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दो मंजिल और बनने के बाद उस क्षेत्र की सबसे ऊंची होटल हो गई थी, फिर भी निगम अफसरों को यह नजर नहीं आया

10 लोगों की जान लेने वाली एमएस होटल में अवैध तरीके से दो मंजिल और बनाने का काम रात के समय होता था। जर्जर हो चुकी इमारत...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 04:55 AM IST

दो मंजिल और बनने के बाद उस क्षेत्र की सबसे ऊंची होटल हो गई थी, फिर भी निगम अफसरों को यह नजर नहीं आया
10 लोगों की जान लेने वाली एमएस होटल में अवैध तरीके से दो मंजिल और बनाने का काम रात के समय होता था। जर्जर हो चुकी इमारत में अवैध तरीके से दो मंजिल और बनने के बाद वह सरवटे क्षेत्र की सबसे ऊंची बिल्डिंग बन गई थी, लेकिन निगम के अफसरों को नजर नहीं आया। उधर भोपाल से बचाव दल के मौके पर पहुंचने से पहले ही मलबा उठा लिया गया था। प्रशासन ने हादसे में मृत लोगों के परिजन को दो-दो लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है, घायलों का उपचार मुफ्त किया जाएगा। घटना की न्यायिक जांच के साथ ही निगम भी जांच करवाएगा। हादसे के बाद से होटल संचालक शंकर परवानी फरार है। उस पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया है।

शंकर परवानी होटल मालिक

एमएस होटल हादसा ... और इसके पीछे की हकीकत

होटल मालिक रात में करता था अवैध निर्माण

दिन में सरवटे बस स्टैंड के आसपास ट्रैफिक ज्यादा रहता है, इसलिए होटल मालिक शंकर परवानी ने अवैध निर्माण रात में किया। दिन में काम करने पर अवैध निर्माण नजर में भी आ सकता था। धीरे-धीरे काम करवाकर उसने दो मंजिल जर्जर हो चुकी होटल पर और बना दी थी।

बगैर पिलर की होटल, दीवारें थीं खोखली

स्थानीय रहवासियों का कहना है कि एमएस होटल की बिल्डिंग बरसों पर पुरानी थी। उस समय पिलर बनाकर निर्माण नहीं होता था। मोटी-मोटी दीवारें बनाकर बिल्डिंग बनाई जाती थी। दीवारें खोखली हो चुकी थी।

होटल संचालक नहीं लेते निर्माण की परमिशन

सरवटे बस स्टैंड के आसपास कोई भी होटल संचालक या दुकानदार ने नई बिल्डिंग बनाने के लिए परमिशन नहीं ली है, जबकि सबके प्रतिष्ठान नए हो चुके हैं। नई परमिशन लेने पर उन्हें पार्किंग के लिए प्लॉट का 50 फीसदी हिस्सा पार्किंग के लिए छोड़ना पड़ता।

जमींदोज हो गई 80 साल पुरानी इमारत

पान वाले की बात मान सतर्क हो जाते तो बच जाती 10 जिंदगी

होटल एमएस की दीवार दिन में ही धंस गई थी। इस बारे में एक पान दुकान संचालक प्रमोद जैन ने होटल मालिक को आगाह भी किया था। समय रहते उसकी बात पर गौर किया जाता तो 10 जिंदगियां बच जातीं। होटल मालिक परवानी के खातीवाला टैंक स्थित घर पर पुलिस पहुंची तो पता चला वह प|ी और दो लड़कों के साथ घर पर ताला लगाकर भाग गया है।

मलबा हटाने की ऐसी जल्दी, मलबे पर चढ़ा दी थी आठ जेसीबी

निगम को होटल गिरने के बाद मलबा हटाने की इतनी जल्दी थी कि आठ जेसीबी मलबे पर चढ़ा दी थी। जबकि किसी को पता नहीं था कि मलबे के अंदर कितने लोग दबे हुए हैं। एक शव सबसे आखिरी में तो ऐसा निकला था जिसे पोटली में बांधकर एमवाय अस्पताल पहुंचाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने इतने जेसीबी चलाने पर एतराज भी जताया था।

