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घर का खर्च चलाने के लिए जान जोखिम में डालकर रोज निकालते हंै कोयला, एक बोरी की कीमत ‌‌150 रुपए

बंद खदानों और परिसरों से कोयले को एकत्र कर 100-150 रुपए में बेचकर मैग्जीन और टट्टा कॉलोनी के गरीब अपना परिवार चलाते...

Dainik Bhaskar

Jan 08, 2018, 05:50 AM IST
घर का खर्च चलाने के लिए जान जोखिम में डालकर रोज निकालते हंै कोयला, एक बोरी की कीमत ‌‌150 रुपए
बंद खदानों और परिसरों से कोयले को एकत्र कर 100-150 रुपए में बेचकर मैग्जीन और टट्टा कॉलोनी के गरीब अपना परिवार चलाते हैं। दिन भर में बमुश्किल 1 बोरी कोयला मिल जाए तो बहुत है। यह सबकुछ गैरकानूनी तो है, लेकिन पेट पालने के लिए जरूरी भी। लापरवाही तो डब्ल्यूसीएल प्रबंधन की है जो इन्हें रोका नहीं। बंद खदान से सालों से इसी तरह बेखौफ कोयला निकाला जा रहा है।

डब्ल्यूसीएल की बंद हो चुकी सतपुड़ा-2 खदान में रविवार को एक हिस्सा धंसकने से टट्टा कॉलोनी में रहने वाली तीन महिला व एक बालिका की मौत हो गई। हादसे के बाद प्रशासन, प्रबंधन और सब जागे। जबकि यह सब काफी दिनों से चल रहा था। मोहल्ले के कमलेश तपाड़िया बताते हैं शीलू, पायल या मीना ही नहीं कई लोग इसी तरह से पेट पालते हैं। रविवार को बदकिस्मती से हादसे में इनकी मौत हो गई। नहीं तो 100-150 रुपए के लिए रोज लोग जान जोखिम में डालते हैं।

अगस्त 2013 में बंद हो गया था उत्पादन

सतपुड़ा-2 खदान से अगस्त 2013 से उत्पादन बंद कर दिया था। अगस्त 2017 से कुछ सामान की शिफ्टिंग शुरू हुई तो चोरियों की वारदातें शुरू हो गईं। परिसर अब खंडहर हो गया है। प्रतिबंधित क्षेत्र होने के बाद भी परिसर चारों ओर से खुला है। हादसे के बाद कलेक्टर ने प्रबंधन को बंद खदानों की बाउंड्री बनाने पत्र लिखा और डब्ल्यूसीएल प्रबंधन ने सतपुड़ा 2 खदान पर गार्ड तैनात किए।

सीएम ने यह किया ट्वीट

प्रबंधन के गार्ड पिटे लेकिन नहीं लिया सबक, चली गई 4 जान

सतपुड़ा-2 खदान की आरा मशीन और यहां लगे सब स्टेशन पर 27-28 सितंबर 16 को हथियारबंद चोरों ने धवा बोल दिया था। डब्ल्यूसीएल के 5 सुरक्षाकर्मियों को बुरी तरह पीटकर यहां से 1 लाख से ज्यादा का सामान चोरी किया था। इसके बाद से लगातार यहां चोरियां हो रही थीं, लेकिन न तो सुरक्षा के इंतजाम हुए न ही सामान की शिफ्टिंग। आखिर में लापरवाही के कारण चार जानें चली गईं।

कलेक्टर ने जीएम को लिखा पत्र, बंद खदानों में प्रवेश निषेध करें

जिले में वेस्टर्न कोल फील्ड की बंद खदानों से अवैध उत्खनन न हो तथा इनमें कोई दुर्घटना की स्थिति न बने इसे लेकर कलेक्टर शशांक मिश्र ने वेस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड पाथाखेड़ा के महाप्रबंधक को पत्र लिखा है। पत्र में कलेक्टर ने कहा क्षेत्र अंतर्गत बंद व अनुपयोगी खदानों को तत्काल चिह्नांकित किया जाए। ऐसी खदानों के प्रवेश द्वार फेंसिंग अथवा अन्य माध्यमों तत्काल बंद करवाए जाएं ताकि आमजन इन खदानों में प्रवेश न कर सकें।

यह हुआ मौके पर

1 भाजपा के जिलाध्यक्ष जितेंद्र कपूर ने कलेक्टर से घटना स्थल पर चर्चा कर मुआवजे की मांग रखी। मृतकों को 1-1 लाख रुपए का मुआवजा देने प्रस्ताव भेजेंगे।

2 नगर पालिका अध्यक्ष आशा भारती, उपाध्यक्ष भीम बहादुर थापा ने सहयोग से अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी व अन्य व्यवस्थाएं कराईं।

3 डब्ल्यूसीएल के अस्पताल के इतिहास में पहली बार यहां चारों मृतकों का पोस्ट मार्टम हुआ।

