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सड़क की रिपेयरिंग के नाम पर हर साल होता है बजट खर्च, पर काम दिखता नहीं

Rajgarh News - भास्कर संवाददाता| नरसिंहगढ़ पीडब्ल्यूडी आर्थिक अनियमितताओं और लोगों की परेशानी कि पहचान बन चुकी है। लंबे समय...

Dainik Bhaskar

Mar 16, 2018, 03:45 AM IST
सड़क की रिपेयरिंग के नाम पर हर साल होता है बजट खर्च, पर काम दिखता नहीं
भास्कर संवाददाता| नरसिंहगढ़

पीडब्ल्यूडी आर्थिक अनियमितताओं और लोगों की परेशानी कि पहचान बन चुकी है। लंबे समय से विभाग की कंतोड़ा सड़क को दोबारा बनाने की मांग लोग कर रहे हैं, लेकिन पीडब्ल्यूडी इस पर ध्यान नहीं दे रही है। गुरुवार को सड़क की पटरियों के कटाव की वजह से एक ट्राली पलट गई, जिससे उसमें बैठीे 2 महिला श्रमिक घायल हो गईं। जिन का इलाज सिविल मेहताब अस्पताल में करवाया गया।

गनीमत थी कि उसी दौरान सड़क से कुछ स्थानीय लोग निकल रहे थे, जिन्होंने मेहनत करके घायलों को बाहर निकाला, जिससे उन्हें तुरंत इलाज मिल सका। ट्रैक्टर के अगले हिस्से में बैठी 4 अन्य महिला श्रमिक और ड्राइवर सुरक्षित बच गए क्योंकि ट्रैक्टर सड़क के बीच में ही अटक गया था। घायल महिलाएं पिछले हिस्से में लगी ट्रॉली में बैठी थीं। ट्रॉली में चूना भरा हुआ था और इस में बैठे लोग इसे बेचने के लिए ब्यावरा से बैरसिया जा रहे थे। सूचना के बाद डायल-100 और पुलिस टीम मौके पर पहुंची और प्रकरण कायम किया। कंतोड़ा की सड़क की खराब हालत की वजह से अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं। लगभग 2 महीने पहले इसी सड़क के बाहरी हिस्से में ट्राले की टक्कर से एक बाइक सवार युवक की मौत हो गई थी। उसकी वजह भी सड़क की खराब हालत ही थी। पूरी सड़क में बड़े-बड़े गड्ढे हो रहे हैं और दोनों ओर की साइड पटरियां पूरी तरह से खत्म हैं। सड़क की रिपेयरिंग के नाम पर पीडब्ल्यूडी हर साल बड़ा बजट खर्च करती है लेकिन काम कुछ नहीं होता है, जबकि सड़क की हालत इतनी खराब है किसकी रिपेयरिंग के बजाय इसे दोबारा बनाना ही जरूरी हो गया है।

सड़क की पटरियों के कटाव की वजह से एक ट्राॅली पलट गई

कंतोड़ा सड़क के कटाव की वजह से 2 महीने पहले एक युवक की मौत भी हो चुकी है

खराब सड़क की वजह से ट्रॉली पलट गई, जिससे 2 लोग घायल हो गए।


अगर थोड़ी भी आगे आ जाती ट्रॉली, तो बड़ा हादसा हो सकता था

जहां पर दुर्घटना हुई थी, उससे थोड़ी ही आगे क्षतिग्रस्त पुलिया है। अगर ट्रॉली पुलिया वाले क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त होती तो सड़क से लगभग 10 फीट नीचे जाकर गिरती। तब हादसा ज्यादा गंभीर हो सकता था। सड़क की पुलियाओं को भी दोबारा बनाने के नाम पर बड़ी रकम निकाली जा चुकी है, लेकिन पुलियाओं की हालत वैसी ही है। विभाग की किसी भी योजना या कमी के बारे में जब एसडीओ आरएस विश्वकर्मा से बात की जाती है तो वे कभी भी सही जानकारी नहीं देते हैं। यहां तक कि जब इन जानकारियों को व्यवस्थित तरीके से लेने के लिए आरटीआई लगाई गई तो समय सीमा निकलने के बाद में भी उन्होंने इनका भी जवाब नहीं दिया।

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