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खदानें खोलने गांधीग्राम और तवा-3 खदानों को लेकर सर्वे करने दिल्ली से आएगी टीम

कोयला खदानें खोलने के मामले को लेकर केंद्रीय कोयला मंत्री पीयूष गोयल से सांसद की मुलाकात के बाद इस सप्ताह दिल्ली...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 12, 2018, 05:25 AM IST

खदानें खोलने गांधीग्राम और तवा-3 खदानों को लेकर सर्वे करने दिल्ली से आएगी टीम
कोयला खदानें खोलने के मामले को लेकर केंद्रीय कोयला मंत्री पीयूष गोयल से सांसद की मुलाकात के बाद इस सप्ताह दिल्ली से सर्वे टीम पाथाखेड़ा आएगी। टीम डब्ल्यूसीएल के सर्वे विभाग के साथ कागजी कार्रवाई का अवलोकन करेगी। इसके बाद अप्रैल से खदान खोलने की कार्रवाई की जा सकती है। दोनों खदानों को लेकर डब्ल्यूसीएल पहले ही कागजी कार्रवाई पूरी कर चुका है। केवल ग्रीन बेल्ट क्षेत्र की आपत्ति के कारण काम रुका हुआ था।

पाथाखेड़ा में कोयला खदानों से लगातार घटते उत्पादन और नई खदानें नहीं खुलने से बेरोजगारी बढ़ रही है। इसे लेकर 6 मार्च को सांसद ज्योति धुर्वे के साथ आमला- सारनी विधायक चेतराम मानेकर, जिलामंत्री रंजीत सिंह और मंडल अध्यक्ष सुधा चंद्रा ने केंद्रीय कोयला एवं रेल मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की थी। मंत्री ने उच्च अधिकारियों से इस संबंध में चर्चा कर जल्द से जल्द खदानें शुरू करने की बात कही थी। इस मुलाकात के सार्थक परिणाम भी सामने आने लगे हैं। जानकारी मिली है कि केंद्रीय कोयला मंत्रालय दिल्ली की एक टीम पाथाखेड़ा आने वाली है, जो तवा-3 आैर गांधीग्राम खदानों को लेकर आ रही अड़चनों की जानकारी लेगी। भाजपा के जिला मंत्री रंजीत सिंह ने बताया सांसद ने जानकारी दी है इसी सप्ताह दिल्ली की टीम सर्वे करेगी। अड़चनों को सूचीबद्ध कर उनके निपटारे के बाद अप्रैल से खदानों को खोलने की दिशा में तेजी से काम हो सकता है।

खंडवा व सारनी खदानों को कोल लिंकेज तक की चर्चा हो चुकी है

क्षेत्र में यदि दो नई खदानें खुलती हैं तो डब्ल्यूसीएल या खदान संचालन करने वाले प्रबंधन को ज्यादा परेशानी नहीं होगी। इसके कोल लिंकेज को लेकर पहले ही चर्चा हो चुकी है। नागपुर में डब्ल्यूसीएल के सीएमडी और पावर जनरेटिंग कंपनी के एमडी के बीच चर्चा हुई थी। पावर जनरेटिंग कंपनी ने खंडवा और सारनी प्लांट के लिए कोयला मांगा था। इस पर डब्ल्यूसीएल ने नई खदानें खुलने के बाद लिंकेज करने की बात कही थी। यानी यहां का कोयला आसानी से बिक सकेगा।

बैतूल और सारनी के जनप्रतिनिधियों ने खदानों की मांग को लेकर 6 मार्च को ज्ञापन सौंपा था।

पाथाखेड़ा के साथ चोपना क्षेत्र को भी मिलेगा खदानों से फायदा

तवा-3 और गांधीग्राम खदानें यूं तो वेस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड पाथाखेड़ा क्षेत्र के अधीन ही होंगी, लेकिन इसका फायदा पुनर्वास क्षेत्र चोपना को भी मिल सकता है। गांधीग्राम के पास ही खदान खोलने को लेकर सर्वे किया था। इसी तरह तवा-3 भी पुनर्वास क्षेत्र में ही आती है। यानी दोनों खदानें चोपना क्षेत्र को फायदा देंगी। हालांकि खदानें खुलने और कोयला उत्पादन बढ़ने से पूरे जिले को फायदा मिलेगा।

ऐसे जानिए क्या है क्षेत्र की

स्थिति

वेस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड

6 खदानें हैं पाथाखेड़ा क्षेत्र में वर्तमान में

6400 से ज्यादा कामगार कार्यरत

7000 मीट्रिक टन कोयले का रोजाना उत्पादन

2 खदानें सारनी और शोभापुर कभी भी हो सकती हैं बंद

खास: यदि 2 नई खदानें खुलती हैं तो करीब 4 हजार मैन पॉवर बढ़ेगा और स्थानीय लोगों काे रोजगार मिलेगा।

सतपुड़ा पावर प्लांट

6 इकाइयां हैं सतपुड़ा प्लांट में कार्यरत

1 हजार 800 कर्मचारी ही बचे सारनी में

900 मेगावाट उत्पादन औसतन रोज कर रहा प्लांट

2 इकाइयां 6 और 7 नंबर कभी भी हो सकती हैं बंद

खास: प्रस्तावित 660 मेगावाट की एक इकाई प्रस्तावित है, शुरू हुई तो 1 हजार कर्मचारी बढ़ेंगे।

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