अच्छी पहल / जैविक पद्धति से बो रहे फसलें, ताकि बनी रहे उर्वरा शक्ति

राजोद साजोद के युवा किसान गौरव बग्गड़ पौधों को तैयार करते हुए राजोद साजोद के युवा किसान गौरव बग्गड़ पौधों को तैयार करते हुए
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राजोद साजोद के युवा किसान गौरव बग्गड़ पौधों को तैयार करते हुएराजोद साजोद के युवा किसान गौरव बग्गड़ पौधों को तैयार करते हुए

  • किसान गौरव परमानंद बग्गड़ साजोद ने फार्म हाउस में वर्मी कम्पोस्ट व वर्मी वाश के लिए इकाई स्थापित की
  • निमाटेड रोग से लड़ने की क्षमता रहती है, पौधों का अच्छा विकास भी होता ह

Dainik Bhaskar

Dec 04, 2019, 10:38 AM IST

राजौद (धार).रासायनिक खाद के इस्तेमाल से जमीन की उर्वरा शक्ति कम हो रही है। जमीन बंजर हो रही है। ऐसे में प्रदेश के कुछ किसान जैविक पद्धति से फसलें बो रहे हैं। इससे उत्पादित अन्न, फल और सब्जी स्वादिष्ट होती है। प्रदेश सरकार भी किसानाें को जैविक खेती करने को लेकर नवाचार कर रही है। इन नवाचारों से प्रभावित होकर यहां के किसान गौरव परमानंद बग्गड़ साजोद निवासी ने फार्म हाउस पर वर्मी कम्पोस्ट व वर्मीवाश के लिए इकाई स्थापित की है। इसका कम्पोस्ट व वर्मीवाश फलदार पौधों को देे रहे हैं। इससे न केवल जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ रही है बल्कि फसलों की सेहत भी अच्छी है।

किसान गौरव परमानंद बग्गड़ ने 1200 वर्गफीट में खरंजा का प्लेटफार्म बनवाया है, इसमें सभी वर्मीवाश एकत्रित होकर एक गड्‌ढे में जमा किया जात है। जहां से पंप के माध्यम से फल में ड्रिप के माध्यम से पौधों में पहुंचाया जाता है। यूनिट को शेड नेट से ढंककर रखना पड़ता है, ताकि केंचुए जीवित रह सके। तीन महीने में केंचुए का खाद व वर्मीवाश बन जाता है।
 

किसान गौरव ने बताया हम आधुनिक तकनीक से फलदार पौधे तैयार करते है, ताकि पौधों की जड़ों के अच्छे विकास के लिए हल्दी, शहद और बेशर्म के पत्तों का घोल बनाकर पौधे तैयार करते हें। ये पौधे सूक्ष्म (निमाेटेड) रोग से लड़ने की क्षमता रखते हैं।

पुरस्कार भी ले चुके हैं गौरव
किसान गौरव बग्गड़ मध्यप्रदेश की श्रेष्ठ योजना में पुरस्कार योजना के तहत मप्र-2018 में तहसील स्तर पर उद्यानिकी क्षेत्र में पहला स्थान भी ले चुके हैं। इस दिशा में उद्यानिकी विभाग व कृषि विज्ञान केंद्र धार से मार्गदर्शन व प्रशिक्षण भी दिया जाता है।

 

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