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जो वाहन नंबर दिए वो रजिस्टर्ड ही नहीं, कागजों में बांटा गरीबों का गेहूं

जोधपुर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) व्यवस्था में गरीबों का गेहूं कागजों में ऐसे वाहनों से बांटा जा रहा था...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 03:05 AM IST

जोधपुर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) व्यवस्था में गरीबों का गेहूं कागजों में ऐसे वाहनों से बांटा जा रहा था जो कहीं अस्तित्व में ही नहीं थे। एसीबी की जांच में यह सामने आया है कि गरीबों का गेहूं डकारने वालों ने जो वाहन नंबर बताए थे उनमें से ज्यादातर तो कहीं भी रजिस्टर्ड नहीं हैं। काबिलेगौर है कि जोधपुर जिले में 35 हजार क्विंटल राशन के गेहूं का घोटाला सामने आया है। अकेले मार्च 2017 में ही जिन पांच वाहनों से 1500 क्विंटल गेहूं की सप्लाई किए जाने का हवाला दिया गया था, एसीबी की जांच में वो पांचों वाहन फर्जी मिले हैं। एफसीआई गोदाम से लेकर डीलर तक इस गेहूं की सप्लाई का काम स्वरूपसिंह राजपुरोहित नाम ठेकेदार के पास था।

एसीबी ने अक्टूबर 2017 में जब ठेकेदार स्वरूपसिंह के घर, ऑफिस और आटा मिल में दबिश दी, तो वहां से इस घोटाले से जुड़े ये अहम कागजात मिले। एसीबी ने जब इन दस्तावेजों की छानबीन की तो फर्जी वाहनों से गेहूं बांटने के इस घोटाले का खुलासा हुआ। स्वरूपसिंह को एसीबी ने गिरफ्तार कर लिया है। इसमें निलंबित आईएएस निर्मला मीणा की मिलीभगत बताई जा रही है।

रियलिटीचैक

जोधपुर के डीएसओ कार्यालय में गरीबों के गेहूं के घोटाले की जांच कर रही एसीबी ने किए चौंकाने वाले खुलासे

यह है वाहनों की हकीकत, जिनसे गेहूं बांटना बताया गया

1. आरजे 19 जीए 3502 : एसीबी ने जब परिवहन विभाग से इस वाहन की डिटेल खंगाली तो यह वाहन नंबर रजिस्टर्ड होना नहीं पाया गया। अर्थात सप्लाई के लिए फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबर का इस्तेमाल किया गया।

2. आरजे 21 जी सी 5002 : जिला परिवहन अधिकारी नागौर से जब इस नंबर की जानकारी ली गई तो इस नंबर से कोई भी वाहन रजिस्टर्ड होना नहीं पाया गया। फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबर दिया गया।

3. आरजे 19 जी सी 9360 : यह टाटा टैंपो है। इसका मालिक कल्याण गिरी हैं, जो जयपुर रहते हैं।

4. आरजे 19 जीई 2677 : जोधपुर आरटीओ से रजिस्टर्ड इस गाड़ी का मालिक बाड़मेर निवासी अमीन खान है। एसीबी की पूछताछ में अमीन ने बताया कि उसकी गाड़ी से कभी एफसीआई गोदाम से कहीं भी गेहूं की सप्लाई नहीं हुई है।

5. आरजे 19 जी सी 0257 : आरटीओ जोधपुर से जब इस संबंध में एसीबी ने पता किया तो इस ट्रक का मालिक जोधपुर निवासी जब्बरसिंह निकला। जब्बरसिंह ने पूछताछ मे एसीबी को बताया कि जिस समय उसके ट्रक से गेहूं सप्लाई दिखाई गई है उस दौरान उसका ट्रक गुजरात गया हुआ था।

ऐसे हुआ घोटाला

आईएएस निर्मला मीणा ने मार्च 2016 में जोधपुर में 3300 परिवारों के बढ़ने का हवाला देते हुए 35000 क्विंटल गेहूं का अतिरिक्त आवंटन सरकार से करवा लिया। जिला में गेहूं का आवंटन डीएसओ करता है। मीणा ने इस गेहूं का वितरण डीलर को करना बता दिया और स्टाक रजिस्टर में डीलरों से फर्जी साइन तक कर दिए गए। एसीबी ने डीलरों से पूछताछ की तो उन्होंने गेहूं उनके पास आने से साफ इंकार किया।

अपने ही सवालों में उलझ गई आईएएस मीणा

फरार चल रही आईएएस निर्मला मीणा ने 35 हजार क्विंटल गेहूं के अतिरिक्त आंवटन के लिए पहले नगर निगम की रिपोर्ट का हवाला दिया। जब एसीबी ने एसडीएम की रिपोर्ट दिखाई, जिसमें केवल 18 परिवार ही बढ़ने की बात कही गई थी। तब मीणा ने सितंबर 2015 में लैप्स हुए गेहूं का आवंटन बताते हुए वितरण करने की बात कही। जबकि सितंबर 2015 से प्रदेश में पोस मशीन शुरू कर दी गई थी। उस दौरान जो गेहूं वितरण से रह गया उसका अलॉटमेंट लैप्स हो चुका था।

आटा मिल मालिकों को गेहूं 12 रुपए किलो में बेचा

सार्वजनिक वितरण प्रणाली के यह गेहूं गरीबों को सरकार डेढ़ रुपए किलो में देती है। डीएसओ ने इस गेहूं को गेहूं सप्लाई करने वाले ठेकेदार के माध्यम से आटा मिल पहुंचा दिया। इस प्रकार 3 करोड़ 67 लाख रुपए का घोटाला किया गया।

यह एक बहुत बड़ा गेहूं घोटाला है। इसमें जो गेहूं गरीबों को मिलने चाहिए थे वो सीधे आटा मिलों में पहुंच गया। अब तक की जांच- पड़ताल में 35,000 क्विंटल गेहूं का घपला तो सामने आ चुका है। अभी इस मामले में और पड़ताल की जा रही है। -अजयपाल लांबा, पुलिस अधीक्षक, एसीबी जोधपुर

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