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सुनवाहा माता मंदिर में लगता है मेला पर बिजली, सड़क, पानी की सुविधा नहीं

एक वर्ष पहले
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गांव के युवाओं ने मंदिर निर्माण और व्यवस्थाओं के संचालन करने समिति बनाने की मांग

सुनवाहा गांव में स्थित खैर माता मंदिर पर चैत्र नवरात्रि में हर साल विशाल मेला लगता है। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में माता से मान्यता करने पर संतान प्राप्ति होती है। यहीं नहीं माता हर प्रकार की मनोकामना भी पूरी करती है।

यही वजह है कि इस माता मंदिर में आस पास के तीन जिले सागर, रायसेन और नरसिंहपुर के श्रद्धालु हर साल बड़ी संख्या में आते हैं। श्रद्धालुओं की मान्यता पूरी होने पर माता को शृंगार, प्रसाद और चुनरी आदि चढ़ाते हैं। हजारों की संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यहां पर मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही है। बिजली, पानी और सड़क की सुविधाओं के अभाव में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हर साल नवरात्रि के पहले ही दिन से सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर पर चल चढ़ाने आते हैं, लेकिन इस बार उन आने वाले भक्तों को पानी पीने को तो दूर माता को जल चढ़ाने या तो घर से ही लाना पड़ेगा या फिर पास ही स्थित गांव से लाना होगा। क्योंकि यहां पर एकमात्र नल है जो कुछ दिनों से बंद हो गया है, जिसकी तरफ जिम्मेदारों का कोई ध्यान नहीं है। कहने के लिए यहां पर यहां पर दो पानी के बोर हैं जिसमें एक बोर से गांव की नल-जल योजना के संचालन के लिए मोटर डली हुई है। इस बोर से नल जल योजना के बनी टंकी के लिए पानी जाता है, लेकिन मजे की बात यह है कि पर्याप्त मात्रा में पानी होने के बाद भी यह नल जल योजना बंद है। यही नहीं इस टंकी से चलने वाली नल जल योजना से मंदिर और पास बने हायर सेकंडरी स्कूल,दुकानों को कोई कनेक्शन भी नहीं है न ही इससे कोई लाभ है, ग्रामीणों और दुकानदारों का कहना है कि जो दूसरा बोर है उसमें भी कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। कभी-कभी चलती है कभी नहीं।

मंदिर के पुजारी दिलीप भटेले और गांव के पारब्रह्म सिंह, हनमत सिंह जसवंत सिंह ठाकुर आदि का कहना है कि अब अभी यह हाल हैं तो नवरात्रि के मेले में बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। जब भक्तों को माता के लिए चढ़ाने जल ही नहीं मिलेगा तो मेले में आने वाले लोगों को पीने के पानी मिलना संभव नहीं हो पाएगा। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर बेगमगंज में एसडीएम से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन सुनवाई ही नहीं हो रही है जिससे परेशानियों का सामना करना पड़ेगा ।

सबकी जिम्मेदारी तय हो

जनपद सदस्य जयपाल सिंह ठाकुर ने बताया कि मंदिर की व्यवस्थाओं के प्रति शासन प्रशासन बहुत उदासीन है, दो बोर है लेकिन दोनों बंद पड़े हैं और सभी श्रद्धालुओं को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। यह ठीक नहीं है इसके लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। वहीं पीएचई के एसडीओ एसएल कोरी ने बताया कि जल्द से जल्द बंद पड़े हैंडपंपों को चालू किया जाएगा।

यह है मंदिर की मान्यता

मंदिर की महिमा बहुत प्रसिद्ध है यहां के विषय में मान्यता है कि कोई भी निसंतान व्यक्ति सच्चे मन से मां के मंदिर में माथा टेकते हुए प्रार्थना करता है तो उसको निश्चित ही संतान की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि इस मंदिर लगातार धार्मिक अनुष्ठान और आयोजन होते रहते हैं और यहां पर आए दिन विवाह कार्यक्रम होते रहते हैं। आसपास के युवाओं के सहयोग और जागरूकता से यहां पिछले साल से प्रत्येक शनिवार को हाट बाजार ही लगने लगा है जिसमे आसपास गांव के लोग खरीददारी करने भी आते हैं लेकिन यहां पर पानी की कोई व्यवस्था न होने से हाट बाजार में दुकान लगाने वाले दुकानदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है । शिवराज सिंह, संदीप ठाकुर, सुनील यादव, राजेन्द्र यादव, पन्दरभटा के युवाओं का कहना है कि इन सब समस्याओं से निजात पाने के लिए मंदिर के विकास के लिए एक स्थायी समिति बनाई जाए जिसमे प्रशासन के समाजसेवा करने वाले और जनप्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।

यह सुनवाहा मंदिर जहां पर पानी की व्यवस्था न होने से श्रद्वालु होते हैं परेशान ।
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