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4 लाख 40 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदना है, 98 केंद्रों पर एक भी दाना नहीं अाया कारण: किसानों को मैसेज नहीं भेजे

Raisen News - रायसेन | जिले में 20 मार्च से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी शुरू हो गई है लेकिन खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने समय पर...

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 05:05 AM IST
4 लाख 40 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदना है, 98 केंद्रों पर एक भी दाना नहीं अाया कारण: किसानों को मैसेज नहीं भेजे
रायसेन | जिले में 20 मार्च से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी शुरू हो गई है लेकिन खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने समय पर किसानों को मैसेज नहीं भेजे जिससे 98 केंद्रों पर अभी तक एक भी दाने की खरीद नहीं हो पाई। जिले में 26 मई 2018 तक चलने वाली समर्थन मूल्य खरीदी के दौरान जिले के पंजीकृत 50000 किसानों से अनुमानित 4 लाख 40 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जाना है। इसके लिए जिले में दो लाख 20 हजार मीट्रिक टन के भंडारण की व्यवस्था भी की गई है। खरीदी के तुरंत बाद गेहूं का परिवहन किया जाएगा।

जरूरत ये भी... 13 लाख पुराना गेहूं गोदामों में, नए को रखने की जगह नहीं, 50 रैक मांगे, अभी चना-मसूर की खरीदी बाकी

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हजार क्विटल खरीदी हो चुकी है रायसेन जिले में गेहूं की

इसमें औबेदुल्लागंज और बाड़ी की हालत खराब: क्योंकि.... दोनों जगह 90 प्रतिशत वेयर हाउस है फुल। रायसेन मुख्यालय पर पांच गांदाम हैं, जिनमें एक लाख क्विंटल गेहूं भरा जा सकता है। इनमें 10 फीसदी ही जगह खाली है।

इंतजाम क्या: जिला प्रशासन ने एफसीआई को 50 रैक लगाने के लिए कहा है, इसमें मंडीदीप, औबेदुल्लागंज और एक सलामतपुर से लगना चाहिए।

पिछले साल कितनी खरीदी हुई थी गेहूं की:समर्थन मूल्य पर 3 लाख 74 हजार मीट्रिक टन की खरीदी हुई थी।

पिछले साल खरीदी केंद्रों के क्या हाल थे: खरीदी केंद्रों पर अधिक उपज खुले में नहीं रखी थी क्योंकि गोदामों में पर्याप्त जगह थी।

इस साल क्या हाल हैं: 4.40 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य है और दो लाख 20 हजार मीट्रिक टन के ही भंडारण की जगह।

बड़ी समस्या: 10 अप्रैल से चना, मसूर और सरसों की खरीदी शुरू होगी। जिले में इसके लिए 25 हजार किसानों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया है। इन फसलों को कहां रखेंगे।

70 हजार क्विंटल गेहूं खुले में पड़ा है।

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केंद्रों में 48 पर खरीदी शुरू हो गई

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हजार किसानों ने कराया पंजीयन

सॉफ्टवेयर में आई दिक्कत साफ्टवेयर में भोपाल से ही खराबी थी। इस कारण तीन दिन तक उपज का परिवहन नहीं हो सका था। बाद में वहीं से इसे ठीक किया गया।

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