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जंगली सूअर के हमले में ग्रामीण गंभीर घायल, गर्दन की हड्डी टूटी
जंगली सूअर के हमले में शुक्रवार सुबह एक ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हाे गया। उसे इलाज के लिए सिविल मेहताब अस्पताल लाया गया। जहां से हालत गंभीर हाेने की वजह से भाेपाल रैफर किया गया। घायल दाैलतराम पुत्र चतुर्भुज अपने खेत में बैठे थे। तभी सुबह करीब 9 बजे उनपर जंगली सूअर ने अचानक हमला कर दिया। उसने उनकी गर्दन पर हमला किया। दाैलतराम के चीख-पुकार सुनकर अासपास के खेताें में काम कर रहे लाेग माैके पर पहुंचे अाैर सूअर काे खदेड़कर उन्हें बचाया और इलाज के लिए सिविल मेहताब अस्पताल पहुंचाया। सूअर के हमले से उनकी गर्दन की हड्डी में ज्यादा चोट पहुंची है। इस वजह से उन्हें गंभीर हालत में इलाज के लिए भाेपाल रैफर किया गया।
जंगली सूअर के शरीर पर कड़े बाल होते हैं। इसका रंग धूसर, काला या भूरा होता है। कंधे तक इसकी ऊंचाई 90 सेमी तक होती है। अकेले रहने वाले बूढ़े नरों को छोड़कर, जंगली सूअर झुंडों में ही निवास करते हैं। ये तेज, रात में विचरण करने वाले, सर्वभक्षी और अच्छे तैराक भी होते हैं। इनके दांत पैने और बाहर की ओर निकले होते हैं। हालांकि यह आक्रामक जानवर नहीं है, फिर भी खतरनाक साबित हो सकता है। आजकल नरसिंहगढ़ क्षेत्र के जंगलों में ईको सिस्टम की फूड चेन टूट जाने से जंगली सूअर जैसे जानवर बढ़ रहे हैं। यह जंगल से सटे गांवों के लोगों के लिए परेशानी का कारण भी बन रहे हैं।
मौसम बदलने से भोजन और पानी की तलाश में आबादी वाले इलाकों में आ रहे जंगली जानवर
जंगल में इन दिनों पानी की कमी होने लगी है। वहीं खाद्य श्रंखला के टूट जाने से भोजन की भी कमी है। जंगल में भोजन-पानी न होने से जंगली जानवर इसकी तलाश में गांवों की ओर रुक कर रहे हैं। ऐसे में जाने-अनजाने उनका सामना ग्रामीणों से हो जाता है। कई बार डर और बचाव में जंगली जानवर इंसान पर हमला कर देते हैं। इसमें लोग घायल हो जाते हैं।
एक साल पहले सूअर ने भट्टी पर काम कर रही महिला काे भी गंभीर घायल किया था
इसके पहले वर्ष 2019 में शहरी क्षेत्र से सटे एक ईंट भट्टे पर काम कर रही श्रमिक महिला जानकी बाई पर भी जंगली सूअर ने हमला कर दिया था।
उस घटना में भी अन्य लाेगाें ने बड़ी मुश्किल से महिला काे सूअर के चंगुल से छुड़ाया था। घटना में महिला के शरीर का अधिकांश हिस्सा बुरी तरह घायल हाे गया था अाैर कई महीनाें के इलाज के बाद महिला स्वस्थ्य हाे सकी थी। बाद में उसी सूअर ने शहरी क्षेत्र में मवेशियाें के बाड़े में भी हमले की काेशिश की थी। जिसे स्थानीय लाेगाें ने मार डाला था। जांच में खुलासा हुअा था कि सूअर पागल हाे गया था।
5 साल पहले भी सूअराें के हमले में मारा गया था एक युवक
वर्ष 2014 में संजय नगर क्षेत्र में एक बीमार युवक अपने घर से थाेड़ी दूरी पर मृत पाया गया था। प्रत्यक्षदर्शियाें ने सूअराें के झुंड काे उसे नाेंचकर खाते देखा था। बाद में फाेरेंसिक रिपाेर्ट में पुष्टि हुई थी कि उस युवक पर हमला करने वाले जंगली सूअर थे। जंगली सूअराें के हमलाें की अधिकतर घटनाएं उन्हीं क्षेत्राें में हाेती हैं, जाे वन्य क्षेत्र से सटे हाेते हैं।
असामान्य परिस्थितियों में ही हमला करता है जंगली सूअर: वन विभाग
अपनी अाेर से इलाज में हम पूरी सहायता कर रहे हैं
-दिलीप कुमार उपाध्याय, रेंजर, वन विभाग, नरसिंहगढ़।