भीतर ही भीतर दो मंजिलें तोड़कर बना दी, बीओ, बीआई को पता भी नहीं चला

सरवटे जैसा इलाका कैसे चूक गया

नगर निगम में नक्शा मंजूरी, अवैध निर्माण रोकने के लिए खतरनाक भवनों की निगरानी के लिए जोन स्तर पर बिल्डिंग अफसर, बिल्डिंग इंस्पेक्टर नियुक्त हैं, इनके अधीन जोन का पूरा स्टाफ रहता है। सरवटे बस स्टैंड जैसे इलाके में इनमें से किसी को नहीं दिखा कि होटल की इमारत जर्जर हो रही है।

सर्वे सूची में होटल क्यों नहीं आई?

हर साल मानसून के पहले जोनवार पुराने भवनों का स्ट्रक्चरल सर्वे होता है। खतरनाक भवनों की सूची में ये होटल क्यों नहीं आई। ये दूसरी बार अनंत चतुर्दशी के समय भी होता है, तब भी अफसरों की नजरों से कैसे चूक गई।

इतना बड़ा निर्माण कैसे अछूता रहा?

गली-मोहल्ले के छोटे से निर्माण में बीओ, बीआई नोटिस देने पहुंच जाते हैं, चार मंजिला इमारत में ऊपरी दो मंजिलें तोड़कर फिर से बनाई, तल मंजिल पर बदलाव होते रहे, मटेरियल आया, पर किसी ने नोटिस तक नहीं दिया।

मालिक बदले, फिर भी नजरअंदाज किया

40 साल में इसके चार-पांच बार मालिक बदले। हर बार रजिस्ट्री के बाद निगम के संपत्तिकर विभाग में नामांतरण हुआ होगा। तब अफसरों ने नक्शे, निर्माण को लेकर जांच नहीं की।

नहीं मिली निगम को कभी शिकायत

सामने वाली दिलीप होटल की कई शिकायतें हुईं,लेकिन एमएस होटल की निगम को कोई शिकायत नहीं मिली।

निगम में फाइल को लेकर चलती रही मशक्कत

रविवार को दिनभर की मशक्कत के बाद जैसे-जैसे 40 साल तक का रिकॉर्ड मिला, जिसमें अंतिम बार प्रॉपर्टी डॉ. पहाड़िया के नाम पर दर्ज होने और संपत्तिकर शंकर पारवानी के नाम से जमा होने का जिक्र है। उसके बाद तीन बार इसके सौदे हुए। निगम सोमवार सुबह रिकॉर्ड रूम खोलकर एमएस होटल की फाइलें निकालेगा।

जब हादसा हो गया तब नगर निगम ने तोड़े े दो जर्जर मकान

एमएस होटल ढहने के बाद नगर निगम को कागजों में छिपे दो जर्जर मकान नजर आ गए। ये मकान ऐसे थे जिनकी दीवारें जेसीबी के पंजा लगाते ही गिर गईं। निगम हर साल बारिश से पहले जर्जर मकान चुन तो लेता, लेकिन उन्हें खाली नहीं कराता न ही ढहाता। अब एमएस होटल हादसे के बहाने पूरे शहर में खतरनाक घोषित मकानों को गिराने का कह रहा है।

मलबे में चली गई लाखों रुपये से भरी एटीएम मशीन, पुलिस ने की जब्त

राहत कार्य में जुटी नगर निगम की पोकलेन मशीन और जेसीबी से जब मलबा उठाया जा रहा था तो उसी मलबे में आईसीआईसीआई बैंक की एटीएम मशीन भी एक ट्रक में चली गई। मलबा लोखंडे ब्रिज के यहां ट्रक से खाली करवाया तो उसमें मशीन नीचे गिरी इस पर नगर निगम के कर्मचारियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और मशीन जब्त कर लाई।

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