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पति-पत्नी ने कहा- अब साथ-साथ रहेंगे, पहनाईं मालाएं / पति-पत्नी ने कहा- अब साथ-साथ रहेंगे, पहनाईं मालाएं

Bhaskar News Network

Dec 09, 2018, 04:41 AM IST

Rajgarh News - भास्कर संवाददाता | सारंगपुर भारत का संविधान समाज के गरीब और कमजोर वर्गों के लिए निशुल्क कानूनी सहायता प्रदान...

Sarangpur News - husband and wife said now will be together carpets worn
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भास्कर संवाददाता | सारंगपुर

भारत का संविधान समाज के गरीब और कमजोर वर्गों के लिए निशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करता है और सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करता है। समाज के कमजोर वर्गों के लिए समान अवसर के आधार पर न्याय दिलाने के लिए स्वतंत्र और सक्षम विधिक सेवा प्रदान करने के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम बनाया गया है। इसके तहत उच्च न्यायालय से तहसील न्यायालय तक विधिक सेवा संस्थाएं स्थापित की गई हैं। न्याय सबके लिए हैं और न्याय पाने का सभी को समान अधिकार है। यह बात जिला अपर सत्र न्यायाधीश दिव्यांगना जोशी पांडे ने शनिवार को आयोजित मेगा लोक अदालत की शुरूआत करते हुए वकील और लोगों के बीच कही। उन्होंने लोक अदालत में अधिक से अधिक राजीनामा करवा कर पक्षकारों को अपने प्रकरणों को निराकृत करने का प्रयास करना चाहिए। इस मौके पर न्यायाधीश गोपेश गर्ग, शोभना मीणा, प्रीति जैन सहित अभिभाषक संघ अध्यक्ष चन्द्र कुमार जैन, वरिष्ठ अभिभाषक रमेश चन्द वर्मा, पीएस मंडलोई, जीपी सक्सेना, वली मोहम्मद मंसूरी, रामबाबु नारोलिया आदि मौजूद रहे।

रजामंदी से एक जुए दो जोड़े : पारिवारिक कलह आदि कारणों से डिगवाड़ की संतोष बाई प|ी महेश कुमार दो साल से पति से अलग रह रही थे। इसका केस कोर्ट में चल रहा था।

वकील डब्ल्यू एम मंसूरी ने दोनों को लोग अदालत में पेश किया। समझाइश के बाद दोनों ने एक साथ रहने की सहमती दी। वहीं बबीता प|ी कमल निवासी काजी वाला बाग ब्यावरा 6 साल से अलग अलग रह रहे थे। उनको वकील चन्द्र कुमार जैन के समझाने पर दोनों ने कोर्ट के समक्ष एक साथ रहने का सुलह नामा पेश किया। इस मौके पर दोनों जोड़ों ने एक-दूसरे को फूल मालाएं पहनाई और राजीखुशी से अपने घर लौट गए।

रजामंदी से एक हुए पति-प|ी एक-दूसरे को फूल मालााएं पहनाते हुए।

कर्ज माफी के इंतजार में अदालत नहीं पहुंचे लोग

नर्मदा झाबुआ बैंक, एसबीआई, विद्युत वितरण कंपनी, नगर पालिका ने अपने कैंप लगाए। लेकिन इस बार आयोजित लोक अदालत में दोपहर बाद तक सन्नाटा सा छाया रहा। बहुत ही कम पक्षकार अदालत में आए। इसका कारण पता किया तो पता चला कि 11 को चुनाव परिणाम आ रहे हैं। इसमें कुछ परिवर्तन होता है तो हमारा कर्ज वैसे ही माफ हो जाएगा। ऐसे में कर्ज भरने की जरूरत ही क्या है।

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