4 यूनियन के नेताओं ने भी प्रबंधन पर मढ़ा घटना का दोष, सीटू के कामेश्वर राय ने कहा सुरक्षा व्यवस्था तैनात नहीं करवा पा रहा डब्ल्यूसीएल।

पायल के पिता करते हैं ड्राइवरी

घटना का शिकार हुई पायल देशमुख (11) के पिता सूर्य देशमुख किसी कंपनी में गाड़ी चलाते हैं। फिलहाल वे इंदौर गए हैं। दो और भाई-बहन होने के कारण परिवार को पालने की जिम्मेदारी मां पर भी है। मां और घर में बड़ी पायल कोयला लेकर आते थे। रविवार को मां कोयला लेने नहीं गई। पायल गुरुकुल स्कूल में छठवीं की छात्रा थीं।

मिट्टी के बीच दबे शव, हर तरफ अफरा-तफरी, डेढ़

घंटे की जद्दोजहद के बाद निकले

रविवार दोपहर 1 बजे सतपुड़ा-2 खदान पर हादसा हुआ। हादसे के बाद खदान परिसर की स्थिति भयावह थी। जहां से खोह बनाकर कोयला निकाला जा रहा था, उसी के करीब में तीन-चार कोयले से भरे थैले रखे थे। मिट्टी में आधे दबे लोग दिखाई दे रहे थे। कमर तक दबी संध्या डेहरिया मदद के लिए चिल्ला रही थी। हर तरफ अफरा-तफरी थी। पुलिस ने डेढ़ घंटे तक बचाव अभियान चलाया और चार को बाहर निकाला। मगर, शीलू चौरसे, मीना शिवपाल, पायल देशमुख, नानीबाई पाठेकर को बचाया नहीं जा सका। उनकी मौके पर ही मौत हो चुकी थी।

सारनी। डब्ल्यूसीएल की बंद हो चुकी सतपुड़ा-2 खदान में दबी हुई महिला।

ये फोटो आपको विचलित कर सकता है पर दिखाना जरुरी है

रियल हीरो बने हरेंद्र, पुलिस के साथ मिलकर बचाई एक जान

हादसे की सूचना मिलने के बाद पहले पहुंचने वालों में पाथाखेड़ा के हरेंद्र भारती भी थे। हरेंद्र ने बताया घटना स्थल पर बहुत सारे लोग थे, लेकिन कोई मदद के लिए नहीं आ रहा था। इक्का-दुक्का लोगों ने चट्टानें हटाने की कोशिश की, लेकिन संभव नहीं था। टीआई महेंद्र सिंह चौहान और एसआई नितिन पाल यहां पहुंचे। हाथों से चट्टानों को हटाकर घायल संध्या को बाहर निकाला। एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया। खून से लथपथ अन्य लोगों को निकालने में लोग पीछे हट रहे थे। मगर, सिक्युरिटी का ड्राइवर प्रवीण बिसंद्रे और हम सबने मिलकर उन्हें भी बाहर निकाला। कुछ लोग फोटो खींच रहे थे तो कुछ पीछे हट रहे थे।

सारनी। खदान से जेसीबी से शवों को निकालते हुए पुलिसकर्मी।

लोगों ने किया विरोध, सीजीएम को लौटना पड़ा

घटना के बाद मौके पर पहुंचे डब्ल्यूसीएल पाथाखेड़ा क्षेत्र के चीफ जनरल मैनेजर उदय ए. कावले को लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा। कड़ी सुरक्षा होने के बाद भी उन्हें लौटना पड़ा। लोगों ने उनकी एक नहीं सुनी। यहां मौजूद राजेश सिन्हा ने बताया प्रबंधन की पूरी गलती है। प्रतिबंधित स्थल है तो इसकी सुरक्षा भी प्रबंधन को करना चाहिए। सुरक्षा विभाग की मिली भगत से यहां अवैध कारोबार संचालित हो रहे थे। हालांकि सीजीएम ने जांच का आश्वासन दिया, लेकिन उन्हें लौटना पड़ा।

बंद खदान को सुरक्षित कर सौंपना था वन विभाग को

डब्ल्यूसीएल ने वन विभाग से जमीन लीज पर लेकर खदानें संचालित की हैं। नियमानुसार कोयला उत्पादन के बाद बंद खदानों में रेत और राख भरकर इसके मोहरे को सुरक्षित रूप से बंद करना चाहिए। सीटू के डब्ल्यूसीएल स्तरीय वेलफेयर बोर्ड मैंबर कामेश्वर राय ने बताया बंद होने के बाद खदान को अपने आधिपत्य में रखना गलत है। यदि रखा भी था तो प्रतिबंधित और खतरनाक क्षेत्र में चारों ओर सुरक्षा बाउंड्री और गार्ड तैनात होने चाहिए। निजी सुरक्षा गार्डों और गनमैनों को हटा दिया यह इसी का परिणाम है।

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