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बुजुर्गों ने बताया जीवन में हास्य का महत्व, गोष्ठी में पढ़ीं अपनी कविताएं

Dainik Bhaskar

May 08, 2018, 04:35 AM IST

Rajgarh News - भास्कर संवाददाता, नरसिंहगढ़ अंतर्राष्ट्रीय दिवस के मौके पर रविवार को साहित्यिक संस्था प्रेरणा ने काव्य...

बुजुर्गों ने बताया जीवन में हास्य का महत्व, गोष्ठी में पढ़ीं अपनी कविताएं
भास्कर संवाददाता, नरसिंहगढ़

अंतर्राष्ट्रीय दिवस के मौके पर रविवार को साहित्यिक संस्था प्रेरणा ने काव्य गोष्ठी और सम्मान समारोह का आयोजन किया। इस के मुख्य अतिथि राजगढ़ के साहित्य समीक्षक एके शर्मा थे और अध्यक्षता प्रसिद्ध शायर साजिद हाशमी ने की। सरस्वती पूजा के बाद संस्था की ओर से साजिद हाशमी को सम्मानित किया गया।

इसके बाद उन्होंने अपनी हाल ही में प्रकाशित उर्दू किताब कतरात के बारे में बताया, जिसमें मां, पिता, भाई-बहन आदि के रिश्तों के अलावा सामाजिक विषयों पर आधारित शेर लिखे गए हैं। उन्होंने किताब में लिखे कई शेर पढ़कर भी सुनाए।मुख्य अतिथि एके शर्मा ने कहा कि यह किताब पढ़ने और परिवार के बीच रखने के योग्य है।कार्यक्रम में खासतौर से मौजूद बुजुर्ग कवियों और लेखकों ने जीवन में हास्य का महत्व बताया। इनमें कैलाश सोनी डावर, केपी भारतीय, कल्लू खां कुरैशी नाजा, डॉ. ओपी साहू, वाहिद हाशमी आदि शामिल थे। संचालन कैलाश डावर और आभार प्रदर्शन डॉ. ओपी साहू ने किया।

साहित्यिक संस्था ने हास्य दिवस पर काव्य गोष्ठी और सम्मान समारोह किया

कविताओं ने खूब हंसाया

कार्यक्रम में युवा और वरिष्ठ कवियों ने अलग-अलग विषयों और भावों पर अपनी लिखी कविताएं प्रस्तुत कीं। इनमें हरि सिंह परिहार पतंग ने सजनी तेरे हुए गुलाम जा दिन से घर में आई, वाहिद हाशमी ने मिर्गी समझ के जूता सुंघाने लगे हैं लोग, इश्तियाक जैदी ने सौगात आंसुओं की पिए जा रहा हूं मैं, पंकज मालवीय ने अपने जब करते हैं छल अपनों पर अपनाते बल, ब्यावरा के गोपाल दुस्तर ने कतरा हूं समंदर हो जाऊंगा, खलील कुरैशी ने तमाम शहर में कोई गुनहगार नहीं, कल्लू खां कुरैशी ने जिसका उसका यह हाल है बेटा-सब की गाड़ी उलाल है बेटा, अरुण आजाद ने रात अंधेरी घटाएं काली हैं- हौसला तो देख मनाते दिवाली हैं, डॉ ओपी साहू ने बापू भारत में आओ तो सूट बूट में आना, केपी भारतीय ने दारू में धुत्तम धुत्त ऐसी भई मैं बिन्ना, कैलाश सोनी डावर ने दीप मिला तब मैंने पूछा हाल कहो दिवाली के ,साजिद हाशमी ने शौहर को किस तरह से सताती हैं बीवियां आदि सुनाईं।

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