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होलिका दहन के धधकते अंगारों के ऊपर से निकलकर ग्रामीणों ने निभाई परंपरा

एक वर्ष पहले
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मेहंगवा गांव में 100 साल से व चंद्रपुरा गांव में 10 साल से किया जा रहा है हर वर्ष आयोजन

सिलवानी|अंधविश्वास कहे या ईश्वर के प्रति ग्रामीणों में श्रद्धा है कि वह हर साल होलिका दहन के बाद उसके अंगारों पर से हर साल ग्रामीण निकलकर परंपराओं को निभाते हुए आ रहे हैं । तहसील के मेहगंवा तथा चंद्रपुरा गांव होलिका दहन के समय ग्रामीण पिछले 100 सालों से होलिका दहन के बाद अंगारों पर निकलते हैं बावजूद इसके ग्रामीणों के पैरों में न तो दर्द हुआ न ही उनके पैर जले हैं। मेहगंवा गांव में सोमवार की रात्रि करीब 11 बजे गांव के बाहर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ होलिका दहन किया गया। होलिका दहन के बाद धधकते हुए अंगारों के ऊपर से गांव के लोगों का निकलना प्रारंभ हुआ। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक एक एक कर धधकते हुए अंगारों पर से निकलते रहे। अंगारों पर से निकलने के बाद किसी के भी पैर में न ता जलने का निशान देखा गया और न ही फफोले ही आए। तहसील मुख्यालय से मेहगंवा गांव की दूरी तकरीबन 14 किलो मीटर है। गांव के 65 साल वर्षीय पुरुषोत्तम रघुवंशी ने बताया कि बीते करीब 100 सौ सालों से होलिका दहन से निकले धधकते अंगारों पर से निकलने की यह परंपरा चली आ रही है। जिसका निर्वाहन प्रति वर्ष किया जाता है।

गांव के ही केशव रघुवंशी, शिवराज कुशवाहा ने बताया कि होलिका दहन के धधकते अंगारों पर से निकलने से गांव में कोई भी प्राकृतिक देवीय आपदा सहित कोई भी संकट नहीं आता है। ग्रामीणों ने बताया कि एैसी ही एक परंपरा का निर्वहण तहसील मुख्यालय से करीब 4 किलो मीटर दूर चंद्रपुरा गांव में किया जा रहा है। यहां पर भी ग्रामीण जलते हुए अंगारों पर से निकलते हैं। यहां के निवासी जयदीप पटेल ने बताया कि करीब 10 सालों से इस परंपरा का निर्वाहण किया जा रहा है। कभी भी उन्होंने गांव पर कोई भी आपदा आती हुई नही देखी।
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