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62 महिलाएं खदानों में कामगारों की सुरक्षा के लिए बहाती हंै पसीना

महिलाएं... नाम सुनकर ही आंखों के सामने नजाकत आ जाती है। महिलाएं और हार्ड वर्क दोनों को कभी जोड़कर देखा नहीं जाता। मगर,...

Danik Bhaskar | Mar 08, 2018, 03:55 AM IST
महिलाएं... नाम सुनकर ही आंखों के सामने नजाकत आ जाती है। महिलाएं और हार्ड वर्क दोनों को कभी जोड़कर देखा नहीं जाता। मगर, वेस्टर्न कोल फील्ड्स के रीजनल वर्कशॉप में महिलाएं छैनी, हथौड़ी और वेल्डिंग राॅड हाथों में लेकर काम करती हैं। वे कभी थकती न हारतीं। हमेशा काम में अव्वल रहती हैं। हमेशा टारगेट 100 नहीं 110 फीसदी पूरा करती हैं। यहां एक, दो नहीं 62 ऐसी महिलाएं हैं जो हार्डवर्क कर खदानों की सुरक्षा में जुटी हुई हैं। रीजनल वर्कशॉप रीढ़ की हड्‌डी हैं और यहां का तकरीबन पूरा काम महिलाएं ही संभालती हैं। पूरे डब्ल्यूसीएल में बगडोना का रीजनल वर्कशॉप ही अकेला ऐसा स्थान है जहां इतनी महिलाएं काम करती हैं वो भी उनकी प्रकृति से विपरीत।

खदानों के भीतर रूफ सपोर्ट के बोल्ट हों या एलएचडी मशीन की मोटरें। सारे काम महिलाएं पूरी करती हैं। सबसे अच्छी बात यह है महिलाएं रोज मिलने वाले टारगेट के अनुसार काम करती हैं और इसे पूरा भी कर देती है। अंडरग्राउंड कोयला खदानों में रूप बोल्टिंग सबसे महत्वपूर्ण कार्य होता है। महिलाओं द्वारा तैयार किए गए बोल्ट खदानों के भीतर रूफ यानी छतों को सुरक्षित रखते हैं। यानी साढ़े छह हजार से ज्यादा कोयला कामगारों की सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी इन महिलाओं के कंधे पर हैं। महिलाएं इसे बखूबी निभा भी रही हैं। बगडोना में वेस्टर्न कोल फील्ड्स का रीजनल वर्कशॉप है। इसमें मोटर रिवाइंडिंग, रूफ बोल्टिंग, बेल्ट स्ट्रक्चर बनाने का काम होता है। खदानों के भीतर लगने वाली हर बड़ी, छोटी मोटर को ये ही महिलाएं बनाती हैं और सुधारती हैं। जानकर अचंभा होगा रीजनल वर्कशॉप का 75 फीसदी काम (इलेक्ट्रिक को छोड़कर) महिलाएं करती हैं। लेकिन ये महिलाएं जब तक डेली टारगेट पूरा नहीं करतीं तब तक अपनी जगह नहीं छोड़तीं।

सारनी। रीजनल वर्कशॉप में मोटर रिवाइंडिंग का काम करती महिलाएं।


इंचार्ज भी महिला, ट्रेनिंग से

बढ़ा रहे वर्क स्किल

रीजनल वर्कशॉप में सबसे अच्छी बात यह है इन सारी 62 महिलाओं की इंचार्ज भी एक महिला ही है। इनकी इंचार्ज पीयूषा शर्मा बताती हैं महिलाएं अपने कार्य में पूरी तरह पारंगत हैं। कहीं भी वे पीछे नहीं हटतीं। खास बात यह है कंपनी के कठिन समय में वे दिन-रात मेहनत कर टारगेट पूरा करती हैं। कार्य के प्रति समर्पण को देखते हुए कार्य स्थल पर ही उनकी समस्याओं का समाधान किया जाता है। नए कार्य के लिए उन्हें समय-समय पर ट्रेनिंग भी मिलती है।

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रीजनल वर्कशॉप में ज्यादातर महिलाएं डिपेंडेंट यानी अनुकंपा नियुक्ति से काम में लगी हैं। यहां मोटर रिवाइंडिंग का काम करने वाली गौरीबाई भलावी ने बताया वह 1987 से यहां काम कर रही है। शुरुआत में जरूर दिक्कतें आईं, लेकिन अब आदत में है। निर्मला गायकवाड़, पार्वती परिहार, सुगरती, प्रमीला पाटिल और दुर्गा समेत अन्य महिलाएं भी मानती हैं वे पुरुष से किसी भी स्तर पर कम नहीं हैं। सेक्शन में महिलाओं के साथ कुछ पुरुष भी काम करते हैं। मगर, 75 फीसदी से ज्यादा काम महिलाएं पूरा कर देती हैं। कई बार तो पुरुषों की अनुपस्थित में महिलाएं उनका काम भी कर देती हैं।