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समर्थन मूल्य 4400 प्रति क्विंटल पर चना खरीदी एक हफ्ते लेट, आज से होगी शुरू

समर्थन मूल्य 4400 रुपए प्रति क्विंटल पर चना खरीदी मंगलवार से शुरू होगी। खरीदी एक हफ्ते लेट शुरू हो रही है। अधूरे...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 04:20 AM IST

समर्थन मूल्य 4400 रुपए प्रति क्विंटल पर चना खरीदी मंगलवार से शुरू होगी। खरीदी एक हफ्ते लेट शुरू हो रही है। अधूरे इंतजामों से 10 अप्रैल से खरीदी शुरू नहीं हो सकी। सोमवार को अमावस्या के कारण मंडी बंद रही। हालांकि कार्यालयीन काम होते रहे। मंडी परिसर में देवगांव और तरौन सहकारी समितियां विपणन संघ के लिए चना खरीदेंगी। दोनों समितियों के पास 20-20 गठान बारदाने (एक गठान में 500 वारदाने) पहुंच चुके हैं। किसानों की चना क्वालिटी चैक करने के लिए सर्वेयर भी नियुक्त कर दिया गया है। चना बेचने के लिए करीब 2000 किसानों ने पंजीयन कराए हैं। पुराना चना समर्थन मूल्य सिस्टम में स्वीकार नहीं होगा। उसके लिए किसान की सहमति से खुली नीलामी होगी। मंगलवार के लिए करीब 300 किसानों को एसएमएस छोड़े गए हैं। खरीदी 10 अप्रैल से शुरू होना था। लेकिन इंतजामों में कमी के कारण खरीदी शुरू नहीं हो सकी है। अभी तक मंडी में खुली नीलामी चल रही थी। व्यापारी चना खरीद रहे थे। चना रेट 2700 से 3500 रुपए प्रति क्विंटल तक है। 1 अप्रैल से 13 अप्रैल के बीच मंडी में 50,500 क्विंटल चना की आवक हा़े चुकी है। जबकि मार्च माह में 69,160 क्विंटल चना मंडी में बिक चुका है। 1.19 लाख क्विंटल चने की आवक हो चुकी है। जबकि पिछले साल 2017 में 1 से 13 अप्रैल के बीच चाने की आवक कम थी। कुल 25,500 क्विंटल आवक थी।

मंडी ने तैयार किया सेट, वारदाने नहीं आने से शुरू नहीं हो सकी समर्थन मूल्य पर चना खरीदी

माखननगर| सेवा सहकारी समिति सांगाखेड़ाकलां ने सोमवार को भी समर्थन मूल्य पर चना खरीदी नहीं हो सकी। खरीदी शुरू नहीं होने कारण बारदाने नहीं आना। बारदाने आने के बाद अब मंगलवार सुबह से खरीदी शुरू होगी। कृषि उपज मंडी सचिव राजेंद्र दुबे ने बताया चना खरीदी के लिए शेड की सफाई और वाहनों के आने जाने के लिए मैदान समतल करवाया है। अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध करा दी हैं। समिति की तैयारी नहीं होने के कारण खरीदी शुरू नहीं हो सकी। सेवा सहकारी समिति सांगाखेड़ाकलां के बाबई मंडी में चना खरीदी के प्रभारी हेमंत परसाई के मुताबिक डीएमओ को बारदाने की डिमांड भेजी है। परंतु बारदाने नहीं आए इसलिए तुलाई नहीं हो सकी। सोमवार रात तक बारदाने आएंगे। मंगलवार सुबह से चना खरीदी शुरू करा दी जाएगी।

एक दिन में एक किसान से 40 क्विंटल से ज्यादा चना नहीं खरीदेंगे

मंडी सचिव नरेश कुमार परमार ने बताया गेहूं की तरह ही चना खरीदी होगी। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से सीधे नीलामी होगी। इसके बाद चना मंडी परिसर के अंदर लाया जाएगा। एक किसान से 1 दिन में अधिकतम 40 क्विंटल चना खरीदा जाएगा। चना बेचने के लिए एसएमएस सिस्टम का पालन होगा। गेहूं की तरह ही चने की नीलामी होगी। बैठक में सभी कर्मचारियों को पाबंद किया है।

ढाई लाख क्विंटल गेहूं खरीदी

माखननगर|
बैंक पर्यवेक्षक रफीक खान ने बताया सायलो, मंडी, वेयरहाउस और अन्य खरीदी केंद्रों पर 245633.80 क्विंटल गेहूं 1904 किसानों से खरीदी जा चुकी है। 206690.95 क्विंटल का परिवहन भी हो चुका है। 34572.12 क्विंटल गेहूं का स्टाक खरीदी केंद्रों पर शेष है।

केंद्रों पर उठाव की गति धीमी है

कृषि विभाग के मुताबिक प्रति एकड़ 8 से 10 क्विंटल चना उत्पादन निकला है। कृषि कार्यालय के मुताबिक ब्लाॅक में करीब 12 हजार हेक्टेयर में चना था। जिले में 30 हजार हेक्टेयर में चना था। ग्रामीण केंद्रों पर उठाव की गति धीमी है। केंद्र पैक हो रहे हैं। ग्रामीण केंद्र रामपुर में 35 हजार क्विंटल, सांडिया में करीब 5 हजार , देवगांव में 20,000 क्विंटल, तरौन में 5000 क्विंटल, सेमरीतलां में 3000, धनाश्री में 2500 क्विंटल गेहूं डंप है।

