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आंदोलन| स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की हालत स्थिर, मगर कमजोरी बढ़ी, टेंट एसोसिएशन ने भी दिया समर्थन

सारनी। जय स्तंभ स्थित धरना स्थल पर डॉ. मोदी को टेंट एसोसिएशन सदस्य समर्थन पत्र सौंपते हुए। मोदी की भूख हड़ताल को...

Dainik Bhaskar

May 19, 2018, 06:30 AM IST
आंदोलन| स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की हालत स्थिर, मगर कमजोरी बढ़ी, टेंट एसोसिएशन ने भी दिया समर्थन
सारनी। जय स्तंभ स्थित धरना स्थल पर डॉ. मोदी को टेंट एसोसिएशन सदस्य समर्थन पत्र सौंपते हुए।

मोदी की भूख हड़ताल को मिला जन समर्थन



भास्कर संवाददाता | सारनी

शहर के अस्तित्व को बचाने और उद्योग, खदानों की स्थापना की मांग को लेकर तीन दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे 88 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ. कृष्णा मोदी के समर्थन में सारे शहर के व्यापारी आगे आए हैं। शुक्रवार को ना कोई रैली ना को आह्वान व्यापारियों ने स्वप्रेरणा से दुकानें बंद कर मोदी का समर्थन किया। सारनी, पाथाखेड़ा और बगडोना की दुकानें पूरी तरह बंद रही। व्यापारी जय स्तंभ चौराहे पर धरने पर भी बैठे। हालांकि शोभापुर में इसका आंशिक असर देखने को मिला। मोदी ने किसी भी सूरत में भूख हड़ताल तोड़ने से मना कर दिया है।

जय स्तंभ चौराहे पर 1 मई से चल रही क्रमिक भूख हड़ताल के बाद अब स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कृष्णा मोदी ने मोर्चा संभालकर भूख हड़ताल पर बैठे गए। दो दिनों तक प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी हड़ताल तुड़वाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। तीसरे दिन भी मोदी ने स्पष्ट कहा जब तक प्लांट की इकाइयां लगाने, खदानें खोलने और सूखाढाना में औद्योगिक क्षेत्र के विकास की कागजी कार्रवाई से संबंधित जानकारी नहीं दी जाती तब तक वे भूख हड़ताल नहीं तोड़ेंगे। इस बीच व्यापारियों ने स्वयं ही अपने प्रतिष्ठान बंद कर भूख हड़ताल को समर्थन दिया। सारनी, पाथाखेड़ा और बगडोना में तो बंद 100 फीसदी सफल रहा। रात तक व्यापारियों ने दुकानें नहीं खोली। ज्यादातर व्यापारी मोदी के समर्थन में दिनभर धरना स्थल पर बैठे रहे। इसके अलावा ऑटो चालक संघ के समर्थन के बाद एक भी ऑटो, टैक्सियां शहर में नहीं चलीं।

ना कोई रैली ना कोई आह्वान, व्यापारी स्वयं ही दुकानें बंद कर बैठे धरने पर

डॉ. मोदी को हड़ताल छोड़ चर्चा का रास्ता अपनाने का दिया सुझाव

भाजपा जिला मंत्री रंजीत सिंह ने स्वतंत्रता संग्राम सैनानी डॉ. कृष्णा मोदी के साथ होने की बात कही लेकिन डॉ. मोदी के मंच पर रहने वाले विकास विरोधियों से आपत्ति है। श्री सिंह ने कहा जिनने 60 साल तक देश का विकास नहीं किया। वे लोग आज डॉ. मोदी का नाटकीय साथ देकर राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। शुक्रवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने भी सारनी में पावर प्लांट लगाने की बात को मंच से दोहराया। खदानें, पावर प्लांट और उद्योग के लिए काम हो रहे हैं। कागजी कार्रवाई को सार्वजनिक करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा डॉ. मोदी ने आजादी की लड़ाई लड़ी है। इसलिए उन्हें भूख हड़ताल का रास्ता छोड़कर चर्चा का रास्ता अपनाना चाहिए। भाजपा और इससे जुड़े जनप्रतिनिधि सीधे मुख्यमंत्री से मुलाकात कर समाधान निकालेंगे।

टेंट व्यवसायियों ने कहां मोदी के साथ हैं, सामान भी मुफ्त में देंगे

धरना स्थल पर शुक्रवार दोपहर में टेंट एसोसिएशन के सदस्य पहुंचे और डॉ. मोदी को समर्थन दिया। अध्यक्ष हेमराज नागले, दिलीप बारस्कर, नरेंद्र विश्वकर्मा, सतीश कोसे, रवि डेहरिया, सुनील मोखेड़े, सुभाष कनौजिया समेत अन्य लोगों ने बताया खदानें, पावर प्लांट के भरोसे उनका रोजगार चल रहा है। यही नहीं होंगे तो रोजगार कैसे मिलेगा। उन्होंने डाॅ. मोदी और साथियों को पूरा समर्थन दिया। टेंट संबंधित सामान भी मुफ्त में देने का ऐलान किया।

सोशल मीडिया पर कमेंट से नाराज था कालीमाई व्यापारी संघ

सारे शहर में मोदी की भूख हड़ताल के समर्थन में बंद का आह्वान किया था। मगर, कालीमाई व्यापारी संघ ने समर्थन नहीं दिया। संघ अध्यक्ष रमेश हारोड़े ने स्पष्ट किया कालीमाई व्यापारी संघ को लेकर सोशल मीडिया वाट्स एप पर उद्योग बचाओ, नगर बचाओ समिति के ग्रुप में गलत पोस्ट व टिप्पणी की थी। इसलिए उन्होंने समर्थन नहीं दिया व सारी दुकानें भी खुली रहीं।

हड़ताल पर बैठे मोदी से बात..

मोदी बोले राजनीतिकरण ना हो इसलिए 88 की उम्र में भूख हड़ताल पर बैठा

16 मई को सुबह 9 बजे से भूख हड़ताल पर बैठे 88 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ. कृष्णा मोदी ने स्पष्ट किया वे इस आंदोलन का किसी भी तरह से राजनीतिकरण नहीं चाहते। इसलिए वे खुद बेमुद्दत भूख हड़ताल पर बैठे। धरना स्थल पर भास्कर से चर्चा में उन्होंने कहा कुछ लोग राजनीति करना चाहते हैं, इसलिए आंदोलन को सही रास्ते पर ले जाने के लिए उन्होंने यह रास्ता चुना। तीन दिन की भूख हड़ताल के बाद उनकी तबियत नासाज थी, लेकिन वे चल-फिर रहे हैं। मोदी ने बताया वे अगले 7 दिनों तक भी बिना अन्न लिए रह सकते हैं। पहले दिन आंतों में खिंचाव की शिकायत हुई, लेकिन दूसरे दिन से सब कुछ नार्मल लग रहा है। उनके वजन में दो किलो से ज्यादा की कमी हुई। सितंबर-अक्टूबर 1978 में 21 दिनों तक भूख हड़ताल कर चुके मोदी ने बताया उस समय भी सरकार मांगें नहीं मान रही थी। अकेले हड़ताल पर बैठे रहे और मांगें मनवाई। डब्ल्यूसीएल की वेलफेयर से संबंधित कई मांगें मनवाने में वे कामयाब रहे। सारनी का पिता होने के नाते वे इस आंदोलन में अपनी कुर्बानी भी देने को तैयार हैं।

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