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मेरी जिंदगी पढ़ो, अल्फाज में हो बयां वो कहानी नहीं हूं मैं

भास्कर संवाददाता| नरसिंहगढ़ साहित्यिक संस्था महादेवी वर्मा पाठक मंच की पाक्षिक गोष्ठी रविवार को नेहरू...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 07, 2018, 06:40 AM IST

भास्कर संवाददाता| नरसिंहगढ़

साहित्यिक संस्था महादेवी वर्मा पाठक मंच की पाक्षिक गोष्ठी रविवार को नेहरू वाचनालय में आयोजित की गई। गोष्ठी 2 चरणों में रखी गई, जिसके पहले चरण में जिले के प्रसिद्ध साहित्यकार साजिद हाशमी की किताब ‘कतरात’ की समीक्षा की गई। दूसरे चरण में शासकीय पीजी कॉलेज की व्याख्याता डॉ. भावना शर्मा ने हिंदी की प्रसिद्ध लेखिका शिवानी की कहानी तर्पण पर अपने विचार रखे। गोष्ठी की शुरुआत सामूहिक सरस्वती वंदना से हुई। राजगढ़ से से आए वरिष्ठ साहित्यकार कल्लू खां कुरैशी और एके शर्मा ने कतरात के साथ-साथ इसे लिखने वाले लेखक साजिद हाशमी के बारे में भी बताया। एके शर्मा ने बताया कि यह किताब मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी के आर्थिक सहयोग से प्रकाशित हुई है, जिसमें अलग-अलग विषयों पर 750 से ज्यादा शेर हैं। इन्हें विषय के आधार पर 3 हिस्सों में बांटा गया है- मानवीय रिश्ते, भौतिक-प्राकृतिक वस्तुएं और अमूर्त भाव। लेखक साजिद हाशमी के साथ इश्तियाक जैदी ने भी पुस्तक के शेर पढ़कर सुनाए। साजिद हाशमी ने उनके अर्थ बताए। उन्होंने यह भी बताया कि पुस्तक उर्दू में लिखी गई है लेकिन जल्दी ही इस का हिंदी संस्करण भी प्रकाशित होने वाला है। डॉ. ओपी साहू ने कई शेर के हिंदी अनुवाद करके सुनाए। आयोजन में कैलाश सोनी डावर, विनोद कुमार रायसरा, नरेंद्र कुमार शुक्ला, अमर सिंह बीकावत, डॉ. मनींद्र रघुवंशी, अनिल व्यास, प्रह्लाद शर्मा,वाहिद हाशमी, राजेश भारतीय, हरि सिंह परिहार पतंग, टीके शर्मा, मदनलाल मंडवाल शामिल हुए। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान से हुआ। संचालन संतोष शर्मा और आभार प्रदर्शन वल्लभ किशोर शर्मा ने किया।

साहित्य

महादेवी वर्मा पाठक मंच की पाक्षिक गोष्ठी में शिवानी की कहानी और साजिद हाशमी की किताब पर चर्चा हुई।

पाठक मंच की गोष्ठी में राजगढ़ से आए विशेषज्ञों ने समीक्षा की।

स्त्री मन की व्यथा का आईना है शिवानी की कहानी

गोष्ठी के दूसरे चरण में डॉ. भावना शर्मा ने शिवानी की कहानी तर्पण पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि कहानी एक बेटी की अपने दिवंगत परिजनों को मृत्यु के बाद न्याय दिलाने की गाथा है,जिसमें परिस्थितियां उसके सामने उसके माता पिता की मृत्यु के लिए जवाबदार नरपिशाच को लाकर खड़ा कर देती हैं और उसके बाद वह एक बेटी के साथ साथ एक नारी होने का कर्तव्य भी कुछ ही क्षणों के निर्णय में पूरा कर देती है। उन्होंने शिवानी की भाषा-शैली और विषयों के चयन के साथ-साथ उनके जीवन के बारे में भी बताया।

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