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329 आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था देखेंगे समाजसेवी

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 05:05 AM IST

Raisen News - तमाम प्रयासों के बाद भी शासन-प्रशासन कुपोषण दूर करने में सफल नहीं हो पा रहा है। इसके लिए अब लोगों को आंगनबाड़ी...

329 आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था देखेंगे समाजसेवी
तमाम प्रयासों के बाद भी शासन-प्रशासन कुपोषण दूर करने में सफल नहीं हो पा रहा है। इसके लिए अब लोगों को आंगनबाड़ी केंद्र गोद देकर उनके संचालन पर निगरानी रखने के लिए तैयार किया जा रहा है। जिला प्रशासन का मानना है कि अकेले सरकारी प्रयासों से कुपोषण दूर होने वाला नहीं है, इसलिए निजी लोगों की भागीदारी बढ़ाकर वहां की व्यवस्थाओं में सुधार लाने की तैयारी की जा रही है।

इसके लिए ऐसे 329 आंगनबाड़ी केंद्रों को चुना गया है, जहां तीन से अधिक कुपोषित बच्चे दर्ज हैं। इन केंद्रों को खास तौर पर फोकस किया जा रहा है। इसके लिए जन प्रतिनिधि, सेवानिवृत्त कर्मचारी सहित ऐसे लोग जो सेवा के काम में रुचि रखते हैं। ऐसे लोगों को ये आंगनबाड़ी केंद्र गोद दिए जाएंगे। ये लोग इस बात की जानकारी बिना किसी शिकायत के प्रशासन तक पहुंचाएंगे की आंगनबाड़ी समय पर खुल रही है नहीं, कितने बच्चे आते हैं खाने के लिए, जो पौष्टिक आहार दिया जाता है उसकी गुणवत्ता कैसी रहती है। इस जानकारी के आधार पर वहां सुधार किया जाना आसान हो जाएगा।

जिले में संचालित हैं 1898 आंगनबाड़ी केंद्र

महिला बाल विकास विभाग के अधीन जिले में 1898 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इनमें से 329 आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति अधिक खराब मानी गई है, जहां तीन से अधिक कुपोषित बच्चे दर्ज हैं।

प्रभारी मंत्री भी दे चुके हैं निर्देश

प्रभारी मंत्री सूर्य प्रकाश मीणा भी जिला योजना समिति की बैठक में जिम्मेदार अधिकारियों को कई बार निर्देश दे चुके हैं कि कुपोषण कलंक है। इसे दूर करने के लिए हर संभव प्रयास करें। इसके लिए अलग से रणनीति बनाकर कुपोषण को दूर करने के लिए काम करें। इसके बाद अब तक जिले में कोई सार्थक प्रयास अब तक नहीं किए गए।

व्यवस्था

तीन से अधिक कुपोषित बच्चों वाले आंगनबाड़ी केंद्र निगरानी के लिए दिए जाएंगे गोद

30 से 40 फीसदी ही रहती है उपस्थिति, किया जाता है गोलमाल

आंगनबाड़ी केंद्रों पर संबंधित मोहल्ले में रहने वाले 5 साल तक की आयु वर्ग के सभी बच्चों के नाम दर्ज कर लिए जाते हैं। इसके हिसाब वहां पौष्टिक अहार और नाश्ते का आवंटन दिया जाता है, लेकिन बच्चों की उपस्थिति दर्ज संख्या से 30 से 40 फीसदी ही रहती है। इसके चलते आवंटन में गोल-माल कर कमाई की जाती है। इतना ही नहीं आंगनबाड़ी केंद्र में इस बात के भी कोई प्रयास नहीं किए जाते कि अधिक से अधिक बच्चे आंगनबाड़ी केंद्रों पर आकर उपलब्ध सेवाओं का लाभ ले सकें।

देंगे गोद


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