग ली और शाम सीजीएम ऑफिस के सामने...

Danik Bhaskar | Mar 16, 2018, 03:35 AM IST
खदान मजदूर संघ लाल झंडा एटक यूनियन ने 11 सूत्रीय मांगों को लेकर गुरुवार को गेट मीटिंग ली और शाम सीजीएम ऑफिस के सामने प्रदर्शन किया। उन्होंने कमर्शियल माइनिंग का विरोध किया। पाथाखेड़ा चौकी प्रभारी को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

खदान मजदूर संघ लाल झंडा के महामंत्री श्रीकांत चौधरी ने बताया 10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों के संयुक्त सम्मेलन में श्रमिक समस्याओं को लेकर परिपत्र दिया था। मगर, इस ओर ध्यान नहीं दिया। इसे लेकर गुरुवार को पूरे देश में विरोध दिवस मनाया। इन श्रमिक संगठनों की 11 सूत्रीय मांगों पर तो सरकार ने ध्यान नहीं दिया ऊपर से कमर्शियल माइनिंग का एक्ट तैयार कर दिया, यह वैधानिक नहीं है। वर्ष 1973 में माइंस का भी राष्ट्रीयकरण एक्ट लोकसभा, राज्य सभा में पास किया था। वह जब तक निरस्त नहीं किया जाता तब तक कमर्शियल माइनिंग नियम गैर कानूनी है। सभी 10 श्रमिक संघों के 11 सूत्रीय मांग को लेकर कार्रवाई करने और कमर्शियल माइनिंग को रद्द करने की मांग एटक संगठन ने की।

खदानों पर सुबह एटक यूनियन पदाधिकारी गेट मीटिंग लेते हुए।

गेट मीटिंगों में दी 16 अप्रैल की हड़ताल की जानकारी

इंडियन माइन वर्कर्स फेडरेशन 22 मार्च को डब्ल्यूसीएल मुख्यालय नागपुर में धरना आंदोलन का आयोजन करेगा। 16 अप्रैल को एटक के बैनरतले एक दिवसीय हड़ताल भी की जाएगी। इसके तहत 12 से 21 मार्च तक डब्ल्यूसीएल की सभा शाखाओं में गेट मीटिंगें होंगी। भारत सरकार के कमर्शियल माइनिंग को रद्द करने, ठेकेदारी श्रमिकों को हाई पावर कमेटी के निर्णय अनुसार वेतन देने, घाटे के नाम पर खदानों को बंद करने, मेडिकल रेफरल की प्रक्रिया को सरल करने समेत अन्य मांगों को लेकर उक्त प्रदर्शन होगा।