चने की ज्यादा लागत आैर इल्लियों का डर, इस बार किसान 46 हजार हेक्टेयर में करेंगे गेहूं की बोवनी

Raisen News - पिछले वर्ष 40 हजार हेक्टेयर था गेहूं का रकबा, इस साल 6 हजार हेक्टेयर ज्यादा भास्कर संवाददाता | मंडीदीप क्षेत्र...

Dec 04, 2019, 10:02 AM IST
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पिछले वर्ष 40 हजार हेक्टेयर था गेहूं का रकबा, इस साल 6 हजार हेक्टेयर ज्यादा

भास्कर संवाददाता | मंडीदीप

क्षेत्र के किसानों का रुझान इस बार गेहूं की तरफ बढ़ रहा है, यही कारण है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार रबी सीजन में सबसे अधिक गेहूं की बोवनी होने का अनुमान है, जबकि किसान चने से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि इस बार क्षेत्र में 46000 हेक्टेयर रकबे में किसान गेहूं और करीब 8000 हेक्टेयर में चने की बोवनी करेंगे, इसकी वजह चने की बढ़ती लागत और इल्लियां का प्रकोप आदि होना है, लेकिन गेहूं में ऐसी कोई समस्या नहीं आती।

यही वजह है कि किसानों ने इस बार चने से मोहभंग करते हुए गेहूं की तरफ रुझान बढ़ाया है, इस कारण जहां पिछली बार 14000 हेक्टेयर में चने की बाेवनी की गई थी जो अब घटकर 7 से 8 हजार हेक्टेयर तक सिमट ने की उम्मीद जताई जा रही है। यदि गेहूं की बात करें तो पिछले साल 40,000 हेक्टेयर में गेहूं बोया गया था जो इस बार बढ़कर 46000 हेक्टेयर तक पहुंचने का अनुमान है।

साल दर साल बढ़ रहा उत्पादन और रकबा : विभागीय अधिकारियों के अनुसार पांच साल पहले गेहूं का उत्पादन 30-32 क्विंटल प्रति हेक्टेयर था। धीरे धीरे किसानों का रुझान वैज्ञानिक खेती की ओर बढ़ा। वैज्ञानिक तौर तरीके अपनाने के साथ कड़ी मेहनत और मौसम के अनुकूल होने से किसानों ने इस बार 42 से 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से गेहूं की उपज लेकर प्रदेश में कीर्तिमान रच दिया हैं। इसी के साथ पिछले पांच साल में गेहूं का 15 हजार हेक्टेयर रकबा भी बढ़ा है। इस बार इसमें और 6 हजार की बढ़ोतरी हो जाएगी।

प्रदेश में सबसे अधिक गेहूं के उत्पादन के मामले में रायसेन जिला नरसिंहपुर के बाद दूसरे नंबर पर आता है

क्षेत्र के किसानों का गेहूं में इसलिए बढ़ रहा रुझान

अभी तक औबेदुल्लागंज ब्लॉक धान उत्पादन के लिए प्रसिद्ध रहा है। लेकिन अब यहां के किसान गेहूं उत्पादन में भी सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस बार क्षेत्र के किसानों ने प्रति हेक्टेयर 42 से 45 क्विंटल गेहूं की पैदावार करने में सफलता पाई है। जिससे अब गेहूं के अधिकतम उत्पादन के लिए भी ब्लाक को जाना जाने लगा है। इतना ही नहीं प्रदेश में अधिकतम गेहूं उत्पादन के मामले में रायसेन जिला नरसिंहपुर के बाद दूसरे नंबर पर है। सतलापुर के किसान राकेश लौवंशी बताते हैं कि क्षेत्र में सिंचाई के लिए पर्याप्त तीन पानी की व्यवस्था है। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह और उन्नत किस्म अन्नपूर्णा बोने से अच्छी पैदावार होती है। साथ ही समर्थन मूल्य 1735 और 265 रुपए बोनस के मिलाकर कुल दो हजार रुपए प्रति क्विंटल की दर से अच्छी कीमत मिलने से किसानों का गेहूं में भरोसा बढ़ रहा है।

अन्नदाता की अन्नपूर्णा में अधिक दिलचस्पी

क्षेत्र के अधिकांश किसानों ने कृषि अधिकारियों की सलाह पर सबसे अधिक करीब 60 प्रतिशत अन्नपूर्णा किस्म के गेहूं की बोनी की थी। इसके अलावा जीडब्ल्यू 366 एजीडब्ल्यू 322, 327, 1544 मालवा शक्ति ड्यूरम लोक एवं अन्य उन्नत किस्में भी बोई थी।

गेहूं का रकबा बढ़ने का अनुमान है


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