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एटक व सीटू ने कहा खदान बंद करने का निर्णय वापस नहीं लिया तो करेंगे हड़ताल

कोयला खदानों को निजी हाथों में सौंपे जाने के खिलाफ सोमवार को एटक और सीटू यूनियन ने जोरदार प्रदर्शन किया। यूनियन...

Danik Bhaskar | Feb 27, 2018, 04:50 AM IST
कोयला खदानों को निजी हाथों में सौंपे जाने के खिलाफ सोमवार को एटक और सीटू यूनियन ने जोरदार प्रदर्शन किया। यूनियन नेताओं ने यहां दो सत्रों में प्रदर्शन किया। सुबह खदानों और इकाइयों पर गेट मीटिंग और शाम को सीजीएम ऑफिस के सामने प्रदर्शन किया। यहां कोयला प्रबंधन का पुतला भी जलाया। प्रदर्शन कर नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही खदानों को लेकर दिशा निर्देश तय किए जाएं। इसके अलावा निजीकरण को हर हाल में रोका जाए।

केंद्र सरकार द्वारा लिए गए निर्णय कमर्शियल माइनिंग को लेकर एटक और सीटू यूनियन एकजुट हो गई है। लाल झंडे के बैनर तले दोनों यूनियन के पदाधिकारियों ने प्रदर्शन किया। शाम 5.30 बजे चीफ जनरल मैनेजर के ऑफिस के सामने उन्होंने प्रदर्शन किया। इससे पहले पुराना बाजार से दोनों यूनियन के पदाधिकारी रैली लेकर यहां पहुंचे और नारेबाजी के बाद प्रदर्शन किया।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कामरेड कृष्णा मोदी ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा केंद्र सरकार पूरी तरह से कोयला उद्योग को निजी हाथों में देकर देश को नीलाम करने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा देश को आजाद कराने में सेनानियों ने पसीना बहाया। सरकार इसे गुलाम करना चाह रही है। सीटू नेता कामेश्वर राय ने कहा सरकार के अडिय़ल रवैये के खिलाफ सतत प्रदर्शन होगा। यदि निर्णय वापस नहीं हुआ तो संगठन मिलकर देश भर में कोयला उत्पादन ठप कर देंगे। इस मौके पर कालिका प्रसाद, महामंत्री श्रीकांत चौधरी, जवाहर आंवलेकर, लक्ष्मण झरबड़े, कामेश्वर राय, राकेश वाईकर, इंद्रेश रघुवंशी, केके विश्वकर्मा, हेमंत चंद्रतरे, रामा वाईकर, अशोक बुंदेला, जितेंद्र निरापुरे, प्रशांत मंडल, पीसी शुक्ला, बीके चटप आदि ने संबोधित किया। कोयला प्रबंधन का पुतला जलाने के अलावा यहां नारेबाजी भी की।

सारनी। पाथाखेड़ा के सीजीएम ऑफिस आने से पहले दोनों यूनियनों ने रैली निकाली।

सारनी। पाथाखेड़ा के सीजीएम ऑफिस के सामने प्रबंधन का पुतला जलाकर प्रदर्शन करते एटक और सीटू के पदाधिकारी।

इंटक भी कर चुकी है विरोध, दो यूनियनें और आगे आई बढ़ सकता है विवाद

सोमवार को एटक और सीटू यूनियनों ने मिलकर प्रदर्शन किया। इससे पहले विरोध में इंटक यूनियन भी आगे आ चुकी है। यानी आने वाले दिनों में खदानों के निजीकरण को लेकर विवाद बढ़ने की स्थिति बन सकती है। सीटू के अशोक बुंदेला, एटक के श्रीकांत चौधरी ने बताया यूनियनें मुख्यालय स्तर पर इसे लेकर आंदोलन तेज करने की तैयारी में हैं। इधर इंटक के महामंत्री दामोदर मिश्रा ने बताया केंद्रीय पदाधिकारी पहले ही अपना रुख बता चुके हैं। केंद्र सरकार के इस निर्णय के खिलाफ सतत विरोध किया जाएगा। दिल्ली स्तर पर आंदोलन होगा।

यूनियनों ने मिलकर किया विरोध,सुबह हुई गेट मीटिंग

पाथाखेड़ा क्षेत्र की सभी 6 खदानों पर दोनों यूनियनों ने मिलकर गेट मीटिंग आयोजित की। नेताओं ने कहा केंद्र सरकार ने पहले ही कोयला उद्योगों में भर्तियां कम कर दी हैं। नहीं के बराबर भर्ती होने के कारण उत्पादन प्रभावित हो रहा है। कामगारों को ज्यादा काम करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा अब निजीकरण कर पूरी तरह से कोयला उद्योग को बर्बाद किया जा रहा है। कामगारों के हितों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। शोभापुर, तवा-1, 2, सारनी, छतरपुर-1, 2 खदानों में गेट मीटिंगें हुईं।