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बच्चों को सिखाएंगे खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच

खाद्य पदार्थों में मिलावट के बढ़ते मामलों को देखते हुए खाद्य निरीक्षक अब स्कूलों में जाकर छात्र-छात्राओं को...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 04:20 AM IST

खाद्य पदार्थों में मिलावट के बढ़ते मामलों को देखते हुए खाद्य निरीक्षक अब स्कूलों में जाकर छात्र-छात्राओं को ट्रेनिंग देंगे। इसके बाद बच्चे खुद खाद्य सामग्री में मिलावट की जांच कर सकेंगे। इसके प्रति जागरूक भी होंगे। इसका मकसद स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाना है। स्वच्छ भारत अभियान की ही तरह स्वस्थ भारत अभियान पर भी काम होगा। इसमें रोजमर्रा की सामग्री की मिलावट पता करना सिखाएंगे।

खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावट जांचने के लिए बच्चों को प्रशिक्षित करने की योजना बनाई है। इसके लिए विभाग ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन को निर्देश जारी किए हैं। बच्चों को प्रशिक्षण निरीक्षक स्कूल जाकर देंगे। विशेषज्ञ भी मौजूद रहेंगे। वे छात्रों को पोषक व सुरक्षित खाद्य पदार्थों के सैंपल लेने की प्रक्रिया भी बताएंगे। इसके लिए स्कूलों में 25 से 35 मिनट तक का एक सेशन होगा। इसमें पौष्टिक खान- पान व मिलावटी सामग्री के बारे में बताया जाएगा। मिलावटी हल्दी, तेल, लाल मिर्च, आटा, दूध की पहचान करने व सैंपलिंग की प्रक्रिया भी उन्हें बताई जाएगी। दरअसल सैंपल लेते वक्त निरीक्षक शंकास्पद मामलों में प्रारंभिक तौर पर निष्कर्ष निकाल लेते हैं। अभी कार्रवाई लैब की अधिकृत रिपोर्ट आने पर ही होती है।

पहल

खाद्य निरीक्षक स्कूल जाकर देंगे ट्रेनिंग, पोषक आहार की जानकारी भी देंगे

त्योहारी सीजन में भी नहीं हो पाती फूड सैंपलिंग

दफ्तर में बढ़ते कागजी काम के दबाव और स्टाफ की कमी के चलते जिला मुख्यालय पर भी त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग नहीं हो पाती। इससे मिलावटी और दूषित खाद्य सामग्री बिकने की संभावना बनी रहती है। वहीं दुकानों पर खुले में खाद्य सामग्री रखकर शहर में बेची जाती हैं। लेकिन स्टाफ कम होने से जिले भर में एक साथ जांच नहीं की जा सकती । वहीं खाद्य निरीक्षक भी जांच को लेकर संजीदा नहीं रहते।

मिलावट को लेकर जागरूक होंगे बच्चे

खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को मिले पत्र में बताया गया कि वे बच्चों को पौष्टिक, निम्न गुणवत्ता व मिलावटी खाद्य पदार्थ परखने का तरीका सिखाएं ताकि बच्चे अपनी सेहत के प्रति जागरूक भी होंगे। वे बड़े- बुजुर्गों को भी जागरूक कर सकेंगे। शिक्षा विभाग के तालमेल से काम होगा। इससे खाद्य पदार्थों को लेकर कम उम्र ही बच्चे अच्छी समझ रखने लगेंगे।

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