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सीएम समेत 19 मंत्रियों के दौरे, फिर भी कांग्रेस ने जीते कोलारस-मुंगावली

कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाली कोलारस और मुंगावली विधानसभा सीटों में कांग्रेस के परंपरागत...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 07:35 AM IST
कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाली कोलारस और मुंगावली विधानसभा सीटों में कांग्रेस के परंपरागत गढ़ को ढहाने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी थी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा और 19 मंत्रियों समेत 40 से ज्यादा विधायकों ने दौरे, सभाएं कीं। लेकिन दोनों ही सीटों पर भाजपा प्रत्याशी हार गए। हालांकि भाजपा को कांग्रेस के गढ़ में वोटों की जबरदस्त बढ़त मिली है। दोनों ही जगह जीत का अंतर काफी कम हुआ है।

अप्रैल 2017 से अब तक हुए उपचुनावों में लगातार कांग्रेस की यह चौथी जीत है। इससे पहले कांग्रेस ने अटेर और चित्रकूट सीटों पर भी जीत दर्ज की थी। दिसंबर 2013 से अब तक कुल 14 उपचुनाव हुए। इनमें से 9 भाजपा और 5 कांग्रेस ने जीते हैं।

भाजपा को फायदा: हारने के बाद भी दोनों सीटों पर बढ़े वोट

मुंगावली

कांग्रेस

बृजेंद्र सिंह यादव

70808 वोट

नोटा, 2253

2013 में कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र सिंह कालूखेड़ा ने भाजपा के देशराज सिंह यादव को 20765 वोटों से हराया था। यानी कांग्रेस को करीब 18642 वोटों का नुकसान।

मुंगावली में विजयी जुलूस निकालते बृजेंद्र सिंह यादव और उनके समर्थक।

जहां यशोधरा ने हुक्का-पानी बंद करने की धमकी दी, वहां कांग्रेस 165 वोटों से जीती

कोलारस के पड़ोरा में मंत्री यशोधराराजे सिंधिया ने कहा था कि कांग्रेस जीती तो बिजली, सड़क जैसी सुविधाएं वापस ले ली जाएंगी। यहां कांग्रेस को भाजपा से 165 वोट ज्यादा मिले।

अंतर 2123

भाजपा

बाई साहेब

68685 वोट

कोलारस

कांग्रेस

महेंद्र सिंह

82518 वोट

2013 में कांग्रेस के रामसिंह यादव ने भाजपा के देवेंद्र जैन को 24953 वोटों से हराया था। बीएसपी को 23 हजार वोट मिले थे। इस बार बीएसपी नहीं लड़ी। कांग्रेस के 16867 वोट घटे।

अंतर 8086

जहां माया सिंह ने फूल पर मुहर लगाने पर पक्का घर देने की बात की, वहां भाजपा जीती

नगरीय प्रशासन मंत्री माया सिंह ने मुंगावली विधानसभा के सुमेर में ग्रामीणों से फूल पर वोट देने की बात कही थी, वहां भाजपा प्रत्याशी ने 84 वोटों से जीत दर्ज की।

भाजपा

देवेंद्र जैन

74432 वोट

सीएम जहां रात में रुके वहां भी हार गई भाजपा





मुंगावली-कोलारस जीतकर कांग्रेस ने अपनी सीटें बचाईं

पॉलिटिकल एडिटर | भोपाल

विधानसभा चुनाव के पहले कोलारस और मुंगावली में हुए सत्ता के सेमीफाइनल में कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को बड़ा झटका दिया है। साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले इन दोनों उपचुनावों को महत्वपूर्ण माना जा रहा था। जिसमे सिंधिया ने न सिर्फ मुख्यमंत्री बल्कि उनकी कैबिनेट और भाजपा संगठन को भी परास्त कर दिया। नतीजों ने संकेत दिए हैं कि मध्यप्रदेश में अब जनता को प्रलोभन, वादों का झुनझुना देकर या जातिगत आधार पर चुनाव नहीं जीता जा सकता है। इससे एक भ्रम यह भी टूटता दिखाई दे रहा है कि सत्ताधारी दल को उपचुनाव में आसानी से जीत मिल जाती है। दोनों पार्टियों के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का प्रश्न था। इसका अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि मतदान से एक दिन पहले तक दोनों तरफ से 16 एफआईआर दर्ज हुईं। शेष | पेज 9 पर



बहरहाल, शिवराज सरकार के इस कार्यकाल में हुए 14 उपचुनावों में यह पहली बार नहीं है कि चुनाव में दोनों दलों ने इतनी ताकत नहीं झोंकी गई, लेकिन इस बार का उपचुनाव अहम इसलिए है, क्योंकि ठीक आठ महीने बाद विधानसभा के चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में ये नतीजे कांग्रेस को नई ऊर्जा देने के साथ ही भाजपा में संगठनात्मक फेरबदल की संभावनाओं को न केवल मजबूत करेंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि भाजपा विधानसभा चुनाव लड़ने की रणनीति में क्या बदलाव करेगी? इसकी वजह यह भी है कि लगातार 14 साल की भाजपा सरकार के विकास से जुड़े मुद्दे, हर चुनावों में हो रही एक हजार करोड़ रुपए से अधिक की घोषणाएं, स्मार्ट सिटी बनाने के वादे और इस बार तो शिवराज सरकार ने आदिवासी सहरिया समुदाय को साधने के लिए एक हजार रुपए उनके खाते में देने की शुरुआत भी कर दी, इन सबके बावजूद यदि भाजपा के खाते में शिकस्त है तो यह परोक्ष रूप से एंटी इनकंबेंसी की ओर संकेत हैं। भाजपा के पास अब कोई चुनावी पैंतरा भी नहीं होगा क्योंकि केंद्र और राज्य में उनकी ही सरकार है।

