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कोयले की आपूर्ति और फ्लाई एश के उपयोग से ही सुधरेगा सारनी का भविष्य

सारनी| प्रदेश सरकार द्वारा निजी बिजली कंपनियों से बिजली लेने के लिए किए करारों के बाद सरकारी प्लांटों को चलाना...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 03:10 PM IST
कोयले की आपूर्ति और फ्लाई एश के उपयोग से ही सुधरेगा सारनी का भविष्य
सारनी| प्रदेश सरकार द्वारा निजी बिजली कंपनियों से बिजली लेने के लिए किए करारों के बाद सरकारी प्लांटों को चलाना टेड़ी खीर है। सरकारी पावर प्लांट के चीफ इंजीनियर का पद सिर पर कांटों का ताज रखने जैसा है। सतपुड़ा पावर प्लांट के सीई रहे हेमंत कुमार पाठक ने अपने अनुभव के दम पर प्लांट को ना केवल बेहतर तरीके से चलाया बल्कि बंद हो चुकी इकाइयों को शुरू भी करा दिया। अब नए चीफ इंजीनियर का प्रभार ले रहे वीके कैलासिया पर इसकी पूरी जिम्मेदारी है। सारनी में पहले भी चीफ इंजीनियर रह चुके कैलासिया फिलहाल बिरसिंहपुर में हैं और अगले एक सप्ताह में सारनी का चार्ज लेंगे। टाइफाइड से पीड़ित कैलासिया ने भास्कर से अपने अनुभव और सारनी की संभावनाएं साझा की।

सारनी में विकास की अपार संभावनाएं, योजनाबद्ध तरीके से करेंगे काम: वीके कैलासिया

वर्ष 1989 में कोरबार से एई पद पर सेवाओं में आए वीके कैलासिया वर्तमान में बिरसिंहपुर पावर प्लांट के चीफ इंजीनियर हैं। विभिन्न स्थानों पर कार्य के बाद वे वर्ष 2014-15 में सारनी के चीफ इंजीनियर रहे। इसके बाद उन्हें इस पद पर दोबारा मौका मिल रहा है। डीग्रोथ में जा रही सारनी का चीफ इंजीनियर बनना चुनौतीपूर्ण है। इसे लेकर उनसे सीधी बात-

सीधी बात

वीके कैलासिया, नए चीफ इंजीनियर


- सारनी की स्थापित इकाइयां अपनी क्षमतानुसार उत्पादन कर राष्ट्रहित में कार्यरत रहे। यह मुख्य उद्देश्य है। प्रतिस्पर्धा के दौर में यह चुनौतीपूर्ण है, लेकिन टीम सतपुड़ा बेहतर कार्य करती है। सभी मिलकर परफारमेंस यूटीलाइजेशन फेक्टर को बेहतर करेंगे।


-अकेला सारनी ही नहीं प्रदेश के अन्य प्लांटों में कोयले की कमी है। मगर, सारनी में कोयले के बेहतर लिंकेज हैं। कोल मैनेजमेंट भी बेहतर है। निर्बाध बिजली मिले और कोयला मिलता रहे इसके लिए सतत प्रयास करेंगे।


-सतपुड़ा प्लांट में पुरानी इकाइयों का डिस्मेंटल कार्य हो गया है। कागजी तौर पर तैयारियां तो हैं, लेकिन कब इकाइयां आ जाएंगी यह कह पाना मुश्किल है। इसके लिए हर स्तर से प्रयास हो रहे हैं।

बताए अपने अनुभव: सारनी में कोयले की कमी सबसे बड़ी चुनौती है। बगैर ईंधन के प्लांट चला पाना मुश्किल है। फिर भी हम यहां आकर कोल लिंकेज वाले स्रोतों से सतत संपर्क कर स्थिति बेहतर करेंगे। सारनी नगर के लोगों को प्लांट की ओर से जरूरी सुविधाएं मिले और रोजगार के अवसर आएं इसके लिए प्रयास करने जरूरी है। फ्लाई एश के यूटीलाइजेशन के लिए भी कंपनी सख्त है। इसे बढ़ाया जाएगा।

हर कर्मचारी-अधिकारी को माना चीफ इंजीनियर तब किया सफलतापूर्वक कार्य: हेमंत पाठक

वर्ष 1981 में कोरबा से एई पद पर सेवाओं में आए हेमंत कुमार पाठक ने 1984 से सारनी में सेवाएं देना शुरू की। दो-तीन महीनों को छोड़कर वे करीब 35 साल सारनी में ही रहे। रिटायर होने के पहले उन्होंने अनुभव साझा किए। पाठक ने बताया उनके कार्यकाल में हर कर्मचारी और अधिकारी चीफ इंजीनियर था। ऐसा मानकर ही उन्होंने कार्य किया। कार्यकाल के अनुभव उन्होंने इस तरह साझा किए-

सीधी बात

हेमंत कुमार पाठक, सीई सतपुड़ा पावर प्लांट


- बिजली इकाइयों से सतत उत्पादन जारी रखना सबसे बड़ी चुनौती है। कोयले की कमी। राख का यूटीलाइजेशन अलग समस्या बनकर उभरे। टीम की मदद से सबसे निबटे।


- प्रयास अकेले नहीं होते। टीम करती है। संकट के दौर में सभी ने मिलकर काम किया। इतनी कमी होने के बाद भी इकाइयां बंद नहीं हुई यह प्रमाण है। नागपुर, पाथाखेड़ा और दिल्ली तक के अधिकारियों से संपर्क कर कोयला मंगाया। कन्हान-पेंच क्षेत्र से सड़क मार्ग से कोयला शुरू कराया।


- सारनी में संभावनाओं की कमी नहीं हैं। यहां कोयला है, पानी है और जमीन भी। यानी इकाइयां स्थापित होंगी। 660 मेगावाट की दो इकाइयां प्रस्तावित हैं। शासन स्तर पर प्रस्ताव चल रहा है। मगर, तैयारी पूरी है।

बताए अपने अनुभव: पैंतीस सालों के कार्यकाल में बेहतर अनुभव मिले। यहां के लोग अच्छे और स्मृतियों में चिरस्थाई है। सतपुड़ा प्लांट की टीम ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। चुनौतियां बहुत हैं। कार्यकाल खत्म होने का दुख तो है, लेकिन सारनी से नाता जुड़ा रहेगा। कैलासिया और पूरी टीम को शुभकामनाएं।

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