मंडी प्रशासन और समिति करेगी निगरानी

चना खरीदी में बिचौलिए फायदा ना उठा पाएं। इसके लिए मंडी प्रशासन और एफएक्यू समिति निगरानी करेगी। समिति प्रबंधकों को सतर्क रहने की जरूरत है। चना खरीदी शुरू होते ही बिचौलिए सक्रिय हो गए हैं। खरीदी केंद्रों के चक्कर काटने लगे हैं। कई लोगों इसी माह चना खरीदकर स्टॉक करके रखा है। वे इसे किसानों के पंजीयन पर खपाएंगे। जिससे सीधे 1000 से 1200 रुपए प्रति क्विंटल का लाभ होगा। हालांकि प्रशासन भी सतर्क है। ऐसी किसी भी हरकत की सूचना मिलते ही तत्काल संबंधितों पर कार्रवाई होगी। एसडीएम मदनसिंह और मंडी सचिव नरेश कुमार परमार ने कहा एेसी किसी भी गड़बड़ी की सूचना तत्काल दें। उसे रोकेंगे और कठोर कार्रवाई होगी।

फर्जीवाड़ा रोकने नापतौल विभाग खुद बनवाएगा प्लेट

सील का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में होगा

व्यापारियों ने की नापतौल विभाग को फर्जीवाड़ा करने की शिकायत

भास्कर संवाददाता|होशंगाबाद

वजन मशीनों पर लगने वाली प्लेटें अब नापतौल विभाग ही तैयार कराएगा। इन पर मप्र शासन का लोगो भी रहेगा। इसी से असली-नकली सील की पहचान होगी। सील का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में मेंटेन होगा। इससे कभी भी मशीन की पूरी कुंडली सामने आ सकेगी। वजन मशीनों पर अब एक जैसी प्लेट और सील नजर आएगी।

नापतौल विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। विभाग ऐसी प्लेटें बनवा रहा है, जिन पर मशीन का निर्माण वर्ष, मॉडल नंबर, मैन्यूफैक्चर का नाम, अधिकतम और न्यूनतम क्षमता और कैटेगरी का ब्योरा रहेगा। प्लेट के नीचे फोन नंबर भी रहेगा, जिस पर वेरिफिकेशन से जुड़ी शिकायत की जा सकेगी। नई प्लेटें आगामी अगस्त माह से चलन में आएंगी। मौजूदा व्यवस्था में नापतौल विभाग वजन मशीनों के केवल सत्यापन प्रमाण-पत्र जारी करता है। प्लेट और उन पर सील लगाने का काम मशीन सुधारने वाले करते हैं। नापतौल विभाग तक व्यापारियों से ऐसी जानकारी पहुंची है कि सील में फर्जीवाड़ा हो रहा है। नापतौल निरीक्षक मशीन सुधारने वालों ने अपने नाम की प्लेटें बना ली हैं। उन पर नकली सील लगाकर विभाग को राजस्व की चपत लगाई जा रही है। इसीलिए अब विभाग ने खुद ही प्लेट बनाकर सील लगाने का फैसला किया है।

नाप-तौल में गड़बड़ी रोकने की कवायद, विभाग

की सील पर रहेगा मप्र का लोगो विभाग

पकड़ में नहीं आता फर्जीवाड़ा: पहले मशीनों पर रंगों की प्लेट लगती थी। वह बाहर नहीं निकलती थी। फिर मशीन पर होल कर तार डालकर प्लेट लगाई जाने लगी। समय के साथ यह व्यवस्था भी बंद हो गई। अब मशीन सुधारने वाले खुद ही प्लेट बनाते हैं। उन पर ऐसी सील लगाई जाती है कि फर्जीवाड़ा पकड़ में नहीं आता है। इससे सरकारी राजस्व का नुकसान हो रहा है।

अब विभाग के बिलों की स्कैन की कॉपी भी देना होगी: मशीन सुधारने वाले फिलहाल जानकारी हाथ से टाइप करते हैं। इसमें फर्जीवाड़ा होता है। सॉफ्टवेयर पर मनमाफिक आंकड़े भरे जाते हैं। इसीलिए अब विभाग बिलों की स्कैन कॉपी लेगा। यानी जो बिल व्यापारी को दिया गया है, वही विभागीय रिकॉर्ड में जमा कराना होगा।

विभाग को लग रही है चपत: अफसरों के मुताबिक मशीन सुधारने वाले मशीनों की संख्या कम बताकर प्रमाण-पत्र जारी करा लेते हैं। बाकी मशीनों की सिर्फ प्लेट बेच दी जाती हैं।

योजना लागू होगी

जिले में भी यह योजना लागू की जाएगी। प्रदेश में यह योजना सभी जगह लागू की जाएगी। डीके श्रीवास्तव सहायक िनयंत्रक नापतोल

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