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16 माह से ज्यादा पुरानी 78 कालोनियों को वैध कराने सर्वे, भोपाल भेजेंगे रिपोर्ट

जिले की 2017 के पहले तक की बनी और बसी अवैध काॅलोनियाें को सरकार वैध करने जा रही है। इसके लिए जिले के नगरीय निकायों में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 30, 2018, 04:00 AM IST

जिले की 2017 के पहले तक की बनी और बसी अवैध काॅलोनियाें को सरकार वैध करने जा रही है। इसके लिए जिले के नगरीय निकायों में सर्वे भी शुरू करा दिया गया है। एक सप्ताह के भीतर इस बारे में रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी। इस कार्रवाई से जिले के 14 नगरीय निकायों की करीब 77 से ज्यादा कॉलोनियों में रहने वाले 2 लाख से ज्यादा लोगों को फायदा होगा।

कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री ने हाल में घोषणा की थी कि अवैध कॉलोनियों को वैध करा कर वहां रहने वाले नागरिकों को नगरीय निकायों द्वारा जरूरी सुविधाएं दिलाई जाएंगी। श्री शर्मा ने कहा कि इसके तहत अब जिले की निकायों में 31 दिसंबर 2016 के पहले तक बनाईं अवैध कॉलोनियों को वैध करने के लिए सर्वे शुरू कराया गया है। ताकि एक सप्ताह में रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जा सके। इस बारे में तुरंत कार्रवाई के लिए जिले के सभी एसडीएम को भी निर्देश दिए हैं।

जिले भर के नगरीय निकायों में 31 दिसंबर 2016तक की अवैध कॉलोनियों के सर्वे का काम जारी है। इस बारे में संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट जल्द देने कहा है।ताकि 3 मई को प्रकाशित होने वाली अधिसूचना में उन कॉलोनियों को शामिल किया जा सके। - कर्मवीर शर्मा, कलेक्टर राजगढ़

जिले के नगरीय निकायों में 78 से ज्यादा कॉलोनियां अवैध

राजगढ़ शहर का एरियल व्यू। यहां 13 कॉलोनियां वैध होंगी। -भास्कर

3 मई तक प्रकाशित होगी अधिसूचना

श्री शर्मा ने बताया कि नगरीय निकायों में अवैध कॉलोनियों को लेकर सर्वे शुरू करा दिया गया है। इसके साथ ही संबंधित कॉलोनाइजरों को भी कहा गया है कि वह अपने नगरीय निकाय के सीएमओ से संपर्क कर प्रक्रिया शुरू कराएं। उन्होंने बताया कि संचालनालय नगरीय प्रशासन व विकास विभाग भोपाल के निर्देशों के अनुसार 3 मई 2018 के पहले नगरीय क्षेत्रों की अवैध कॉलोनियों को वैध करने अधिसूचना का प्रकाशन किया जाना है।

78 से ज्यादा हैं अवैध कॉलोनियां: जिले की चार नपाओं में से राजगढ़ में तीन वैध कॉलोनियों के अलावा एक दर्जन से ज्यादा अवैध कॉलोनियां है। ब्यावरा नपा में इनकी संख्या 13 से ज्यादा है। जबकि सारंगपुर में 9, पचोर में 7 और नरसिंहगढ़ में 8 कॉलोनियां अवैध हैं। वहीं जिले के खिलचीपुर, जीरापुर, छापीहेड़ा, कुरावर, बोड़ा, तलेन आदि नप के तहत 6 से 8 कॉलोनियां अवैध हो सकती हैं।

कहां कितनी हैं अवैध कॉलोनियां, नहीं है निकाय को जानकारी

जिले के 14 नगरीय निकायों में से किसी के पास भी अब तक शहर की अवैध कॉलोनियों के सही आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। असल में इस मामले को लेकर निकाय शुरू से उदासीन रहे हैं। राजगढ़ नपाधिकारी के मुताबिक शहर में ज्यादातर कॉलोनी अवैध हैं। लेकिन इनकी संख्या फिलहाल स्पष्ट नहीं है। वहीं ब्यावरा नपा के अनुसार अवैध कॉलोनियों का डाटा फिलहाल तैयार किया जा रहा है।

यह होगा फायदा निकाय करा सकेंगे विकास कार्य

इन कॉलोनियों के वैध होने से जिले भर में नगरीय निकायों की अवैध व पिछड़ी बस्तियों में विकास के काम हो सकेंगे। असल में नगरीय निकाय उन कॉलोनियों के लिए ही योजनाएं बनाते हैं, जो टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से एप्रूव्ड हों और जिन्होंने नगर पालिका अधिनियम के तहत निर्धारित मानकों को पूरा किया हो। इसके तहत कॉलोनियों में पर्याप्त खुला स्पेस, गार्डनिंग, पार्क, निर्धारित चौड़ाई की सड़कें, पेयजल व बिजली आदि की सुविधाएं कॉलोनाइजर द्वारा उपलब्ध कराना जरूरी है। लेकिन अधिकांश कॉलोनाइजर बिना टाउन कंट्री प्लानिंग से एप्रूवल और नपा में नामांतरण कराए बगैर सिर्फ जमीन का डायवर्सन करा कर प्लॉट बेच देते हैं। नपा के नियम में न आने से इन अवैध कॉलोनियों में सड़क, पानी, बिजली जैसी बेसिक सुविधाएं नहीं मिल पातीं। जिले के एक लाख से ज्यादा नागरिक इसी वजह से परेशान हैं।

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