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नए भवन में शिफ्ट होने के बाद भी सिविल अस्पताल में नहीं बढ़ा स्टाफ, मरीज परेशान

एक वर्ष पहले
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इस समस्या की ओर जनप्रतिनिधियों से लेकर स्वास्थ्य विभाग के अफसर नहीं दे रहे ध्यान

पिछले वर्ष स्वास्थ्य विभाग ने सिविल अस्पताल को नया अस्पताल भवन में शिफ्ट कर दिया है लेकिन न स्टाफ में बढ़ोतरी की न ही स्वास्थ्य सुविधाओं में इजाफा किया है, यही कारण है कि यहां आने वाले मरीज और उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा जहां 22 डाक्टरों की आवश्यकता है वहां पर सिर्फ 6 डाॅक्टर ही पदस्थ हैं ।

इसके अलावा नर्स, सफाई कामगार, वार्ड वाय, ड्रेसर सहित बीमारियों की जांच मशीनों का भी अभाव बना हुआ है । बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग के अफसर और नगर के जनप्रतिनिधि अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़वाने के प्रयास नहीं कर हैं । जिसके चलते मरीजों को पर्याप्त इलाज न मिलने के कारण परिजन निजी अस्पतालों में मंहगे दामों पर इलाज करवाने के लिए मजबूर हो रहे हैं । वहीं निजी अस्पतालों के महंगे इलाज के कारण मरीज व परिजन आर्थिक रुप से कमजोर हो रहे हैं । क्योंकि उनकी जुड़ी रकम उपचार में खर्च हो जाती है । नगर के सिविल अस्पताल पर ढाई लाख की आबादी के उपचार करने का जिम्मा है और लोग भी पहली प्राथमिकता उपचार के लिए सिविल अस्पताल को देते हैं, लेकिन यहां पर आने के बाद मरीज को पर्याप्त और व्यवस्थित उपचार नहीं मिलने के कारण निजी नर्सिंग होम्स में जाकर इलाज करवाना पड़ रहा है । प्रतिमाह यहां 15 से 20 हजार लोग अपना इलाज करवाने के लिए आते है । प्रतिदिन 500 से 700 मरीज स्वास्थ्य लाभ के लिए अस्पताल पहुंचते हैं । सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीण अंचलों से लंबी दूरी तय कर इलाज करवाने के लिए आने वाले ग्रामीण मरीजों को होती है ।क्योंकि वह बड़ी उम्मीद के साथ इलाज करवाने के लिए सिविल अस्पताल पहुंचते हैं । जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइड लाइन के मुताबिक प्रति हजार की आबादी पर एक फिजिशियन या एमबीबीएस चिकित्सक और प्रत्येक 10 हजार की आबादी पर एक विशेषज्ञ चिकित्सक होना चाहिए। सिविल अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था का गाइडलाइन से दूर- दूर तक कोई संबंध नहीं। पैरामेडिकल स्टाफ की भी भारी कमी है । हाल ही के दिनों में सांसद राव उदय प्रताप से चर्चा सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को लेकर चिंता जता चुके हैं । उन्होंने बताया था कि नरसिंहपुर और होशंगाबाद में दो नए मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए केंद्र सरकार के द्वारा प्रदेश सरकार से रिपोर्ट मांगी है जिसके आधार पर यहां पर 2 नए मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे इसके बाद ही सरकारी अस्पतालों की स्थिति सुधरने की संभावना बनेगी ।

इन बीमारियों के नहीं है विषय विशेषज्ञ डॉक्टर : सिविल अस्पताल में शुगर बीपी हार्ट, लंश, स्वास, नेत्र विकार, हर्निया सहित हड्डी रोग, गुप्त रोग, न्यूरोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, मेडिकल ऑफिसर त्वचा, नवाथेशिया विशेषज्ञों की कमी के चलते मरीजों को पर्याप्त मात्रा में इलाज नहीं मिल पा रहा है । जबकि यहां कम से कम एमडी एमएस शिशुरोग विशेषज्ञ, महिला स्पेशलिस्ट हड्डी रोग विशेषज्ञ, नाक कान गला विशेषज्ञ होना चाहिए। यहां जब प्रतिदिन करीब 500 से 700 मरीज आते हैं, वहां ऐसी सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर मिलनी चाहिए जो नहीं मिल रही है।

ढाई लाख की आबादी इलाज के लिए इसी अस्पताल पर है निर्भर

यह है वर्तमान में पदस्थ स्टाफ की स्थिति

सिविल अस्पताल में फिलहाल एमडी मेडिसिन डॉक्टर वीडी यादव, डॉक्टर गिरीश वर्मा मेडिकल ऑफिसर, डॉ.सतीश उइके शिशु रोग विशेषज्ञ, डॉक्टर साजन मुरगान मेडिकल ऑफिसर, डॉक्टर सुषमा अधिकारी मेडिकल ऑफिसर, डॉक्टर रेणुका अहिरवार आयुष मेडिकल ऑफिसर आदि पदस्थ है। इनमें भी डाॅक्टर कोर्ट पेशी और बैठकों में आधा समय गुजार देते हैं जिसके चलते यहां पर डाक्टरों को भी परेशानी होती है साथ ही मरीज व उनके परिजनों को परेशानियों की सामना करना पड़ता है ।

स्टाफ बढ़ाने वरिष्ठ अफसरों को लिख चुके है पत्र

डॉ गिरीश वर्मा, सीबीएमओ बरेली

सिविल अस्पताल में इलाज के लिए 500 से 700 मरीज पहुंचते हैं।
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