सिंगल यूज पाॅलीथिन का हो रहा उपयोग अफसर नहीं करा रहे आदेश का पालन

Raisen News - पर्यावरण व मानव जीवन के लिए खतरा बन चुकी सिंगल यूज पॉलिथीन प्रतिबंध के बावजूद नगर के बाजार एवं सब्जी मंडी में...

Oct 13, 2019, 06:36 AM IST
Bareli News - mp news single use polythene is being used officers are not following orders
पर्यावरण व मानव जीवन के लिए खतरा बन चुकी सिंगल यूज पॉलिथीन प्रतिबंध के बावजूद नगर के बाजार एवं सब्जी मंडी में धड़ल्ले से उपयोग की जा रही है। राज्य शासन ने पर्यावरण प्रदूषण और जन-जीवन को बचाने के लिए 2अक्टूबर से सिंगल यूज पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगा दिया है।

नगर एवं क्षेत्र में अमानक स्तर के पॉलिथीन और डिस्पोजल का चलन जोरों पर है,पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाले पॉलीथिन और डिस्पोजल,सिंगल यूज पॉलीथिन के उपयोग से ही हो रहा है। सरकार के साथ समाजसेवी संस्थाएं भी लोगों को जागरूक कर कपड़े के थैले वितरित कर रहे है साथ ही पाॅलीथिन का उपयोग न करने के लिए जागरूक कर रहे है लेकिन बावजूद इसके विक्रेताओं और आम जनता में जागरूकता नहीं आ रही है। ऐसी स्थिति में यह पर्यावरण के लिए बडा खतरा बनते जा रहे हैं।

जमीन और जानवर के साथ साथ जनमानस पर इसका सीधा दुष्प्रभाव पड़ने को लेकर सरकार के द्वारा लिए गए इस निर्णय का नगर में सामाजिक एवं राजनैतिक संस्थाओं के द्वारा स्वागत किया जा रहा है। लेकिन जमीनी स्तर पर इसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा। नगर की होटलों चाय पान की दुकान किराना एवं सब्जी मंडी में इसका चलन आज भी जारी है। ग्राहक रामजीवन सिंह ने बताया कि यदि पाॅलीथिन बंद करने के पक्ष में वह भी है लेकिन उत्पादन पर प्रतिबंध लगना चाहिए जिससे न शहर में पॉलीथिन आएंगी न ही लोग उनका उपयोग करेंगे।

हाई कोर्ट ने भी पूर्व में 40 माइक्रोन से कम मोटाई वाली पॉलीथिन, कैरीबेग बनाने और इसके विक्रय करने पर रोक लगाई थी। चूंकि मानक स्तर की पॉलीथिन का दाम अधिक है और ये वजन में भी आम पॉलीथिन की तुलना में कम आती है, जिस कारण लोग थोड़े से पैसे बचाने के लालच में अमानक स्तर की पॉलीथिन ही खरीद रहे हैं।

पहले समझाइश फिर कार्रवाई करें अफसर,तब कुछ हद तक हो सकती है रोकथाम

पॉलीथिन का हो रहा उपयोग, जो प्रदूषण का बन रही कारण।

मानव जीवन के लिए पॉलीथिन से नुकसान

पॉलिथीन उपयोग के लिए ग्रामीण क्षेत्र की जनता के संबंध में तो कह सकते हैं कि शायद इन्हें इसके दुष्परिणामों की जानकारी न हो लेकिन समाज के शिक्षित वर्ग के द्वारा पॉलीथिन के दुष्परिणाम को भली भांति जानते हुए भी इसका खुल कर उपयोग करते हैं। समाजसेवियों के द्वारा आज कपडे एवं जूट के बैग और थैले अपने स्वयं के व्यय पर तैयार करवाकर आम जनता में वितरित करवाये जा रहे हैं। इन सामाजिक संंस्थाओं का मानना है कि जनता में पॉलीथिन एवं डिस्पोजल के उपयोग को लेकर जागरूकता लाने का प्रयास किया जा रहा है।

सड़क पर न फेंके पॉलीथिन युक्त कचरा

गौ सेवा कर रही सौरभ संजीवनी के सदस्य अनिल भार्गव, लक्ष्मीनारायण खैरोनिया, चेतन राजपूत, प्रेमनारायण साहू, मधुर राय ने बताया कि सरकार के द्वारा उठाये गये इस कदम का हमारी समिति स्वागत करती है। पूर्व में शायद ही कोई ऐसा दिन हो जिस दिन कोई पशु पाॅलीथिन के कारण जान न गवां रहा हो। जानवरों के द्वारा की जाने वाली रौथ क्रिया में वापस न आने के कारण पॉलीथिन पेट में जमा होने लगती है,जिससे जानवर का पेट फूलने लगता है एवं श्वास नली अवरुद्ध से माैत हो जाती है।,लोगों को भी पॉलीथिन युक्त कचरा सड़क पर नहीं फैंकना चाहिए।

कागज के बैग बेचना कर दिया शुरू


उत्पादन पर लगे प्रतिबंध


अब की जाएगी दंडात्मक कार्रवाई


समझाईश दे चुके अब होगी कार्रवाई


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