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सतपुड़ा-2 खदान में खोह से चंद घंटे पहले ट्रैक्टर-ट्रॉली से ढोया जा रहा था कोयला, रूफ कमजोर होने से टूटी थी

सतपुड़ा-2 खदान में रविवार को हुई घटना में कई लापरवाहियां सामने आ रहीं हैं। मगर, घटना का मुख्य कारण कोयले की चोरी है।...

Danik Bhaskar | Jan 09, 2018, 04:05 AM IST
सतपुड़ा-2 खदान में रविवार को हुई घटना में कई लापरवाहियां सामने आ रहीं हैं। मगर, घटना का मुख्य कारण कोयले की चोरी है। मुख्य मोहरे से करीब 100 मीटर दूर खदान परिसर के आखिर में जहां घटना हुई वहां से चंद घंटे पहले ट्रैक्टर-ट्रॉली से कोयला निकाला था। खोह पर से ट्रैक्टर चलने के कारण उसका रूफ कमजोर हो गया था, इससे घटना हुई।

सतपुड़ा-2 खदान में चार लोगों की मौत के बाद हादसे का पूरा ठीकरा डब्ल्यूसीएल पर फोड़ दिया। जबकि मामले में प्रशासन भी पूरी तरह से जिम्मेदार है। बड़ा मामला यह है क्षेत्र में बेरोजगारी के कारण लोग कोयला बिनने गए और अकाल मौत के शिकार हो गए। घटना दुखद है, लेकिन दूसरा पहलू यह है अवैध काम करते हुए खदान की खोह ढही। इसी कारण से मृतकों को मुआवजा भी नहीं मिल पा रहा है। टट्टा कॉलोनी के पूरे मोहल्ले का माहौल गमगीन था। सोमवार को शीलू बाई और पायल का अंतिम संस्कार किया। मीना भोरसे और नानी बाई का रविवार देर रात अंतिम संस्कार कर दिया। मामले को लेकर पाथाखेड़ा चौकी प्रभारी नितिन पाल और एसआई प्रीति पाटिल जांच कर रहे हैं। इससे पहले देर रात पहुंचे विधायक चैतराम मानेकर ने मृतकों के परिवार के हर सदस्य को 5-5 हजार रुपए की सहायता राशि दी।



टट्टा कॉलोनी में सोमवार को भी माहौल गमगीन था। यहां से एक साथ दो अर्थियां उठीं। श्मशान में दो चिताएं एक साथ जली। सोमवार को शीलू बाई और पायल का अंतिम संस्कार किया। सोमवार को कई नेता भी यहां पहुंचे। जिला कांग्रेस अध्यक्ष समीर खान, आमला के पूर्व नपाध्यक्ष मनोज मालवेय ने हर परिवार को 5-5 हजार की सहायता दी।

मां की मौत के बाद 6 साल का प्रथम और 11 साल की देविका हाे गए बेसहारा

हादसे में मीना भोरसे की मौत होने के बाद प्रथम (6) और देविका (11) बेसहारा हो गए। क्योंकि पिता शिवपाल की पहले ही मौत हो चुकी है। टट्टा कॉलोनी की झोपड़ी में 11 साल की देविका भोरसे रोते हुए माता-पिता की शादी का एल्बम देख रही थी। छह साल का छोटा भाई प्रथम क्रियाकर्म और अस्थि विसर्जन करने होशंगाबाद नर्मदा गया था। देविका की मां मीना की रविवार को खदान से कोयला निकालते समय मौत हो चुकी थी। देविका ने बताया पिता शिवपाल की बीमारी से सितंबर 2016 में मौत हो चुकी है। इसके बाद मां ही उन्हें पाल रही थी। अब वे बेसहारा हो गए हैं। रिश्तेदार आज-कल साथ रहेंगे इसके बाद सारी जिम्मेदारी देविका पर ही रहेगी। गरीबी इतनी है कि घर में कुछ खाने को भी नहीं है। देविका विद्या सागर स्कूल में 6वीं तो प्रथम एसईएस स्कूल में पहली क्लास में पढ़ता है।

सीजीएम और कांग्रेस जिलाध्यक्ष में बहस, मजिस्ट्रीयल जांच की मांग

पाथाखेड़ा डब्ल्यूसीएल के सीजीएम उयद ए. कावले और कांग्रेस जिलाध्यक्ष समीर खान में मुआवजे की मांग को लेकर जमकर बहस हुई। आखिर में सीजीएम ने बताया डब्ल्यूसीएल में इस तरह की घटना को लेकर मुआवजे का प्रावधान नहीं है। खदान को सुरक्षित तरीके से डिस्मेंटल किया जा रहा है। यह काम दो से तीन महीने में पूरा हो जाएगा। इस दौरान मो. इलियास, अवधेश सिंह, मनोज मालवे, भगवान जावरे समेत अन्य उपस्थित थे।

डब्ल्यूसीएल ने कहा एबेंडेंट नोटिस दे चुके हैं, खाली कर रहे खदान

वेस्टर्न काेल फील्ड्स ने बंद खदानों को लेकर अपना पक्ष रखा है। जीएम ऑपरेशन अजय सिंह ने बताया डब्ल्यूसीएल की सतपुड़ा-2 खदान आधिकारिक रूप से 5 मई 2013 को बंद की थी। इसका एबेंडेंट नोटिस 8 सितंबर 2016 को जारी किया था। चूंकि इसे खाली कर वन विभाग काे सौंपना है। इसलिए शिफ्टिंग चल रही है। इस बीच यहां हमले भी हुए। इससे पहले पीके 1 को 1 जनवरी 2010 और पीके 2 को 5 अगस्त 2011 को एबेंडेंट हुई हैं। अगले तीन महीने में सतपुड़ा-2 माइन को खाली कर वन विभाग को सौंप दिया जाएगा।

रोते हुए माता-पिता की शादी का एल्बम देखती देविका