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हादसे के बाद भी खदान परिसर नहीं हुआ सील, प्लास्टिक बीनने बेखौफ घूम रहे मासूम

Pathakheda News - बेरोजगारी के कारण गईं जानें: मोदी पाथाखेड़ा की सतपुड़ा 2 खदान में खोह में दबने से तीन महिलाओं और एक बालिका की मौत...

Dainik Bhaskar

Jan 10, 2018, 09:05 AM IST
हादसे के बाद भी खदान परिसर नहीं हुआ सील, प्लास्टिक बीनने बेखौफ घूम रहे मासूम
बेरोजगारी के कारण गईं जानें: मोदी

पाथाखेड़ा की सतपुड़ा 2 खदान में खोह में दबने से तीन महिलाओं और एक बालिका की मौत पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कृष्णा मोदी ने प्रबंधन की लापरवाही बताया। उन्होंने कहा बेरोजगारी के कारण लोग कोयला बिनने यहां गए और अकाल मौत का शिकार हो गए। यदि पावर प्लांट बेहतर उत्पादन करता और सभी खदानें बराबर चलती तो बेरोजगारी जैसी स्थिति नहीं होती। विडंबना यह है लोगों को पेट भरने के लिए चोरी और गैरकानूनी काम करना पड़ रहा है। मोदी ने कहा प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को रोजगार के अवसर बनाने चाहिए।

सारनी। ये वही जगह है जहां रविवार को खदान के एक हिस्से के धंसकने से चार लोगों की मौत हुई थी। यहां पन्नी बीनने वाले बच्चे बेखौफ घूम रहे हैं।

भास्कर की पहल: कांग्रेस के जिलाध्यक्ष ने कहा देविका और प्रथम की पढ़ाई कराएंगे

रविवार को हादसे में मृत मीना के बेसहारा बच्चे देविका और प्रथम की मदद के लिए अब लोग आगे आने लगे हैं। दैनिक भास्कर की पहल पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष समीर खान ने उनकी साल भर की पढ़ाई का खर्च उठाने का वादा किया। खान ने बताया इस परिवार को सबसे ज्यादा मदद की जरूरत है। मोहल्ले में रहने वाले पूर्व पार्षद श्याम बिहारे ने बताया वार्ड के लोग भी मिलकर मदद जुटा रहे हैं। यहां की समाजसेविका संगीता डेहरिया ने बताया दैनिक भास्कर ने अनाथों का मुद्दा उठाकर बड़ा कार्य किया है। सभी मिलकर बच्चों की मदद करेंगे।

तीन दिन पहले खदान हादसे में चार लोगों की हो चुकी मौत

भास्कर संवाददाता| सारनी

पाथाखेड़ा की सतपुड़ा-2 खदान के एक हिस्से में बनी खोह धंसकने से रविवार को चार महिलाओं की मौत के बाद प्रशासन ने कागजों में तमाम प्रतिबंध लागू कर दिए। डब्ल्यूसीएल प्रबंधन ने भी इसी तर्ज पर खदान परिसर को सील कर दिया, लेकिन प्रतिबंध कहीं नजर नहीं आया। मंगलवार को चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई छोटे-छोटे बच्चे खदान परिसर में पन्नी और प्लास्टिक बीनने के लिए पहुंच गए। भास्कर की टीम यहां पहुंची तब यहां तैनात एकमात्र गार्ड ने इन्हें बाहर किया। यह है खतरनाक बन चुकी खदान की सुरक्षा की सच्चाई।

वेस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड की बंद हो चुकी सतपुड़ा-2 खदान अबेडेंट हो चुकी है। खदान में ज्यादातर खंडहर वाले हिस्से बचे हैं। यहां मिट्टी के नीचे दबे कोयले और इस मिट्टी का उपयोग ईंट भट्टों में हो रहा था। ट्रैक्टरों से परिवहन होने संबंधित खबर मंगलवार को ही भास्कर ने प्रमुखता से प्रकाशित की। इसके बाद यहां अवैध कारोबार तो बंद हो गया, लेकिन लोग बेखौफ यहां घूम-फिर रहे हैं। इसे लेकर कोई रोक-टोक नहीं है। यहां पन्नी बीनने आए बच्चों ने बताया वे रोज आते हैं, कोई नहीं रोकता। आज ही यहां से भगाया है। खतरनाक बात यह है यहां खदान का टाका, खंडहर की कमजोर दीवारें, अवैध कोयला और मिट्टी खनन के बाद खोदी गई खोह आदि सभी के लिए खतरनाक है। यहां तो बच्चे भीतर आए थे। विडंबना की बात यह है सुरक्षा के लिए एक ही गार्ड यहां तैनात था। जबकि इसे सील कर यहां प्रवेश ही प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।

पहले स्तर की जांच पूरी, स्थानीय टीमें जुटीं रिपोर्ट बनाने में

वेस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड की नागपुर मुख्यालय से आई इंटरनल टीम ने जांच की पहले स्टेप पूरी कर ली है। प्रारंभिक स्तर की जांच को लेकर रिपोर्ट तैयार हो रही है। जबकि दूसरे स्तर पर स्थानीय चार सदस्यीय टीम जांच में जुटी है। सीजीएम उदय ए. कावले ने बताया जांच रिपोर्ट मुख्यालय ही भेजी जाएगी।


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