सिंधिया की राह पर सांची सीट के कांग्रेसी
छह विधानसभा चुनाव में प्रतिद्वंद्वी रहे डॉ. शेजवार और डॉ. चौधरी के एक ही पार्टी में आने से असमंजस
पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन में सांची विधानसभा क्षेत्र से विधायक और प्रदेश सरकार में स्कूल शिक्षा मंत्री रहे डॉ. प्रभुराम चौधरी के कांग्रेस से इस्तीफे के बाद जिले के सियासी समीकरण भी बदल गए हैं। एक-एक करके कांग्रेस के पदाधिकारियों अाैर कार्यकर्ताओं के इस्तीफों का सिलसिला शुरू हाे गया है। मंगलवार काे डॉ. चौधरी के कार्यालय में बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता एकत्रित हुए अाैर अपने-अपने इस्तीफे लिख डाले।
सिंधिया अाैर डॉ. चौधरी के समर्थन में रायसेन के नगर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष ब्रजेश चतुर्वेदी, ग्रामीण ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष वीरसिंह पंवार, सांची ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष मनोज अग्रवाल, सांची युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष राज मीणा, दातारसिंह मीणा सहित करीब 500 से अधिक पार्टी कार्यकर्ताओं ने इस्तीफे दे दिए हैं। इतना ही विधानसभा चुनाव के ठीक पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए सांची जनपद अध्यक्ष एस. मुनियन ने भी कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। सांची विधानसभा क्षेत्र में डाॅ. चाैधरी कांग्रेस के सबसे कद्दावर नेता माने जाते हैं। वहीं अहिरवार समाज को भी बड़ा वोट बैंक भी परंपरागत ताैर पर डाॅ. चाैधरी के साथ रहता है। एेसे में कांग्रेस काे बड़ा झटका लगा है।
इन तीन कारणों से समझिए बदलाव का असर...
टकराव...
कांग्रेसियाें के पार्टी में अाने का भाजपाई समर्थन कर रहे हैं लेकिन स्वीकार्यता को लेकर टकराव हो सकता है। चुनाव के समय दावेदारी होगी, तब टकराव के हालात बनेंगे।
शेजवार-चौधरी प्रतिद्वंदी, तालमेल बैठाना मुश्किल
सांची विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के डॉक्टर गाैरीशंकर शेजवार अाैर कांग्रेस के डाॅ प्रभुराम चाैधरी परंपरागत प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में डाॅ शेजवार के पुत्र भाजपा के मुदित शेजवार को डाॅ चाैधरी ने ही हराया था। इसके बाद कांग्रेस की प्रदेश सरकार में उन्हें स्कूल शिक्षा मंत्री बनाया गया था। वे जिले से एक मात्र मंत्री थे। उनके इस्तीफे के बाद अब जिले में कांग्रेस के एक मात्र विधायक उदयपुरा से देवेंद्र गड़रवास ही रह गए हैं । एक और डॉ. प्रभुराम चौधरी ने सिंधिया के साथ रहने की बात कही है वहीं भाजपा के कद्दावर नेता डॉ. गौरीशंकर शेजवार के मुताबिक पार्टी हाईकमान के आदेश का पूरा पालन किया जाएगा। इस सब के बावजूद जमीनी स्थिति आसान नहीं रहने वाली है। दाेनाें नेता आपस में कैसे तालमेल बैठाएंगे, यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया।
कांग्रेस छोड़कर सिंधिया का तो साथ पर... भाजपा ज्वाइन करने के सवाल पर बोले- अभी सोच रहे हैं
फाइल फोटो
चिंता...
भाजपाइयों को चिंता है कि कांग्रेसियों से आने वाले चुनावों में टिकट कटने का खतरा रहेगा। बड़े नेताओं को अपनी जमीन की चिंता है कि कहीं उनके पद न छिन जाएं।
चुनाैती...