ऐसा भी पहली बार हुआ

ऐसा पहली बार हुआ है जब मुख्यमंत्री किसी चुनाव में प्रचार के बाद वापस भोपाल लौटने के बजाय वहीं रुके। ऐसा उन्होंने आठ बार किया। दोनों विधानसभा क्षेत्रों में करीब 1500 करोड़ की सरकारी घोषणाएं हुई। इसी तरह सांसद सिंधिया ने पूरे चुनाव के दौरान 13 दिन-रात यहां ठहरे रहे। कांग्रेस की तरफ से स्टार प्रचारक के तौर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन को छोड़कर सभी प्रदेश के ही नेता रहे। जबकि भाजपा उम्मीदवार को जिताने के लिए शिवराज कैबिनेट के 23 मंत्रियों ने अपनी ताकत झोंकी।

कैडर बेस पार्टी कहीं मास बेस तो नहीं बन गई

आमतौर पर भाजपा की चुनावी रणनीति में बूथ से लेकर पेज प्रमुख तक जमावट होती है। इस बार भाजपा ने दस बूथ पर एक बाहरी व्यक्ति भी तैनात किया, इसके बावजूद वह हार गई। साफ है कि भाजपा का अपना कार्यकर्ता कहीं न कहीं सत्ता या संगठन से नाराज है। यह भाजपा के लिए मंथन का विषय होगा।

कार्तिक हारे पहली चुनावी पारी

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान अपनी पहली चुनावी पारी हार गए हैं। कोलारस विधानसभा उपचुनाव में वो किरार समाज का सम्मेलन संबोधित करने गए थे। माना जा रहा था कि शिवराज सिंह चौहान के युवराज को अपने बीच पाकर किरार- धाकड़ समाज भाजपा के पक्ष में थोकबंद वोट करेगा परंतु ऐसा नहीं हुआ। कोलारस में किरार बेल्ट से कांग्रेस 3706 को वोट प्राप्त हुए हैं और भाजपा को वोट 3439 मिले है। इस तरह से कांग्रेस 267 वोटों से आगे रही।

- बचाव में भाजपा की दलीलें और उनके मायने

1. मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा-2013 में भाजपा की लहर के बाद भी 20 से 25 हजार से हारे। इस बार तो यह अंतर काफी कम है। हमारा तो वोट शेयर बढ़ा।

मतलब : अभी कोई लहर नहीं। वह भी तब, जब मुख्यमंत्री 6 बार रात्रि में रुके।

2. सीएम और नंदकुमार ने कहा- बसपा नहीं थी, जिसका लाभ कांग्रेस को मिला।

मतलब - पिछली बार बसपा के रहते भाजपा बुरी तरह हारी थी। इसलिए यह तर्क खारिज हो जाता है।





कैडर बेस पार्टी कहीं मास बेस तो नहीं बन गई

आमतौर पर भाजपा की चुनावी रणनीति में बूथ से लेकर पेज प्रमुख तक जमावट होती है। इस भाजपा ने दस बूथ पर एक बाहरी व्यक्ति भी तैनात किया, इसके बावजूद वह हार गई। साफ है कि भाजपा का अपना कार्यकर्ता कहीं सत्ता या संगठन से नाराज तो नहीं, यह भाजपा के लिए मंथन का विषय होगा।

- फर्जी वोटरों का गणित भी है सवाल

जैसा कि चुनाव प्रचार के दौरान सामने आया कि मुंगावली और कोलारस में 10 से 18 हजार तक वोटर फर्जी थी। इसमें से महज दस फीसदी ही निरस्त हुए तो बाकी कहां गए। साफ ही कि ईवीएम में। किसके पास गए यह पड़ताल का विषय है।

- 2013 के बाद अब तक 14 उपचुनाव

भाजपा के पाास : विदिशा, विजयराघवगढ़, आगर मालवा, गरोठ, देवास, मैहर, घोड़ा डोंगरी, नेपानगर और बांधवगढ़। ये सभी सीटें भाजपा की थीं। उसने बचाई। विजयराघवगढ़ और मैहर में कांग्रेस छोड़ भाजपा में गए संजय पाठक और नारायण त्रिपाठी ने चुनाव जीते।

कांग्रेस के पास : बहोरीबंद कांग्रेस ने भाजपा से छीनी। अटेर, चित्रकूट और अब मुंगावली व कोलारस सीट कांग्रेस ने बचाई।