पाठाखेड़ा

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लाडो जन्मी, पति ने छोड़ा, अब बेटियां बचाना मकसद

क्या किसी के गर्भ से बेटी पैदा होना पाप है... नहीं न, लेकिन शोभापुर की आरती के लिए पहली बेटी पैदा हो जाना श्राप की तरह...

Dainik Bhaskar

Mar 09, 2018, 04:30 AM IST
लाडो जन्मी, पति ने छोड़ा, अब बेटियां बचाना मकसद
क्या किसी के गर्भ से बेटी पैदा होना पाप है... नहीं न, लेकिन शोभापुर की आरती के लिए पहली बेटी पैदा हो जाना श्राप की तरह था। उसकी पूरी जिंदगी ही बर्बाद हो गई। बेटी के पालन-पोषण की इच्छाशक्ति और हिम्मत से उसने खुद को संभाला। खुद की पढ़ाई की और बेटी को भी पढ़ाया। आज आरती अपने पैरों पर खड़ी है। जिंदगी के संघर्षों से जूझ तो रही है, लेकिन बेटी बचाने के लिए लोगों को जागरूक भी कर रही है।

शोभापुर की क्लब कॉलोनी में रहने वाली आरती की कहानी जितनी दर्द भरी है उससे कहीं ज्यादा प्रेरणादायी भी। पावर प्लांट में काम करने वाले पिता हरिराम वडीलकर ने उसकी शादी 30 जून 2006 को रीतेश सातनकर से की थी। शादी के बाद सबकुछ सही चल रहा था, लेकिन 18 दिसंबर 2007 का दिन उसके लिए अभिशाप बनकर आया। घर में नन्हीं परी दिव्या के पैदा होते ही पति रीतेश ने उसे छोड़ दिया। यहां से शुरू हुआ संघर्ष अभी भी नहीं रुक रहा है। हालांकि पिता हरिराम के साथ रहकर आरती ने ग्रेजुएशन, एमएसडब्ल्यू, पीजीडीसीए समेत अन्य पढ़ाई पूरी की। बेटी को भी स्कूल में दाखिला दिलाया। मई 2014 में पिता की मृत्यु के बाद टीबी पीड़ित भाई राजेश की जिम्मेदारी आरती पर आ गई। उसके और उसके परिवार का पालन-पोषण करते-करते आरती आगे बढ़ी। ग्राम भारती महिला मंडल में नौकरी कर अब वह परिवार चला रही है।

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सारनी। ग्राम भारती महिला मंडल में कंप्यूटर पर जॉब वर्क करती आरती।

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आरती से मिलती-जुलती कहानी पाथाखेड़ा की शबनम की भी है। 23 मई 2003 को नागपुर के नईम शेख के साथ शादी होने के बाद शबनम को 25 अप्रैल 2005 को फातमा जोहरा और 8 जून 2009 को अक्शां नूर पैदा हुईं। पति के कोई जॉब नहीं करने के कारण पूरे परिवार का दारोमदार शबनम के कंधों पर था। तेज धूप, बारिश या सर्दी, पूरे समय निजी कंपनी में जॉब करते हुए परिवार का पालन, पोषण किया। मगर, बेटियां होने के कारण लगातार प्रताड़ना झेल रही थी। आखिर में उसे पाथाखेड़ा आना पड़ा। बड़ी बेटी फातमा नागपुर में ही पढ़ रही है। जबकि छोटी पाथाखेड़ा में। पाथाखेड़ा में रहकर निजी जॉब करते हुए वह बड़ी बेटी को सिंगर और छोटी को डॉक्टर-इंजीनियर बनाना चाहती है।

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