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मधुमेह, कब्ज व रक्तचाप दूर करने के बताए उपाय

मधुमेह, कब्ज, रक्तचाप का उपचार करने के लिए पतंजलि योगशाला में सात दिवसीय प्राकृतिक चिकित्सा शिविर का आयोजन किया...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 06:20 AM IST
मधुमेह, कब्ज, रक्तचाप का उपचार करने के लिए पतंजलि योगशाला में सात दिवसीय प्राकृतिक चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया है। शिविर में मरीजों को प्राकृतिक चिकित्सा अपनाने के बारे में बताया जा रहा है ताकि लोग स्वस्थ जीवन जी सकें। तहसील कार्यालय के पास पतंजलि योगशाला में आयोजित शिविर में आचार्य ब्रह्म राज शर्मा ने मधुमेह के मरीजों का चेकअप करने के बाद उन्हें बताया कि जीवन-यापन के दौरान कई प्रकार की समस्या सामने आएंगी। यदि हम उन्हें तनाव बना लेंगे तो लंबे दौर के तनाव से हम मधुमेह रोगी हो सकते हैं। उचित होगा हम खुद को कुशल बनाकर समस्या व अपने दायित्व का निर्वहन ठीक से कर सकें। उन्होंने कहा कि जो लोग मधुमेह से पीडि़त हैं वे तीन फीट गहरे गड्ढ़े की मिट्टी निकालकर उसका पानी के साथ लेप बनाएं और उसे नाभि के तीन इंच के आस-पास के क्षेत्र में नियमित लगाएं इससे मधुमेह में शर्करा नियंत्रित होती है। मधुमेह के रोगी को सप्ताह में एक दिन उपवास करना चाहिए लेकिन उस दिन अन्न का सेवन नहीं करते हुए फलाहार करना चाहिए। समय निकलकर धूप स्नान भी किया चाहिए ताकि अस्थियों में विटामिन डी की कमी पूरी हो सके। शिविर में आचार्य ने मधुमेह के रोगियों को मिट्टी का लेप करने की विधि व तौर-तरीके बताए।

गुनगुने पानी के सेवन से दूर करें कब्ज: शिविर में मरीजों को बताया गया कि बिना भूख के भोजन करने की आदत के कारण लोगों के पेट में कब्ज व गैस की शिकायत हो जाती है। कब्ज से निजात पाने के लिए सुबह व शाम 400 ग्राम गुनगुने पानी के नियमित सेवन करना चाहिए।

सात दिवसीय शिविर का आयोजन तहसील के पास पतंजलि योगशाला में किया जा रहा है

प्राकृतिक चिकित्सा शिविर में मिट्टी लगाते मरीज।

गहरे गड्ढ़े की माटी से बालों को धोएं

आचार्य ब्रह्मराज शर्मा ने सिर के बालों का असमय पकना व झड़ना एक समस्या बना हुआ है। लोग इसके लिए अंग्रेजी इलाज पर जोर देते हैं। यदि महिला व पुरुष ढाई फीट गहरे गड्ढ़े की माटी निकालकर उससे अपने सिर के बाल धोएं तो बाल पकने व झड़ने की समस्या नियंत्रित हो जाती है।

योग व प्राणायाम के फायदे बताए

शिविर में उपस्थित लोगों को पं.हरिशंकर स्वामी ने योग व प्राणायाम कराते हुए उसके शारीरिक फायदे बताए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ रहने का मंत्र नियमित योग व प्राणायाम है। इसे करने से पहले इसे अच्छे से सीखने की जरूरत है। उसके बाद नियमित अभ्यास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मां-बाप योग व प्राणायाम के विद्यार्थी बनेंगे तो उनके बच्चे भी स्वस्थ जीवन जीने की ललक लेकर आगे बढेंग़े।