श्रीकृष्ण की लीलाओं से अनुशासन में रहने की प्रेरणा लेना चाहिए: चेतनानंद

Raisen News - टेकरी मंदिर परिसर में चल रही संगीतमयी श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठवें दिवस शनिवार को स्वामी चेतनानंद गिरी...

Bhaskar News Network

Mar 17, 2019, 04:56 AM IST
Silwani News - mp news the inspiration of lord krishna should be in discipline chetanand
टेकरी मंदिर परिसर में चल रही संगीतमयी श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठवें दिवस शनिवार को स्वामी चेतनानंद गिरी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण रुक्मणि विवाह का वर्णन कर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया।

उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण का विवाह रुक्मणि के साथ संपन्न होता है,वह द्वारिका में निवास करते है। दैत्य द्वारा 16100 युवतियों को बंदी बना कर रखा गया था। जिसे कि भगवान श्रीकृष्ण ने मुक्त कराया। दैत्यों से मुक्त होते ही युवतियों के द्वारा श्रीकृष्ण को पति रूप में वरण किया गया। भगवान श्रीकृष्ण ने रास लीला के माध्यम से जीवन में रसों का समावेश किया है। श्रीकृष्ण गोपियों के साथ पवित्र भावना मय प्रेम पूर्ण रास रचाते हैं, जिसमें तनिक भी वासना का समावेश नहीं है। सर्व प्रथम श्रीकृष्ण के द्वारा शरद पूर्णिमा को महारास रचाया गया था। स्वामी चेतनानंद गिरी महाराज ने कहा कि इंसान को भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जीवन यापन, मर्यादा और अनुशासन में रहने की प्रेरणा लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि रुक्मणि द्वारा पत्र के माध्यम से ब्राहम्ण के हाथों श्रीकृष्ण को संदेश भेजा गया कि मेरे परिजन मेरा विवाह मेरी इच्छा विरुद्ध अन्यत्र कर रहे है। जबकि मेरा आपसे जन्म जन्मांतर का संबंध है। मैं आपको पतिदेव के रूप में वरण कर चुकी हूं। आप मुझे यहां से ले जाकर विवाह कीजिए। श्रीकृष्ण रुक्मणि को ले जाकर विवाह करते है। उन्होंने कहा कि किस प्रकार शरद पूर्णिमा की दिव्य चांदनी रात में महारास का अदभुत चित्रण किया। जिसका उद्देश्य जीवात्मा का परमात्मा से मिलन है। जीवन से जब पाप और पुण्य का समावेश होगा तो परमात्मा से हम नहीं मिल पाएंगे। परमात्मा से तो विरह की अग्नि में तप कर प्राप्ति होती है।

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