पांच साल में भी किसानों के लिए नहीं खोला 20 लाख रुपए से बना किसान विश्राम गृह

Rajgarh News - खेतों में जी-तोड़ मेहनत मंडी में उपज लेकर आने वाले किसानों को मंडी बोर्ड द्वारा दी जाने वाली सुविधा विश्राम गृह से...

Bhaskar News Network

Mar 17, 2019, 03:20 AM IST
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खेतों में जी-तोड़ मेहनत मंडी में उपज लेकर आने वाले किसानों को मंडी बोर्ड द्वारा दी जाने वाली सुविधा विश्राम गृह से भी वंचित किया जा रहा है। कृषि मंडी परिसर में 20 लाख रुपए की राशि से बनाया गया किसान विश्राम गृह पांच साल में भी किसानों के लिए नहीं खोला गया है। जिससे किसानों को तीखी गर्मी और सर्दी में पेड़-पौधे अथवा अपने ट्रैक्टर-ट्राली आदि वाहनों के नीचे छांव में विश्राम करके अपनी थकान मिटाना पड़ रही है। गौर करने वाली बात तो यह भी है कि किसानों को यह तक पता नहीं है कि उनके लिए विश्राम गृह भी बना हुआ है।

कृषि मंडी में वर्ष 2014 में बनाया गया था। करीब 20 लाख रुपए लागत से बनाया गया विश्राम गृह किसानों के उपयोग में नहीं लाया जा रहा है। पांच साल पूर्व बनने के बाद लगाया ताला आज तक नहीं खुला है। जिससे लाखों रुपए का भवन धूल खा रहा है। हाल यह है कि ताला भी नहीं खोले ला रहे हैं। अंदर के भी सभी कमरों में ताले लटका रखे हैं, जो नहीं खुलने से जंग तक लग गई है।

किसानों की सुविधा के लिए बनाया गया भवन

कृषि मंडी में बारिश के सीजन के कुछ माह छोड़कर 8 से 10 महीने उपज की नीलामी होती है। किसान दूर दूर से अपनी उपज बेचने मंडी पहुंचते हैं। जिन्हें कई बार भीड़ अधिक होने से उन्हें एक से दो दिन मंडी में ही गुजारना पड़ते हैं। वहीं रोजाना सैकड़ों किसान अपनी उपज वाहनों में भरकर लाते हैं। जिन्हें नीलामी के लिए घंटों तक इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में किसानों को विश्राम करने के लिए मंडी बोर्ड द्वारा लाखों रुपए खर्च करके परिसर में विश्राम गृह बनवाए गए हैं। जिससे वे घंटे दो घंटे अथवा रात के समय विश्राम करके अपनी थकान मिटा सकें। लेकिन मंडी प्रबंधन की लापरवाही के चलते यह भवन किसानों के काम आना तो दूर, उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं दी गई है।

पेड़-पौधों के नीचे करते हैं विश्राम : किसान विश्राम गृह नहीं खोलने और इसके बारे में जानकारी नहीं होने से किसान पेड़-पौधों के नीचे छांव में ही विश्राम करते हैं। वहीं कई किसान अपनी उपज के वाहन ट्रैक्टर-ट्राली के नीचे ही परेशानी के बीच में धूप व सर्दी से बचते दिखाई देते हैं। जबकि पूर्व में रात के समय वाहनों के नीचे सोते समय कुचलने से मौत तक हो चुकी हैं। वहीं कई बार देर रात फसल का तौल हो पाता है। ऐसे में उन्हें अपने गांव जाने में जोखिम रहता है, तो उन्हें मंडी में ही रुकना पड़ता है। जहां उन्हें रात गुजारने परेशानी उठाना पड़ती है। लेकिन विश्राम गृह खोलने व उसमें किसानों के लिए लेट-बाथ व पानी के इंतजाम करने की जिम्मेदारी मंडी समित की होती है।

किसानों को नहीं पता क्या है उनके लिए बना विश्राम गृह

किसानों ने विश्राम गृह के बारे में बताया कि हमें इसका पता नहीं है। किसान विनोद टपरियाहेड़ी, घनश्याम धतरावदा, रंगलाल कायरी, बीरमसिंह वर्मा, गोकुल प्रसाद दांगी, जीतमल, रुगनाथ किशनलाल सहित अन्य किसानों ने बताया की मंडी में कई सालों से उपज बेचने आ रहे हैं। लेकिन किसी ने नहीं बताया कि यहां उनके लिए विश्राम गृह भी बना है। उन्होंने कहा कि विश्राम गृह को हमारे लिए उपयोग में क्यों नहीं लाया जाता। उन्होंने मंडी समिति की इस लापरवाही की शिकायत मंडी बोर्ड और वरिष्ठ अधिकारियों से की जाएगी।

किसानों ने कहा विश्राम गृह क्यों नहीं खोला जा रहा, मंडी बोर्ड से करेंगे शिकायत

विश्राम गृह के सामने उपज की नीलामी के लिए खड़े किए जाते हैं ट्रैक्टर-ट्राली।

मैं पांच-सात दिन पूर्व ही आया हूं


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