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प्रदेश में पहली बार एमवायएच में दूरबीन पद्धति से बिना चीर-फाड़ के थायराइड ग्रंथि का ट्यूमर निकाला

प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल (एमवायएच) में दूरबीन पद्धति से बिना चीर-फाड़ के थायराइड ग्रंथि का ट्यूमर निकाला...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 04:50 AM IST

प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल (एमवायएच) में दूरबीन पद्धति से बिना चीर-फाड़ के थायराइड ग्रंथि का ट्यूमर निकाला गया। एमवायएच प्रशासन का दावा है कि प्रदेश में ऐसा पहली बार हुआ है। अभी तक ऐसा ऑपरेशन प्रदेश के किसी भी निजी या सरकारी अस्पताल में नहीं हुआ है। एमवायएच प्रशासन के अनुसार इस सर्जरी के साथ ही मिनिमल इनवेसिव सर्जरी में नया कीर्तिमान स्थापित हुआ है। भागीरथपुरा निवासी मरीज सावित्री (उम्र 39 साल) को गले में गांठ के दर्द के चलते भर्ती किया गया था। उस समय मरीज को बेहद ज्यादा दर्द था। सोनोग्राफी एवं टुकड़े की जांच में थायराइड नोड्यूल की बात सामने आई। डॉ. अरविंद घनघोरिया और उनकी टीम ने इलाज मिनिमल इनवेसिव सर्जरी के द्वारा दूरबीन पद्धति से सीधे हाथ की अक्जिला के जरिए करने का निर्णय लिया। तीन घंटे ऑपरेशन के बाद महिला मरीज पूरी तरह ठीक हो गई। टीम में एनेस्थीसिया विभाग की प्रोफेसर डॉ. मनीष बंजारे भी शामिल थीं।

बीमारी आम, इलाज जटिल

डॉ. घनघोरिया के अनुसार थायराइड ग्रंथि में ट्यूमर एक आम बीमारी है, जो सामान्य तौर पर महिलाओं में ज्यादा होती है। इसके चलते गले में दर्द की सबसे ज्यादा शिकायत रहती है। आवाज में बदलाव और खाना खाने में भी दिक्कतें होती हैं। डॉ. घनघोरिया के मुताबिक, महिला काे गले में सूजन और हार्मोंस का स्तर बदलने जैसी तकलीफ थी। महिला की जल्द ही छुट्टी भी हो जाएगी। दर्द भी नहीं होगा। ऐसी परिस्थिति में मरीज की थायराइड ग्रंथि का कुछ या पूरा हिस्सा निकालना पड़ता है। पहले गर्दन पर चीरा लगाकर यह ऑपरेशन होता था। इस कारण मरीज के शरीर में निशान रह जाते थे। इससे मरीज के खून का रिसाव और नसों पर विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका रहती थी।

5 लाख होता है खर्च, एमवायएच में मुफ्त इलाज

डॉक्टरों के अनुसार, सामान्य तौर पर देश में कुछ ही जगह यह सर्जरी होती है। इस पर 4 से 5 लाख रुपए खर्च होता है। एमवायएच में यह नि:शुल्क है। पांच साल से प्रबंधन इस इलाज के लिए सुविधाएं जुटा रहा था।

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