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पाथाखेड़ा में बिजली ओवरलोड, तीन दिन में दो ट्रांसफार्मर जले, लोग अंधेरे में रहने को मजबूर

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 02, 2018, 05:10 AM IST

पाथाखेड़ा में बिजली ओवरलोड, तीन दिन में दो ट्रांसफार्मर जले, लोग अंधेरे में रहने को मजबूर
लोगों का गुस्सा फूटा, लेकिन यूनियनों का ध्यान नहीं

कामगार परिवार हो रहे परेशान, दोगुना हुई बिजली की खपत

भास्कर संवाददाता | सारनी

भीषण गर्मी के दौर में पाथाखेड़ा की बिजली ओवरलोड हो गई। कनेक्शनों की अधिकता और कम क्षमता के उपकरणों के कारण स्थिति बिगड़ गई। व्यवस्था पूरी तरह से ओवर लोड होने के कारण पाथाखेड़ा में तीन दिनों में दो बड़े ट्रांसफार्मर जल गए। इससे पाथाखेड़ा की बिजली व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई। फिलहाल शोभापुर में राहत है। मगर, बिजली की खपत दोगुनी हो गई।

पाथाखेड़ा और शोभापुर कॉलोनी में रहने वाले 6500 से ज्यादा डब्ल्यूसीएल कर्मचारियों को बिजली देने की व्यवस्था प्रबंधन का विद्युत विभाग करता है। मगर, पाथाखेड़ा और शोभापुर कॉलोनी में थोक में अवैध कनेक्शनों के कारण हालत खराब है। सामान्य दिनों में रोज यहां 42 से 52 हजार यूनिट होने वाली बिजली की सप्लाई अब 1.20 लाख से ज्यादा हो गई है। शुक्रवार को पाथाखेड़ा में इतनी ज्यादा कटौती के बाद भी खपत 53 हजार और शोभापुर में 58 हजार यूनिट की हुई। यह सामान्य से काफी ज्यादा है। ओवरलोड होने के कारण तीन दिनों में दो स्थानों के ट्रांसफार्मर जल गए। इसमें एक बाजार मोहल्ला क्षेत्र का तो दूसरा पाथाखेड़ा की ऑफिसर्स कॉलोनी की सप्लाई वाला है। यानी अब राजेंद्र नगर और अन्य क्षेत्रों के ट्रांसफार्मरों से इसे कनेक्ट किया है। हर एक घंटे के अंतराल में बिजली सप्लाई हो रही है। कांग्रेस नगर, सुभाष नगर, आंबेडकर नगर, राजेंद्र नगर, आजाद नगर, पटेल नगर और शिवाजी नगर समेत अन्य क्षेत्रों में रात-रात भर कटौती हो रही है। इस बार यूनियनें पूरी तरह से शांत बैठी हैं। सुभाष नगर के लोगों ने अब आंदोलन की चेतावनी दी है।

सारनी। सब स्टेशन में स्विच को ओवर हीट होने से बचाने 24 घंटे कूलर की हवा दी जा रही है।

ड्रिलिंग कैंप में साढ़े तीन सालों से चौबीस में से 22 घंटे कटौती

पाथाखेड़ा का वार्ड 28, ड्रिलिंग कैंप साढ़े तीन सालों से रोज 22 घंटे की कटौती झेल रहा है। बिजली के नाम पर दिन में एक और रात को एक घंटे बिजली डब्ल्यूसीएल की मर्जी अनुसार सप्लाई होती है। यहां रहने वाली सविता डेहरिया और अन्य महिलाओं ने बताया डब्ल्यूसीएल से कई बार मांग कर चुके हैं, लेकिन सप्लाई में सुधार नहीं हुआ। दो घंटे की बिजली में तो ठीक से मोबाइल चार्ज नहीं होता। यहां रहने वाले साढ़े पांच हजार से ज्यादा लोग मुसीबत में जीवन यापन कर रहे हैं।

आरएलसी से करार 20 घंटे बिजली देने का, कटौती 10 से 15 घंटे

आरएलसी यानी रीजनल लेबर कमिश्नर के साथ प्रबंधन के करार के अनुसार पूरा पानी और कम से कम 18 से 20 घंटे बिजली मुहैया कराना जरूरी है। मगर, पाथाखेड़ा में ऐसा नहीं हो रहा। यहां अवैध कनेक्शनों के कारण 10 से 15 घंटे तक की कटौती हो रही है। इसके बाद भी पांचों ट्रेड यूनियनें प्रबंधन के आगे चुप बैठी हैं।

हीट हो रहे ट्रांसफार्मर और स्विच

ओवरलोड होने के के कारण डब्ल्यूसीएल के पुराना बाजार स्थित सब स्टेशन को प्रोटेक्शन में रखा है। यहां स्विच और ट्रांसफार्मरों को हीट से बचाने के उपाय किए जा रहे हैं। सब स्टेशन में स्विच बस को हीट से बचाए रखने के लिए एक्जास्ट फैन और हैवी कूलर लगाकर रखा है। कमरे को पूरी तरह ठंडा रखा जा रहा तब जाकर स्विच ठीक रह रहे हैं। इससे पहले तीन स्विच जल गए।

ओवरलोड के ये हैं प्रमुख कारण

हर घर में हैवी प्रोटेक्शन के लिए लगा स्टेबलाइजर। करीब हर झोपड़ी में 2 से 3 कूलर, खाना पकाने के लिए हीटर, अन्य उपकरण। कटौती से बचने के लिए करीब सभी ने अलग-अलग फीडरों के कनेक्शन ले रखे हैं। मुफ्त की बिजली लेने के लिए गली-मोहल्लों में तारों से सीधे हुकिंग कर बिजली चोरी।

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