श्रीकृष्ण लीलाओं से जीवन यापन, मर्यादा और अनुशासन में रहने की लें प्रेरणा:पं. राम किंकर

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 09:30 AM IST

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सोजनी धाम में चल रही कथा में छठवें दिन बताया कि मानव जीवन में सद‌्कार्य करना चाहिए

सिलवानी| संगीतमय सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा एवं श्रीराम महायज्ञ के छंठवें दिन शुक्रवार को पं. रामजी किंकर के द्वारा भगवान श्रीकृष्ण विवाह का वर्णन कर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण का विवाह -रुकमणी के साथ संपन्न हुअा तथा वह द्वारिका में निवास करते है। दैत्य द्वारा 16100 युवतियों को बंदी बना कर रखा गया था। जिसे कि भगवान श्रीकृष्ण ने मुक्त कराया।

दैत्यों से मुक्त होते ही युवतियों के द्वारा श्रीकृष्ण को पति रुप में वरण किया गया। भगवान श्रीकृष्ण ने रास लीला के माध्यम से जीवन में रसों का समावेश किया है। उन्होंने ने कहा कि इंसान को भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जीवन यापन, मर्यादा और अनुशासन में रहने की प्रेरणा लेना चाहिए। श्रीकृष्ण को लीला पुरुषोत्तम कहा गया है, उनके कहे गए वाक्यों का जीवन में अनुशरण किया जाना चाहिए। कि मर्यादाओं से जीवन यापन करो, उनकी लीला शिक्षा मिलती है कि यदि अनाचार, अत्याचार, व्यभिचार जैसे अपराध समाज में होने लगेगे तो भगवान अवतार लेते है। जब धरा पर कंस का अत्याचार ज्यादा हुआ तब मथुरा की प्रजा को मुक्ति के लिए अक्रूर के साथ कृष्ण ने मथुरा प्रस्थान किया। वहां कंस के मल्लों से युद्ध कर धनुष का खण्डन करके दुराचारी कंस को मारा। उन्होंने बताया कि पत्र के माध्यम से रुक्मणि ने ब्राह्मण के हाथों श्रीकृष्ण को संदेश भेजा गया कि मेरे परिजन मेरा विवाह मेरी इच्छा विरुद्ध अन्यत्र कर रहे है, जबकि मेरा आपसे जन्म जन्म का साथ है। आपको पतिदेव वरण कर चुकी हूं। अतः आप मुझे यहां से ले जाकर विवाह कीजिए। तब श्रीकृष्ण-रुकमणी को ले जाकर विवाह करते है। भागवत कथा का मूल उद्देश्य है कि भगवत भक्ति से वास्तविक मोक्ष प्राप्त बताया है।

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