इस बदलाव के बाद नगरीय निकाय और पंचायत के चुनावों का सामना करना होगा। इन चुनावों के नतीजों से स्पष्ट होगा कि यह बदलाव सही रहा या गलत।
युवा कांग्रेस ने फूंका सिंधिया का पुतला: इधर सिंधिया का विरोध भी देखा गया। बुधवार शाम काे शहर के सागर तिराहे पर युवा कांग्रेस ने ज्योतिरादित्य सिंधिया का पुतला जलाया। युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव तंतवार एवं जिला सचिव विकास शर्मा ने कहा का सिंधिया ने भाजपा में जाकर कांग्रेस का नुकसान किया है। इस दौरान युवा कांग्रेस के संदीप मालवीय, गुड्डा बघेल, बाबूलाल चक्रवती, जावेद अहमद, जल्लू मियां, भैयालाल, आशीष समाधिया, गोपाल साहू, रमन मेहरा, मयंक श्रीवास्तव, राज सराठे, महेंद्र यादव,मजहर कबीर सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसी शामिल हुए ।
हम सिंधिया के साथ हैं
सिंधिया जी के साथ हम पहले भी थे आज भी उन्हीं के साथ हैं । सिंधिया समर्थन में 22 विधायक अपनी स्वेच्छा से ही आए और उन्होंने बिना किसी दबाव में अपना इस्तीफा दिया है । हमने अपनी स्वेच्छा से पार्टी छोड़ी है।
कांग्रेस अध्यक्ष बोले- पार्टी ने चुनाव कार्यकर्ताओं की मेहनत से जीता था, ऐसा नहीं करना चाहिए था
कांग्रेस जिला अध्यक्ष मुमताज खान के मुताबिक पूर्व केंद्रीय मंत्री सिंधिया और डॉ प्रभुराम चौधरी काे कांग्रेस से इस्तीफा नहीं देना चाहिए था। पार्टी के कार्यकर्ताओं की मेहनत से सांची विधानसभा में चुनाव जीता था। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी और स्कूल शिक्षा मंत्री भी बनाए गए। ये कांग्रेस की ही देन है।
एक साल पहले कांग्रेस में गए मुनियन फिर भाजपा में लाैटे : विधानसभा चुनाव के ठीक पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए सांची जनपद अध्यक्ष एस मुनियन ने भी कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। गैरतगंज ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष लालजी ठाकुर से जब बात की गई तो उनका कहना था उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है ।
पिता माधव राव ने कराई थी राजनीतिक शुरुआत, बेटे के लिए छोड़ी प्रभुराम चौधरी ने कांग्रेस
बेगमगंज के सुमेर गांव में 15 जुलाई 1958 काे जन्मे प्रभुराम ने बीएससी अाैर एमबीबीएस की डिग्री ली है। वे जब मेडिकल के फाइनल इयर में पढ़ाई कर रहे थे तब माधवराव सिंधिया ने पहली बार 1985 में डॉ प्रभुराम चौधरी को सांची विधानसभा से टिकट दिलाया था। इंदिरा लहर के चलते वे चुनाव भी जीत गए। तब उन्होंने डॉ गौरीशंकर शेजवार को यह चुनाव हराया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा की सरकार में डॉ. चौधरी को 1989 में 9 महीने के लिए संसदीय सचिव भी बनाया गया था। अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत माधवराव सिंधिया के साथ करने वाले डॉ. प्रभुराम चौधरी उनके निधन के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बने रहे और अब कांग्रेस छोड़ दी।
खुशी की बात है
सांची विधानसभा में अधिकतर विधानसभा चुनाव डॉ गौरीशंकर शेजवार ने भाजपा और डॉ प्रभुराम चौधरी ने कांग्रेस से लड़े हैं। सिंधिया के समर्थक डॉ. चौधरी के कांग्रेस से इस्तीफा देने के मामले में पूर्व वन मंत्री और भाजपा नेता डॉ गौरीशंकर शेजवार ने कहा कि यह तो खुशी की बात है कि उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी है। 22 विधायक सिंधिया के साथ हैं। इससे भाजपा और मजबूत होगी। पार्टी हाईकमान का जो भी निर्देश होगा। उसका अक्ष्ररश: पालन किया जाएगा।
अब आगे...भाजपा नेताअों को सताएगी अपने पद की चिंता**
डॉ प्रभुराम ने कहा-**
अब हम साथ-साथ हैं....**
डॉ शेजवार बोले-**