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वेदर स्टेशन से मौसम की सटीक जानकारी देने की योजना अटकी
3 साल पहले टेंडर होने के बाद भी फाइलों से बाहर धरातल पर नही उतर पाई योजना
मंडीदीप| इन दिनों मौसम में हो रहे उतार-चढ़़ाव ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऐसे में उन्हें 4 साल पहले बनाई गई ऑटोमेटेड वेदर स्टेशन योजना की याद आ रही हैं। जिससे आपदा आने की सटीक जानकारी मिलती।
किसानों का कहना है कि यदि जिम्मेदारों ने इस महत्वपूर्ण योजना में गंभीरता दिखाई होती तो अन्नदाता की परेशानियां कुछ कम हो जाती। मगर सरकारी सिस्टम योजना को समय से मूर्तरूप देने के बजाए उदासीन रवैया अपनाएं रहा। परिणाम स्वरूप 4 साल बाद भी योजना पर अमलीय कार्रवाई नही की जा सकी। यह स्थिति तब है जब योजना को मूर्त रूप देने के लिए बीते 3 वर्ष पहले इसके टेंडर भी जारी किए जा चुके थे, लेकिन इसके बाद भी योजना को अब तक धरातल पर नही उतारा जा सका। मौसम केंद्र के अभाव में किसानों को मौसम की सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही है।
प्रत्येक पर पांच-पांच लाख रुपए की रखी गई थी लागत : प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा अपने पिछले कार्यकाल में कृषि में आधुनिक तकनीकी संचार माध्यमों का उपयोग करने की योजना बनाई गई थी। इन वेदर स्टेशनों का निर्माण इसी योजना के तहत कराया जाना था। प्रत्येक स्टेशन पर करीब पांच लाख की राशि खर्च होनी थी । योजना का खाका मई 2016में तैयार किया गया था। अभी जिले में ऐसा एक भी केंद्र नहीं है। जहां से ओला गिरने,अतिवर्षा होने आंधी तूफान आने या अन्य तरह की आपदा आने की सटीक जानकारी मिल सके। इसी को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र में चार मौसम केंद्र स्थापित किए जाने थे। इन चार केंद्रों में से एक केंद्र मंडीदीप के कृषि उपज उपमंडी प्रांगण में स्थापित किया जाना था। इसके अलावा दूसरा औबेदुल्लागंज के कृषि कार्यालय में,तीसरा सुल्तानपुर के बीज निगम कृषि प्रक्षेत्र एवं चौथा केंद्र बरखेड़ा के पंचायत भवन में बनाया जाना था , लेकिन जवाबदार अधिकारियों की लापरवाही से इस किसान हितैषी योजना को जमीन पर नही उतारा जा सका।
15 किमी का एरिया कवर करता एक केंद्र : इन केंद्रों को इस तरह हाइटेक बनाया जाना था कि प्रत्येक स्टेशन 15 किमी का दायरा कवर करता।