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धर्म... व्यक्ति को स्वयं निर्णय करना है कि किस वासना को अपनाया जाए

2 वर्ष पहले
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सिलवानी| प्रत्येक समाजजन को श्रावक धर्म का पालन करना चाहिए। मानव तन 84 करोड़ योनियों में भ्रमण करने के बाद मिला हैं इसलिए मानव तन का उपयोग धर्म कार्य में लगा देना चाहिए। धर्म के अनुसार जीवन की गाड़ी को चलाने से जीवन में कभी भी संकटों का सामना नहीं करना पड़ता, बल्कि जब तक जिस्म में जान है तब तक इंसान सुखमय जीवन व्यतीत करता है। यह बात छुल्लक हर्षित सागर महाराज ने कही।

वह श्रीपार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित प्रवचन के दाैरान समाजजनों को संबोधित कर रहे थे। छुल्लक हर्षित सागर महाराज के द्वारा नगर में चातुर्मास किया जा रहा हैं। उन्होंने वासना शब्द की विस्तार से व्याख्या करते हुए बताया कि वासना दो प्रकार की होती है। एक धर्म वासना दूसरी काम वासना। काम वासना में फंस कर व्यक्ति जीवन को नरक बना लेता है व समाज, परिवार, नगर, नाते, रिश्तेदारों, मित्रों में हीन नजरों से देखा जाता है। सभी तरफ से तिरस्कार उसको झेलता है। जबकि धर्म वासना को आत्मसात करने वाला व्यक्ति चहुं और ख्याति प्राप्त करने के साथ ही पुण्य का अर्जन कर जीवन को सुखी समृद्ध बनाता है।

उन्होंने बताया कि कभी भी किसी भी समय नगर मे साधु संतो मुनियों की आगमन होता है तो उनकी भव्य आगवानी बेहतर सेवा करनी चाहिए। छुल्लक हर्षित सागर महाराज ने बताया कि प्रति दिन जिन मंदिर में जाकर भगवान की पूजा अर्चन कर मुनियों के मुख से सुनी गई भगवान की वाणी को जीवन में आत्मसात करना चाहिए। अभिभावक अपने बच्चों को संस्कारवान बनाए। इस दाैरान बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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