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भोजपुर महोत्सव मनाने को लेकर संशय, फिर लग सकता है ग्रहण

Raisen News - भोजपुर में महाशिवरात्रि पर्व पर हर साल यह महोत्सव मनाया जाता है विश्व प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल...

Feb 15, 2020, 08:21 AM IST

भोजपुर में महाशिवरात्रि पर्व पर हर साल यह महोत्सव मनाया जाता है

विश्व प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल भोजपुर में महाशिवरात्रि पर्व पर हर साल भोजपुर महोत्सव मनाया जाता है। विभिन्न संस्कृतियों से रूबरू कराने वाले इस महोत्सव पर इस बार संशय के बादल मंडरा रहे हैं। खुद वर्तमान विधायक और पूर्व संस्कृति मंत्री ने आशंका जाहिर की है। इस उत्सव के स्वरूप में बदलाव किए जाने से भी उन्होंने प्रदेश सरकार पर संस्कृति को बढ़ावा देने की बजाए उससे छेड़छाड़ करने के आरोप लगाए हैं।

इसे लेकर प्रशासनिक अफसर भी असमंजस की स्थिति में है। हालांकि वे साफ तौर पर यह नहीं बता पा रहे हैं कि कार्यक्रम होगा या नहीं। इतना ही नहीं सरकार के कबीना और जिले के प्रभारी मंत्री हर्ष यादव ने भी आयोजन को लेकर अनभिज्ञता व्यक्त की है। इसे मनाए जाने को लेकर अब तक किसी तरह की तैयारियां भी नही दिख रही हैं। जबकि आयोजन के लिए केवल एक सप्ताह का ही समय बचा है। ऐसे में विभागीय स्तर पर किसी तरह की सुगबुगाहट न होने से अटकलें लगाई जा रहीं हैं कि इस बार शायद ही भोजपुर उत्सव मनाया जाए। यदि ऐसा हुआ तो वर्ष 1993 से 2003 तक सत्ता पर काबिज रही कांग्रेस सरकार की पुनरावृत्ति होगी। उस समय भी तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार ने इस पर रोक लगा दी थी।

भाजपा सरकार में 15 दिन पहले शुरु हो जाती थी तैयारियां : मालूम है कि पूर्व भाजपा सरकार द्वारा इस आयोजन की तैयारियों को लेकर 15 दिन पहले से तैयारियां शुरू कर दी जाती थी। लेकिन इस बार कांग्रेस सरकार एक सप्ताह पहले तक कार्यक्रम करने को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं।मालूम है कि 1990 में पूर्व मुख्यमंत्री स्व. सुंदरलाल पटवा ने भोजपुर महोत्सव की शुरूआत की थी। इसे प्रत्येक वर्ष मनाए जाने की उनकी प्रबल इच्छा थी । उन्होंने सीएम रहते इसे हर वर्ष मनाया भी 1993 में जब सत्ता से बाहर हो गए। इस दौरान सत्ता में आई कांग्रेस ने इस महोत्सव में खास रुचि नहीं दिखाई। कांग्रेस के शासन काल में 10 वर्षों तक यह महोत्सव बंद रहा। सन 2003 में भाजपा पुनः सत्ता में आई। उसने 2005 से इस आयोजन को पुन किया जाने लगा। जो तब से 2018 तक निरंतर जारी रहा। पिछले साल कांग्रेस सरकार ने इस आयोजन तो किया मगर वह केवल औपचारिकता तक सीमित नजर आया। इस बार इस महोत्सव का आयोजन 21 फरवरी को महाशिवरात्रि पर होना है। लेकिन प्रदेश में हुए सत्ता परिवर्तन से इसके आयोजन पर संशय है। इस तरह पटवा के भोजपुर महोत्सव में एक बार फिर ग्रहण लग सकता है।

तीन दिवसीय महोत्सव औपचारिकता तक सिमटा

भोजपुर महंत पवन गिरि बताते है कि शिव मंदिर नगर के साथ राजधानी सहित आसपास के क्षेत्र की आस्था का केन्द्र है। यहां महाशिवरात्रि पर आयोजित किए जाने वाले भोजपुर महोत्सव का लोगों को बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता है। अब तक यहां तीन दिवसीय महोत्सव आयोजित किया जाता था। लेकिन प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होते ही इसका स्वरूप भी बदल गया है। जहां पूर्व वर्ती भाजपा सरकार इसे बड़े धूमधाम से तीन दिनों तक रात्री में मनाती थी। वहीं कांग्रेस की सरकार ने न सिर्फ तीन दिन तक चलने वाले इस उत्सव को महज एक दिन में समेट दिया है। वहीं इस की भव्यता के स्वरूप में भी बदलाव किया गया है। जिससे यह आयोजन सिर्फ औपचारिकता तक सिमट कर रह गया है। इस एक दिवसीय और दिन में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम से श्रद्धालु निराश हैं।

ठीक नहीं सांस्कृतिक परंपराओं में बदलाव : विधायक पटवा

विधायक सुरेन्द्र पटवा का कहना हैं कि भोजपुर महोत्सव को लेकर सरकार असमंजस में हैं। अब तक कोई तैयारी नहीं की हैं। वे बताते हैं कि भाजपा सरकार के दौरान प्रदेशभर में छोटे-बड़े करीब 1800 सांस्कृतिक आयोजन होते थे, लेकिन कांग्रेस की सरकार ने जहां कई कार्यक्रम बंद कर दिए हैं या उनका स्वरूप बदलकर छोटा कर दिया है। प्रदेश में जब-जब कांग्रेस की सरकार बनती है। भोजपुर महोत्सव के कार्यक्रम में छेड़छाड़ की जाती है, जो संस्कृति के साथ ठीक नहीं है। जबकि इस कार्यक्रम में भोजपुर ही नहीं बल्कि बड़ी संख्या में राजधानी भोपाल के शिवभक्त शामिल होते हैं। इसे न मनाने से लोगों में निराशा होगी। इस आयोजन को लेकर अब तक सरकार से किसी तरह की सूचना नहीं मिली है। हमने वार्षिक कलेंडेर में शामिल किया था, लेकिन सरकार इस का आयोजन करेगी इस की संभावनाएं कम ही हैं।

पर्व में अभी समय है

हर्ष यादव, जिला प्रभारी मंत्री मप्र शासन

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