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मृत्यु मंगलमय हो जाए तो जीवन का उद्धार हो जाता है: बड़े भैया गुरुजी
ग्राम धांदला में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के समापन दिवस पर बड़े भैया गुरुजी समनापुर वालों ने भक्तों को भाव विभोर कर अंतिम दिवस की कथा सुनाई । उन्होंने दधि मंथन लीला, गोपियों का उलाहना, श्री कृष्ण मथुरा गमन, सुदामा मिलन आदि कथा विस्तार पूर्वक सुनाई ।
मथुरा गमन की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा मां यशोदा को जब यह ज्ञात हुआ कि कृष्ण मेरा पुत्र नहीं है, बल्कि देवकी का बेटा है, तब उन्होंने कृष्ण से कहा क्षमा करना । मुझे आज ही ज्ञात हुआ कि तू मेरा पुत्र नहीं है, मैं भी कितनी पगली थी, मैंने बात बात पर तुझे डांटा। बात- बात पर तुझे छड़ी बताई, बेटा मेरा पुत्र नहीं है, इसलिए तू छोड़कर जा रहा है । परब्रह्म परमात्मा श्री कृष्ण के नेत्रों में आंसू आ गए, उन्होंने कहा कि माता मैं अपनी चमड़ी के उपानक बनवाकर आपके लिए अर्पित कर दूं तब भी मैं आपके ऋण से उतार नहीं हो सकता। इसके बाद उन्होंने विदाई गीत गाकर समझाया कि किस प्रकार सभी लोग एक ना एक दिन इस संसार को छोड़कर चले जाते हैं, किंतु अगर हमारी मृत्यु मंगलमय हो जाए, तो हमारे जीवन का उद्धार हो जाता है । यही श्रीमद्भागवत के अंतिम उपदेश हैं । उन्होंने अपने अंतिम उपदेश में कहा की कलयुग में ना तो जप करने की जरूरत है ना तप करने की जरूरत है ना ही किसी प्रकार की कोई कठिन साधना। कलयुग में केवल नाम का सहारा लेकर भवसागर को पार किया जा सकता है ।