दो करोड़ 67 लाख से बनाया गया भवन, सिविल अस्पताल का दर्जा भी मिला लेकिन डाॅक्टर नही ं

Rajgarh News - ब्लाॅक में स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने 2 करोड़ 67 लाख रुपए की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 08:01 AM IST
Jirapur News - mp news building a building of 2 crore 67 lakhs civil hospital status also got but no doctor
ब्लाॅक में स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने 2 करोड़ 67 लाख रुपए की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की बिल्डिंग तो बनाई गई, लेकिन अस्पताल में मरीजों के बेहतर उपचार के लिए डाक्टरों की पूर्ति अब तक नहीं की गई है। हाल ही में प्रदेश सरकार ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सिविल अस्पताल का दर्जा भी दे दिया, लेकिन यहां डाक्टर व चिकित्सा स्टाफ नहीं बढ़ाया गया।

तहसील मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर शासन ने डाक्टरों के 5 पद और महिला चिकित्सक का एक पद स्वीकृत किया था। लेकिन तीन ही डाक्टर कार्यरत है। अब सिविल अस्पताल का दर्जा मिलने पर यहां स्पेशलिस्ट सहित अन्य 9 डाक्टर के पद स्वीकृत किए, लेकिन काम करने वाला वही पुराना स्टाफ ही है। नए पद स्वीकृत होने के बाद भी यहां स्टाफ की पूर्ती नहीं हो सकी। इसके चलते मरीजों को इलाज कराने बाहर जाना पड़ रहा है।

3 डॉक्टरों के भरोसे स्वास्थ्य सेवा : नगरीय इलाके की 25 हजार की आबादी के अलावा क्षेत्र के सवा सौ से भी ज्यादा गांवों के एक लाख लोगों के स्वास्थ्य का जिम्मा मात्र दो डॉक्टर संभाले हुए हैं। अस्पताल में उपचार का तो यह आलम है कि मरीजों का प्राथमिक उपचार भी प्राइवेट रूप से कराना पड़ता है। प्रतिदिन सौ से ज्यादा ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों को नाम मात्र का उपचार भी नहीं मिल पाता है। हाल यह है कि अस्पताल में ज्यादातर भर्ती हुए मरीज तो डाक्टरों के प्रायवेट परचों पर भर्ती रहकर उपचार कराते हैं। महिलाओं को अपना उपचार कराने बाहर जाना पड़ता है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को डाक्टर का परामर्श भी नहीं मिल पाता है।

कम पड़ते हैं डाक्टर

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से सिविल अस्पताल बने इस चिकित्सालय में महिला चिकित्सक सहित छह डाक्टरों के पद स्वीकृत है। वर्षों से दो डॉक्टर ही सवा लाख लोगों के स्वास्थ्य का जिम्मा संभल रहे थे। छह माह पहले ही एक और डॉक्टर नियुक्त हुए हैं। जबकि अस्पताल में प्रतिदिन सौ से ज्यादा मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। जनसंख्या के मान से अस्पताल में तीन-चार डॉक्टरों की और आवश्यकता है।

मरीजों को नहीं मिलती सुविधा :शासन द्वारा भले ही मरीजों को निशुल्क दवाए, भर्ती मरीजों को पौष्टिक खाना सहित अन्य सुविधाएं देने की बड़े बोर्ड लगा रखे हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि मरीजों का सरकारी अस्पताल में नाम मात्र का उपचार होता है। बगैर जांचे परखे ही डॉक्टर पर्चा लिख देते हैं। बाद में वही मरीज उसी डॉक्टर से प्राइवेट उपचार कराता। सुबह करीब 10 बजे तक डॉक्टर ओपीडी में पहुंचते हैं, इस दौरान कई प्राइवेट पर्चे पर भी पहले इलाज होता है।

बैठक में ही खुलता है गहन चिकित्सा कक्ष : शासन ने लाखों रुपए खर्च कर गंभीर रोगियों के लिए गहन चिकित्सा कक्ष बनवाया है। मगर इसका लाभ लोगांे को नहीं मिलर ाह। छोटी-बडी सभी दुर्घटनाओं में घायल लोगों को तत्काल बाहर रेफर कर दिया जाता है। गहन चिकित्सा कक्ष का ताला बैठक के दौरान ही खुलता है। डॉक्टरों की कमी व अस्पताल की समस्याओं को लेकर कई बार शासन-प्रशासन व जनप्रतिनिधियों का ध्यान दिलाया जा चुका है, मगर कोई ध्यान नहीं दे रहा।

दो-तीन डॉक्टरों के भरोसे है नगर सहित गांव के सवा लाख लोगों के स्वास्थ्य का जिम्मा

जल्द ही पदस्थापना की जाएगी


X
Jirapur News - mp news building a building of 2 crore 67 lakhs civil hospital status also got but no doctor
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना