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भागवत ध्यान से हमारा आंतरिक विकास होता है

Ratlam News - रतलाम। भागवत कार्य या दिव्य कार्य के लिए हमारी निम्न प्रकृति विरोध करती है। जब दृढ़ निश्चय के साथ संकल्पित होते...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 04:30 AM IST
Ratlam News - bhagwad is our inner development with care
रतलाम। भागवत कार्य या दिव्य कार्य के लिए हमारी निम्न प्रकृति विरोध करती है। जब दृढ़ निश्चय के साथ संकल्पित होते हैं। यह भीतर का विरोध धीरे-धीरे कम होने लगता है। यदि हमें ध्यान करने में कठिनाई होती है, तो हम निस्वार्थ भाव से भागवत कार्य करने का प्रयास करते हैं। यह ध्यान से श्रेष्ठ है। इससे हमारा आंतरिक विकास होता है।

यह बात ऑरों आश्रम में आयोजित पंच दिवसीय साधना, सत्संग शिविर में चौथे दिन प्रो. ज्योति धानकी ने कही। उन्होंने कहा प्रार्थना करो क्योंकि प्रार्थना मन की खुराक है। प्रार्थना परम दिव्य से साक्षात्कार करने हेतु सेतु का कार्य करती है। हरिद्वार से आए साधक डॉ. गोपीवल्लभ पाटीदार ने कहा श्री मां, श्री अरविंद के जुड़े साधक गंभीर, शांत व नीरवता में अपनी साधना करते है। मुंबई से आए साधक नवीन शर्मा ने श्री मां से संबंधित स्मरण सुनाए।

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