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मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान की तरह हमें भी अपना जीवन मर्यादित बनाना होगा : आरती दीदी

2 वर्ष पहले
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श्रीमद् भागवत गीता कार्यक्रम में शामिल हो रहे गणमान्य नागरिक

भास्कर संवाददाता | तलेन

चार युग हैं। सतयुग, त्रेता युग, द्वापर युग और कलयुग। सतयुग के प्रथम महाराजा भगवान श्रीकृष्ण थे। उन्होंने आठ जन्म लिए। इसलिए हम कृष्ण जन्माष्टमी मनाते हैं। नवां जन्म त्रेतायुग में श्रीराम का जन्म होने पर हम रामनवमी मनाते हैं। हमारा सारा जीवन ही एक रामायण है। जैसे रामजी को मर्यादा पुरुषोत्तम दिखाया गया है। वैसे हमें भी अपने जीवन में मर्यादित रहना है। जिस प्रकार से सीता के अंदर पवित्रता की शक्ति थी, उसी प्रकार से हमें भी अपने विचारों को शुद्ध और पवित्र बनाए रखना है। जिससे आत्मा रूपी सीता की रक्षा हो सके। मनुष्य रूपी रावण के अंदर की कमी, कमजोरी, बुराई एवं विकार हैं। इसलिए रावण को 10 शीश दिखाए जाते हैं। यह विचार योग शक्ति आरती दीदी ने श्रीमद्भागवत गीता के पांचवे दिन व्यक्त किए। इस अवसर पर टीआई कैलाश भारद्वाज, ओम प्रकाश भट्टर, प्रीतम, लक्ष्मी दीदी अादि मौजूद रहे।

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