ट्रैक्टर-ट्रालियों में रेडियम, रिफ्लेक्टर नहीं लगने से रात में दोपहिया वाहन चालकों को होती है परेशानी

Raisen News - ट्रैक्टर-ट्राली में भरे सरिए। नहीं लगी रेडियम पट्टी और न ही लाल कपड़ा। इससे हो सकता है हादसा। टर्न लेने और साइड...

Bhaskar News Network

Oct 18, 2019, 06:36 AM IST
Begumganj News - mp news two wheeler drivers face problems at night due to lack of radium reflectors in tractor trolleys
ट्रैक्टर-ट्राली में भरे सरिए। नहीं लगी रेडियम पट्टी और न ही लाल कपड़ा। इससे हो सकता है हादसा।

टर्न लेने और साइड में खड़े ट्रैक्टर ट्रालियों से सबसे ज्यादा हुई दुर्घटनाएं, ऐसे वाहनों पर नहीं होती है कोई कार्रवाई

भास्कर संवाददाता|बेगमगंज

इन दिनों ट्रैक्टर-ट्रालियों का उपयोग किसानों के अलावा बिल्डिंग मेटेरियल वाले व्यापारी व्यवसायिक उपयोग कर रहे हैं, लेकिन इन ट्रैक्टर-ट्रालियों को चलाने वालों के पास न तो ड्रायविंग लाइसेंस होता है न ही वाहन के दस्तावेज। माल ढोने के लिए पुराने ट्रैक्टर-ट्रालियां, कबाड़ या गैरेजों से खरीदकर काम कर रहे हैं। यहीं नहीं इनके कारण नगर में आए दिन सबसे ज्यादा वाहन दुर्घटनाएं हो रही हैं।

प्रशासनिक अफसर और पुलिस को इसकी जानकारी होने के बावजूद इनके चालकों पर कार्रवाई नहीं होती है। इसी का फायदा चालक उठाकर सड़कों पर तेज रफ्तार से दाैड़ा रहे हैं। यहीं नहीं रात के समय ट्रैक्टर-ट्राली लोगों की जान के दुश्मन बन रहे हैं। किसानों में जागरूकता की कमी और अफसरों की कार्रवाई का खौफ न होने के कारण यह हादसों का कारण बन रहे हैं।

किसानों को ट्रैक्टर-ट्रालियों में लाइट, इंडीकेटर, रेडियम पट‌्टी और रिफलेक्टर आदि लगाना चाहिए ताकि आगे पीछे से आने वाले वाहन चालकों को ट्रैक्टर-ट्राली होने का पता चल सके। हालात यह है कि ट्रैक्टर-ट्रालियों का उपयोग कृषि कार्य के अलावा माल ढुलाई में ज्यादा किया जा रहा है। जिनमें से निकलते लोहे के सरिए हादसों को आमंत्रण दे रहे हैं। सरिया ले जाते समय बिना लाल झंडी लगाए तथा ट्राली पर रेडियम पट्टी भी नहीं लगाई जाती है। इससे दुर्घटनाओं की आंशका बनी रहती है।

ठंडे बस्ते में पहुंचा अभियान, हालात जस के तस : शहर में लंबे समय से सड़कों पर दौड़ रहे कृषि और व्यवसायिक ट्रैक्टर-ट्राली में रिफलेक्टर नहीं लगे है। ट्रालियों में बैक लाइट न होने से रात के समय पीछे चलने वाले लोगांे के साथ हादसे की आंशका बनी रहती है। जबकि अब किसानों की उपज आना शुरू हो गया है जिससे बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रालियों का शहर में आना-जाना होगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक बार जरूर ट्रैक्टर की ट्रालियों पर पुलिस द्वारा रेडियम पट्टी लगाने का काम शुरू किया गया था लेकिन लंबा समय बीतने के बाद यह अभियान ठंडे बस्ते में चला गया।

लंबा समय बीतने के बाद वाहनों पर रेडियम पट्‌टी लगाने का अभियान ठंडे बस्ते में चला गया है

दो की हो चुकी माैत, आधा दर्जन घायल

रात के समय सड़क पर चलने या खड़ी ट्रालियों पर रिफलेक्टर नहीं लगा होने से अंधेरे के कारण दूसरे वाहनों की लाइट पड़ने पर दिखलाई नहीं देते। इससे वाहनों की ट्रालियों से टकराने की संभावना रहती है। इससे पहले दो युवकों की घटना स्थल पर ही मौत हो चुकी है। एक हप्सिली और झिरिया गांव के युवकों की माैत हो चुकी है। बावजूद इसके जिम्मेदार इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे है। कई बार ग्रामीण क्षेत्रों में मंडी में उपज लेकर आने वाले किसानों के अलावा अन्य लोग रात में सड़क के अलावा स्टेट हाईवे पर हर कहीं ट्रैक्टर-ट्रालियांे को खड़ा कर इधर-उधर चले जाते है। इस दौरान सड़क से गुजरने वाले लोगों के साथ दुर्घटना की भी संभावना बनी रहती है।

ट्राली निर्माताओं के लिए बने नियम

शासन को ट्राली निर्माताओं के लिए नियम बनाकर ट्रक, बसों की तरह ट्रालियों के पीछे बैक लाइट रेडियम पट्टी लगाना अनिवार्य करना चाहिए, ताकि जब किसान या अन्य कोई ट्राली खरीदे तो उस पर उक्त चीजें पहले से ही लगी हो और हादसों को रोका जा सके।

चालकों को करेंगे जागरूक


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