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सतपुड़ा पावर प्लांट में कोयला खत्म सात नंबर इकाई को करना पड़ा बंद

सारनी। सतपुड़ा पावर प्लांट में कोयले की कमी के कारण इकाइयां बंद करने की नौबत आ गई है। डिमांड के बाद भी इकाइयों का...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 27, 2018, 03:55 AM IST

सतपुड़ा पावर प्लांट में कोयला खत्म सात नंबर इकाई को करना पड़ा बंद
सारनी। सतपुड़ा पावर प्लांट में कोयले की कमी के कारण इकाइयां बंद करने की नौबत आ गई है।

डिमांड के बाद भी इकाइयों का लोड करना पड़ा कम

प्रदेश में बिजली की बेहतर डिमांड होने के बाद भी कोयले की कमी के कारण सतपुड़ा पावर प्लांट की इकाइयों को कम लोड पर चलाना पड़ रहा है। प्लांट की 6 में से 4 इकाइयां ही चल रही हैं। 7 नंबर इकाई काे शनिवार को बंद करना पड़ा तो वहीं 6 नंबर इकाई सप्ताह भर पहले ट्यूब लीकेज के कारण बंद हुई थी तो दोबारा चालू करने के लिए भी कोयला नहीं है। प्लांट की 8 और 9 नंबर इकाई क्रमश: 135-135 मेगावाट के लोड पर है। वहीं 11 और 12 नंबर इकाई 220-220 मेगावाट उत्पादन दे रही है। 8 व 9 नंबर इकाई 210 और 10 और 11 नंबर इकाई 250 मेगावाट की क्षमता वाली है।

परफारमेंस पर पड़ रहा असर

इस पूरे साल सतपुड़ा पावर प्लांट में कोयले की कमी बनी हुई है। इस कारण इकाइयों को लोड पर भी नहीं चलाया जा रहा है। कुल मिलाकर सतपुड़ा पावर प्लांट का सारा परफारमेंस खराब हो रहा है। परफारमेंस यूटीलाइजेशन फेक्टर के आधार पर ही प्लांट को आवंटन भी मिलता है। मगर, इस साल हर समय इकाइयों का लोड कम रहा। ज्यादातर समय इकाइयां बंद रहीं। कभी ट्रांसफार्मर जलने तो कभी ट्यूब लीकेज के कारण। पांच महीनों से ऐसा ही चल रहा है।

नहीं सुधर पाई डिस्पैच की स्थिति, खंडवा की ओर ज्यादा ध्यान दे रही कंपनी

सारनी में पाथाखेड़ा की छह कोयला खदानों से कोयला विभिन्न माध्यमों से पहुंचता है। शोभापुर, सारनी माइन का कोयला कन्वेयर बेल्ट से तो तवा-1, तवा-2 और छतरपुर-1 और छतरपुर-2 खदान से कोयला खदानों से कोयला डंपरों से सारनी पहुंचता है। मगर, स्थानीय खदानों से 3000 से 3500 टन कोयला ही मिल पा रहा है। इसके अलावा मोहन कॉलरी से भी कोयले की आवक कम हो गई है। कंपनी ने भी सारनी के हिस्से का कोयला संत सिंगाजी महाराज थर्मल पावर प्लांट खंडवा भेजना शुरू कर दिया है। जब से यहां नई 660 मेगावाट की इकाई शुरू हुई तब से सारनी में कोयले की ज्यादा समस्या आ रही है।

कोयले की कमी के चलते बंद की इकाई

सतपुड़ा प्लांट में कोयले की बेहद कमी है। इकाइयां चलाने के लिए भी कोयला नहीं है। इकाइयों की मिल और ग्राउंड स्टॉक मिलाकर मात्र 20 हजार मीट्रिक टन कोयला बचा है। यह बेहद क्रिटिकल पोजीशन है। सोमवार के बाद ही हालत सुधरने की उम्मीद है। वरिष्ठ अधिकारी कोयला मंगाने के लिए डब्ल्यूसीएल और रेलवे के अधिकारियों के सतत संपर्क में हैं। वीसी टेलर, पीआरओ, सतपुड़ा प्लांट सारनी

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