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बिगड़ी व्यवस्था से परेशान कर्मचारी बोले- सुधार जरूरी, छह माह बाद लोकसभा चुनाव है

3 वर्ष पहले
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पांचों विधानसभा क्षेत्र के मतदानकर्मियों को अव्यवस्था के बीच मतदान सामग्री जमा करवाने में इस बार 11 घंटे का समय लगा।

बुधवार शाम 6.40 बजे से मतदान सामग्री जमा होना शुरू हो गई थी जो गुरुवार सुबह 5.45 बजे तक जमा होती रही। जमा करवाने के काउंटर कम लगाए, टेंट कम लगाया तो ठंड में लोगों को घास पर मैदान में बैठना पड़ा। कर्मचारी देर रात तक लाइन में खड़े होकर सामग्री जमा होने के इंतजार में परेशान हुए। एक पीठासीन अधिकारी बेहोश तक हो गया था।

2013 के विधानसभा चुनाव में ईवीएम रात 3 बजे तक जमा हो गई थी लेकिन व्यवस्थाओं के कारण सुबह पौने छह बज गए। सामग्री लेकर कर्मचारियों कोे डेढ़ से तीन घंटे तक लाइन में लगना पड़ा। बड़ी मुश्किल से नंबर आया तो काउंटर पर आधा घंटे सामग्री जमा होने में लगा। सामग्री जमा करने में भी कुछ कर्मचारियों को पहली बार लगाने से पूरे समय स्थितियां बिगड़ती रही।

जानिए पांच कारणों को जिससे व्यवस्था फेल हुई, जिन कर्मचारियों को मेहमान की तरह भेजा था वे आकर ठंड में ठिठुरे
एक विधानसभा क्षेत्र की सामग्री जमा करने के लिए पांच काउंटर लगाए। एक काउंटर पर 50 मतदान केंद्रों की सामग्री जमा करने से भीड़ बनी रही।

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कर्मचारियों को ओस से गिली हुई घास पर बैठकर करना पड़ा इंतजार
टेंट छोटा लगाया, ओस से गिली घांस में बैठना पड़ा, 15 डिग्री पर चल रहा तापमान दो दिन में 12 पर है।

हर विधानसभा क्षेत्र के लिए छोटा-सा टेंट लगाया और उसी में दरी बिछाई। टेंट के बाहर कर्मचारियों को आसमान के नीचे ओस से गिली घांस में बैठना पड़ा।

कर्मचारियों के लिए बैठने की व्यवस्था भी नहीं की गई, उन्हें लाइन में खड़े होकर इंतजार करना पड़ा। इस दौरान कई कर्मचारियों से अभद्रता भी हुई। वे कहते रहे सामग्री तारीफ कर दी, लेते समय दपट रहे हैं।

कर्मचारियों ने बताया अधिकारियों की लापरवाही के कारण ऐसी स्थिति बनी। जाते-जाते वे कह रहे थे मई में लोकसभा चुनाव है ध्यान रखें। उनका कहना था कि अगर तैयारी के दौरान ही पुराने अनुभवी कर्मचारियों की मदद लेते तो ऐसे हालात नहीं बनते।

एक काउंटर पर 8-8 कर्मचारी लगाए और अधिकांश पहली बार ड्यूटी दे रहे थे इसलिए धीरे-धीरे सामग्री जमा की। दल आए लेकिन उनसे सामग्री नहीं ले पाए।

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कुछ काउंटर पर ओके रिपोर्ट का फॉर्म खत्म हो गया तो रात 1 बजे सामग्री जमा करना रोक दिया गया। अधिकारियो के पास सील तक नहीं थी।

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हालात.. खाना सामने, मगर भूखे रहे
लाइन में खड़े कर्मचारी भूख से परेशान रहे, क्योंकि नाश्ता-काउंटर कॉलेज गेट पर था। कर्मचारियों ने बताया मतदान सामग्री छोड़कर नहीं जा सकते थे क्योंकि कभी इधर नंबर आ गया तो दिक्कत होगी।

पहले मशीन और स्टेशनरी की सामग्री अलग-अलग जमा होती थी। 11 तरह की सामग्री करने के कारण एक मतदान दल को आधा घंटा लगा।

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सेक्टर अधिकारियों पर विश्वास नहीं किया। उनकेे मतदान सामग्री चैक करने के बाद ओके रिपोर्ट देने के बाद भी काउंटर पर कर्मचारियों ने पूरी सामग्री फिर चैक की।

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कलेक्टर ने रात 2.30 बजे बाद कहा- जल्दी करो
कलेक्टर ने रात 2.30 बजे रिटर्निंग अधिकारियों के जरिए काउंटर पर खड़े कर्मचारियों को सामग्री जमा करवाने में जल्दी करने के लिए कहा। इसके बाद कर्मचारियों में तेजी आई और फिर पौने छह बजे तक सामग्री जमा हुईं।

कमियों को दूर करेंगे
सामग्री जमा करने में जो कमियां रह गई है उनको को पाइंट आउट किया जा रहा है। इसमें सुधार करेंगे। प्रवीण फुलपगारे, उप जिला निर्वाचन अधिकारी

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