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रतलाम. जिला अस्पताल में एक यूनिट रक्त के बदले 1900 रुपए लेने का मामला सामने आया। दुर्घटनाग्रस्त पिता के लिए इसी युवक को जब एक और यूनिट रक्त की जरूरत पड़ी तो दलाल ने 1800 रुपए मांग लिए। इस तरह आरोपी ने अस्पताल में उपलब्ध फ्री खून के लिए 3700 रुपए ले लिए।
जिला अस्पताल में तीन दिन से धार के दोतरियाखेड़ा गांव के बद्री वसुनिया भर्ती थे। बद्री दुर्घटना में घायल हो गए थे, ऐसे में उन्हें रक्त की जरूरत थी। बद्री के पुत्र मानसिंह ने बताया शनिवार को डॉक्टर ने बी पॉजीटिव रक्त चढ़ाने काे कहा। कुछ देर बाद पीरू पिता नानूराम वहां पहुंचे और मां सायरी वसुनिया को 1900 रु. में रक्त दिलवाने की बात कही। मां ने 1900 रुपए दे दिए व रक्त भी मिल गया। रविवार को फिर डॉक्टर ने कहा कि एक और यूनिट रक्त लगेगा। ऐसे में पीरू से संपर्क किया तो उन्होंने 1800 रुपए में रक्त दिलवाने का कहा। मैंने उन्हें 1800 रुपए दे दिए, इसी दौरान डेलनपुर के पूर्व सरपंच मोहनलाल को फोन लगाया। मोहनलाल ने पलसोड़ा के रक्तमित्र कचरु राठौड़ से संपर्क किया। इस पर ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. योगेश नीखरा, रक्त मित्र राजेश पुराेहित, दिलीप भंसाली भी पहुंचे व नाराजगी जताई। स्टेशन रोड थाने पर सूचना देकर दलाल काे पुलिस के हवाले किया।
ब्लड बैंक ही नहीं... ऑपरेशन, एम्बुलेंस के लिए भी घूमते रहते हैं दलाल
ट्रामा सेंटर : यहां दलाल खुद को एजेंट बताते हैं। अस्पताल के ट्रामा सेंटर में रॉड, स्क्रू की कमी बनी रहती है, ऐसे में ऑपरेशन के वक्त मरीज को बाहर से ही लाना होता है, ये दलाल इन मरीजों को रॉड व स्क्रू उपलब्ध करवा देते हैं। 23 अक्टूबर को दलाल व मरीज के परिजन के बीच विवाद भी हो गया था। इसमें ऑपरेशन के बाद दलाल ने पैर से रॉड वापस निकाल लेने तक की धमकी दे दी थी। मामला सिविल सर्जन व डिप्टी कलेक्टर तक भी पहुंचा था। मार्च मे दो मामले सामने आए थे, इनमें दलाल व परिजन के बीच विवाद हुआ था।
ऐसे कर सकते हैं अस्पताल में दलालों पर सख्ती
मेरी जानकारी में नहीं है
ब्लड बैंक से रक्त दिलाने के लिए रुपए मांगने का मामला सामने आया है।
- यह मामला अभी मेरी जानकारी में नहीं है।
अस्पताल में दलाल सक्रिय हैं, क्या आपको पता है।
- ये बात सही है कि दलाल सक्रिय हैं, पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं। हमारी ब्लड बैंक की टीम दलालों को पहचान लेती है, ज्यादातर मामलों में पकड़ लेते हैं।
ऐसे मामले पहले भी सामने आए हैं, एफआईआर क्यों नहीं करवाते।
- हम दलाल को पकड़कर पुलिस के हवाले कर देते हैं। आगे कार्रवाई पुलिस करती है।
मरीज को ठगने से बचाने के लिए क्या करेंगे।
-हम तो लगातार कोशिश करते हैं, इसमें मरीजों के परिजन को भी सतर्क रहना होगा। कई बार मामले हम तक पहुंच ही नहीं पाते हैं। स्टाफ को अलर्ट करेंगे।
ऑपरेशन से लेकर रेफर के मामलों में भी सक्रिय हैं दलाल, परिजन से विवाद भी हो चुके
एम्बुलेंस : मरीज को निजी एम्बुलेंस दिलवाने के लिए जिला अस्पताल में सबसे ज्यादा दलाल सक्रिय हैं। ये दलाल वार्डों के साथ ही अस्पताल परिसर में घूमते रहते हैं। ये ऐसे मरीजों को ढूंढते है जोकि रेफर हो चुके हैं, एम्बुलेंस को बुलवाना चाहते हैं। ऐसे में मरीजों को एम्बुलेंस लाने की बात कहते हैं व सौदा कर लेते हैं। कार्डियक एम्बुलेंस के लिए तो यह सौदा 15 से 18 हजार रुपए तक भी होता है।
ब्लड बैंक : यहां दलाल का काम होता है कि वह मरीज काे ब्लड बैंक के अंदर तक नहीं पहुंचने दें। दलाल खुद ही रक्त का इंतजाम करता है। ऐसे मामलों में ज्यादातर दलाल ऐसे मरीज को ढूंढते हैं, जो गांव से आए हों और उनके साथ ज्यादा लोग नहीं हो। दलाल सीधे मरीज से मिलकर रक्त के बदले रुपए देने की बात कहते हैं।
रक्तमित्रों ने ही किया था खुलासा- ऐसा ही मामला जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में 6 महीने पहले भी सामने आया था। इसमें जरूरतमंद को रुपए देने के बदले एक युवक ने रुपए मांगे थे। अस्पताल के रक्त मित्रों ने दलाल को रंगेहाथों भी पकड़ा था। हालांकि, इस मामले में किसी ने शिकायत नहीं की थी।
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