• Home
  • Mp
  • Ratlam
  • शहर कांग्रेस ने पदाधिकारियों के नाम भोपाल भेजे, जिला कांग्रेस के तय नहीं
--Advertisement--

शहर कांग्रेस ने पदाधिकारियों के नाम भोपाल भेजे, जिला कांग्रेस के तय नहीं

शहर कांग्रेस में बूथ से लेकर ब्लॉक तक के पदाधिकारियों के नाम तय कर जिला प्रभारी ने भोपाल भेज दिए हैं लेकिन जिला...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 07:20 AM IST
शहर कांग्रेस में बूथ से लेकर ब्लॉक तक के पदाधिकारियों के नाम तय कर जिला प्रभारी ने भोपाल भेज दिए हैं लेकिन जिला कांग्रेस में अभी तक पदाधिकारियों के नाम तय नहीं हो पाए हैं। इसका कारण कांग्रेसियों का आपस में समन्वय नहीं हो पाना सामने आया है।

कांग्रेस के संगठन को मजबूत करने के लिए गुजरात के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को जिला प्रभारी बनाकर महीनेभर पहले से रतलाम भेज रखा है। जिला प्रभारी अल्केश दवे व धीरूभाई पटेल को 24 फरवरी को बूथ से लेकर ब्लॉक तक के पदाधिकारियों के नाम तय कर सूची प्रदेश कांग्रेस कमेटी को देना थी। दोनों ही 24 फरवरी को भोपाल नहीं पहुंचे। इसके बाद 27 फरवरी को जिला प्रभारी अल्केश दवे ने शहर कांग्रेस के 257 बूथों पर अध्यक्ष, 25 सेक्टर, 12 मंडलम् और 4 ब्लॉकों में अध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारियों की सूची बनाकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी भोपाल को सौंप दी लेकिन जिला प्रभारी धीरूभाई पटेल अभी तक जिले के बूथ से लेकर ब्लॉक तक के पदाधिकारियों के नाम तय नहीं कर पाए। इसका कारण कांग्रेसियों में समन्वय नहीं बन पाना है। शहर कांग्रेस ग्रामीण जिला में 1300 बूथ, 16 ब्लॉक, 32 मंडलम् और 96 सेक्टर बनाए गए हैं लेकिन अभी तक इनके अध्यक्ष तय नहीं हो पाए हैं।

समन्वय बना रहे हैं ताकि बाद में दिक्कत नहीं हो

जिला प्रभारी धीरूभाई पटेल ने बताया मैं सभी कांग्रेसियों के साथ मिलकर समन्वय बनाकर पदाधिकारियों के नाम तय कर रहा हूं। ताकि बाद में दिक्कत नहीं आए। वैसे सूची तो 24 फरवरी तक ही भेजना थी लेकिन प्रदेश पदाधिकारियों से समय लिया है। हम जल्दी ही सूची सौंप देंगे। सभी वरिष्ठ कांग्रेसियों से चर्चा की जा रही है। जल्द ही निर्णय लेंगे।

किसान कांग्रेस जुटी सत्ता में बदलाव यात्रा की तैयारी में

जिला किसान कांग्रेस के अध्यक्ष रामचंद्र धाकड़ ने बताया किसान कांग्रेस इस महीने सत्ता में बदलाव यात्रा निकालने की तैयारी कर रही है। जल्दी ही तारीख तय की जाएगी। इसमें यात्रा हर गांव जाकर बताएगी कि किस तरह सरकार खेती को लाभकारी धंधा बनाने के बजाय आंदोलन करने वाले किसानों को गोली मार रही है। अब किसानों का समय आ गया है कि वे गोली का जवाब मतदान के जरिए दें।