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बेमौसम बारिश से फसलों पर संकट, किसान बोले- दाना कमजोर होने से नहीं मिलेगा भाव

एक वर्ष पहले
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पिछले नुकसान की अभी तक नहीं हुई भरपाई, किसानों को नहीं मिली भावांतर और बोनस की राशि


नुकसान का आंकलन करने दिए हैं निर्देश

मौसम को देखत हुए राजस्व अमले को निर्देशित कर दिया है कि अपने अपने क्षेत्र में मुआयना करते रहें, ताकि नुकसान का तत्काल आंकलन किया जा सके और किसानों को हर संभव मदद की जा सके। फिलहाल नुकसान की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है।
-बृजेन्द्र रावत एसडीएम, बरेली

भास्कर संवाददाता । बरेली

देर रात करीब ढाई बजे बारिश और ओला वृष्टि को लेकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंचने लगी हैं। हालत यह है कि इन दिनों खेतों में फसलें पक कर कटने के लिए तैयार खड़ी हैं, ऐसे में बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जहां किसान फसलों को बचाने का उपाय कर रहे हैं तो वहीं बारिश की रोकने के लिए मंदिरों में प्रार्थना कर रहे हैं। देर रात करीब 20 मिनट की बारिश के दौरान जहां मटर के दाने बराबर ओले गिरने की सूचना ग्रामीण अंचलों से आई है तो वहीं तेज हवा और बारिश से फसलें आड़ी हो गईं।

किसानों ने बताया कि यदि मौसम ऐसा ही रहा तो फसलों की दाने की क्वालिटी गिर जाएगी और कटने के बाद उसे बेचने पर किसानों को दाम भी कम मिलेगा जिससे किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा। सरकार ने जहां पिछले वर्ष की भावांतर और बोनस की राशि अभी तक नहीं मिली है । जिससे पहले से ही किसानों में मायूसी छाई हुई है। ऊपर से बारिश किसानों को परेशान कर रही है। फसलों को हवा से बचाने किसानों ने खेतों के चारों साड़ियां बांधना शुरू कर दिया है। मौसम बारिश ने किसानों के होली के त्योहार को भी फीका कर दिया, क्षेत्र में होने वाली बारिश एवं कहीं- कहीं ओलावृष्टि से गेहूं चना, तुवर जैसी रबी फसलों को नुकसान हो सकता है। बता दें कि क्षेत्र में रवि की फसलें कुछ पक कर तैयार हो चुकी हैं तो कुछ पकने वाली हैं, ऐसे में जो फसलें पक चुकी हैं और कहीं-कहीं तो चना और तुवर की फसलें कटकर खेतों में रखा चुकी हैं। ऐसे में यदि तेज बारिश हो जाती है तो कटी हुई फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। करीब 1 सप्ताह से पढ़ने वाली गर्मी के साथ अब तेज हवाओं का दौर चालू हो गया है।

सब्जियाें की फसलों को फायदा, गेंहू, चना, मसूर को नुकसान : वर्तमान में 35 हजार 989 हेक्टेयर में गेहूं 11 हजार 412 हेक्टेयर में चना एवं 256 हेक्टेयर में मसूर की बोवनी की गई है। साथ ही इसके किसानों ने प्याज आलू, टमाटर, धनिया, फूल गोभी, पत्ता गोभी, मटर की फसल लगाई हुई है। यदि बेमौसम बारिश के साथ यदि ओलावृष्टि होती है तो नुकसान होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। सबसे ज्यादा नुकसान तिलहन, दलहन के साथ ही अन्य फसलों में नुकसान होगा।

बेमौसम बारिश से पौधों की ग्रोथ रुक जाती है : गुरारिया गांव के किसान हरनाम सिंह पटेल ने बताया कि बेमौसम बरसात से किसानों को बड़ा नुकसान हो सकता है क्योंकि बारिश के साथ तेज हवाएं चल रही हैं।जिसके कारण गेहूं की खड़ी फसल गिर जाती है। जिसके बाद पेड़े की ग्रोथ वहीं खत्म हो जाती है और फसल का एवरेज गड़बड़ा जाता है । महेश्वर के उपसरपंच नारायण सिंह धाकड़ ने बताया कि रात 2.30 से 3 के बीच मटर के दाने के साइज के 5 मिनट ओले गिरे थे, लेकिन ओले का साइज छोटा होने के कारण गिरते ही घुल गया यदि यही साइज बड़ा होता तो किसानों को काफी मात्रा में नुकसान उठाना पड़ता किसानों का मानना है कि यदि लगातार बारिश हुई तो पक कर तैयार हुई फसलें काफी खराब हो सकती है। वहीं दूसरी ओर खेतों में थ्रेसिंग के लिए कटी पड़ी फसलें भी काफी खराब होने की संभावना है। यही नहीं बाजारों में बिकने वाले गेहूं के दामों में भी कमी हो सकती है। इससे आम आदमी की जेब पर भी खास असर पड़ सकता है क्योंकि सीमित आय वाले मध्यमवर्गीय लोगों का घरेलू बजट खराब हो सकता है।
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