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चार सीट जो मुख्यमंत्री बन जाने के कारण खाली हुईं

सीट फिर से उनकी पार्टी टीडीपी ने जीती। योगी के बाद यह सीट कांग्रेस ने जीत ली। कैप्टन के बाद भी यहां कांग्रेस का...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 05:35 AM IST

चार सीट जो मुख्यमंत्री बन जाने के कारण खाली हुईं
सीट फिर से उनकी पार्टी टीडीपी ने जीती।

योगी के बाद यह सीट कांग्रेस ने जीत ली।

कैप्टन के बाद भी यहां कांग्रेस का कब्जा।

सोनोवाल हटे, लेकिन अब भी भाजपा जीती।

अब कॉनराड संगमा के मेघालय का और नेफियू रियो के नगालैंड का मुख्यमंत्री बनने से तुरा और नगालैंड सीटें खाली होंगी।

दो-दो सीटें जो मोदी और मुलायम ने जीतीं

प्रधानमंत्री
मोदी ने लोकसभा चुनाव के दौरान गुजरात के वडोदरा तथा उत्तरप्रदेश के वाराणसी से चुनाव लड़ा। वे दोनों सीटों पर जीते। बाद में उन्होंने वडोदरा सीट छोड़ दी। मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी और आजमगड़ से चुनाव लड़ा था। बाद में मैनपुरी सीट छोड़ दी।

पार्टी सिर्फ ये 4 सीट रख पाई बरकरार

1. वडोदरा गुजरात की यह लोकसभा सीट नरेंद्र मोदी के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। उनकी जगह इस सीट से रंजनबेन भट्‌ट ने उपचुनाव लड़ा और कांग्रेस के अपने प्रतिद्वंद्वी को 3 लाख 29 हजार 507 वोटों के अंतर से हराया।

तेलंगाना में चंद्रशेखर राव ने मेडक सीट छोड़ी।

उत्तरप्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर सीट छोड़ी।

पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अमृतसर सीट छोड़ी।

असम में सर्बानंद सोनोवाल ने लखीमपुर सीट छोड़ी।

ये 4 सीट कांग्रेस ने छीन ली

1. रतलाम भाजपा के दिलीपसिंह भूरिया के निधन (2015) के बाद मप्र की इस सीट पर बेटी निर्मला लड़ीं। वे कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया से 88 हजार मतों से हार गईं।

4. अजमेर अगस्त 2017 में भाजपा सांसद सांवरलाल जाट के निधन के बाद भाजपा ने रामस्वरूप लांबा को टिकट दिया। वे कांग्रेस के रघु शर्मा से 84 हजार से ज्यादा वोटों से हार गए।

ये 2 सीट समाजवादी पार्टी के खाते में गईं

1. गोरखपुर यूपी की यह सीट योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद खाली हुई थी। अब यहां से समाजवादी पार्टी के प्रवीण निषाद 21 हजार 881 वोटों से जीते हैं।

2. फूलपुर उत्तरप्रदेश की यह सीट भाजपा के केशव प्रसाद मौर्य के उप-मुख्यमंत्री बनने के बाद खाली हुई थी। उपचुनाव में सपा के नागेंद्र सिंह पाल 59 हजार वोटों से जीते हैं।

यहां चुनाव बाकी उत्तरप्रदेेश की कैराना, महाराष्ट्र की पालघर तथा गोंदियां सीट जो 2014 में बीजेपी के खाते में थीं, खाली हैं। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में अनंतनाग सीट खाली है। नगालैंड की एकमात्र सीट और मेघालय में तुरा सीट खाली हुई हैं।

इस तरह सीमा रेखा पर आ गई है सबसे बड़ी पार्टी

282

लोकसभा सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में आई थीं, 2014 के लोकसभा चुनावों में।

-हालांकि सरकार को खतरा नहीं, भाजपा की 273 और सहयोगी दलों की मिलाकर एनडीए के पास 315 सीट हैं।

2. बीड महाराष्ट्र की यह सीट भाजपा नेता गोपीनाथ मंुडे के सड़क हादसे में निधन के बाद खाली हुई थी। यहां से मुंडे की छोटी बेटी प्रीतम ने चुनाव लड़ा। उन्हें 71% से ज्यादा ‌वोट मिले। कांग्रेस के उम्मीदवार से 6 लाख 69 हजार 321 वोट ज्यादा।

2. गुरदासपुर पंजाब में भाजपा की यह सीट अभिनेता विनोद खन्ना के निधन(2017) के बाद खाली हुई। कांग्रेस के सुनील जाखड़ 1.93 लाख वोटों से जीते।

273

लोकसभा सीटें हैं अब बीजेपी के पास। यानी बहुमत के आंकड़े से सिर्फ 1 सीट ज्यादा।

3. लखीमपुर इस सीट से बीजेपी के सर्बानंद सोनोवाल सांसद चुने गए थे। 2016 में असम का मुख्यमंत्री बनने के लिए उन्होंने सीट छोड़ी। पार्टी ने प्रधान बरुआ को टिकट दिया वे कांग्रेस के प्रत्याशी से 190219 मतों के अंतर से जीते।

जहां गठबंधन में भाजपा, वहां 1 बरकरार, 1 हारी

1. तुरा मेघालय की यह सीट नेशनल पिपुल्स पार्टी के पीए संगमा की थी। 2016 में उनके निधन के बाद बेटे कॉनराड ने इसे 137285 मतों के अंतर से जीता।

2. श्रीनगर पीडीपी ने तारीक हमीद करार के इस्तीफे के बाद नजीर अहमद को टिकट दिया। वे नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला से 10 हजार वोटों से हार गए।

3. अलवर 2017 में भाजपा सांसद महंत चांदनाथ के निधन के बाद पार्टी के जसवंतसिंह यादव लड़े। वे कांग्रेस के करणसिंह यादव से 1.96 लाख वोटों से हरा गए।

09

सीटें घटीं। 6 भाजपा हारी। पार्टी की 3 सीट (कैराना, पालघर तथा गोंदिया) खाली हो गई हैं।

4. शहडोल भाजपा के दलपत सिंह परसते के निधन के बाद मध्यप्रदेश की यह सीट रिक्त हुई थी। पार्टी ने यहां से ज्ञान सिंह को टिकट दिया। ज्ञान सिंह यहां करीबी मुकाबले में कांग्रेस के हिमांद्री सिंह से 60 हजार वोटों से जीते।

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